मानसून में रेल सुरक्षा: भोपाल मंडल ने 1023 किमी ट्रैक पर कसी कमर
पश्चिम मध्य रेलवे का भोपाल मंडल मानसून के दौरान सुरक्षित रेल परिचालन सुनिश्चित करने के लिए 1023 किलोमीटर ट्रैक पर विशेष निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था लागू कर रहा है। संवेदनशील स्थानों पर बड़ी संख्या में कर्मचारी तैनात किए गए हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 5 सितंबर 2026
पश्चिम मध्य रेलवे का भोपाल मंडल आगामी मानसून के मौसम में तेज बारिश, आंधी-तूफान, जलभराव और बाढ़ जैसी संभावित आपातकालीन परिस्थितियों के दौरान रेल परिचालन को सुरक्षित, संरक्षित और निर्बाध बनाए रखने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां पूरी कर चुका है। मंडल के करीब 1023 किलोमीटर लंबे रेल नेटवर्क के हर महत्वपूर्ण हिस्से, जिसमें रेल पथ, पुल, सिग्नलिंग उपकरण, विद्युत प्रणाली और जल निकासी व्यवस्था शामिल हैं, पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
मंडल रेल प्रबंधक श्री पंकज त्यागी के निर्देशन में, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया कि मानसून के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है और सभी संबंधित विभागों को उच्च सतर्कता पर रखा गया है। जोखिम वाले और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां अतिरिक्त सुरक्षा एवं निगरानी उपाय किए गए हैं।
रेल पथ की सतत निगरानी के लिए विशेष तैनाती
रेल पथ की निरंतर निगरानी और किसी भी संभावित खतरे की समय पर पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, मंडल ने संवेदनशील इलाकों में 118 पेट्रोलमैन और 174 वाचमैन सहित कुल 292 कर्मचारियों को तैनात किया है। इन कर्मचारियों द्वारा नियमित रूप से निर्धारित क्षेत्रों में 'मानसून पेट्रोलिंग' की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य रेल पथ में किसी भी प्रकार की क्षति, जलभराव या अन्य असामान्य स्थिति का तुरंत पता लगाना है, ताकि रेल यातायात पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
भोपाल मंडल का रेल नेटवर्क खंडवा–इटारसी (183 किमी), इटारसी–भोपाल (92 किमी), भोपाल–बीना (138 किमी), बीना–गुना (118 किमी) और गुना–मक्सी (214 किमी) जैसे महत्वपूर्ण रेलखंडों तक फैला हुआ है। इतने बड़े और विस्तृत नेटवर्क पर सुरक्षित रेल संचालन बनाए रखने के लिए पेट्रोलिंग और निरीक्षण की व्यवस्था को विशेष रूप से सुदृढ़ किया गया है।
पुलों और जल निकासी पर विशेष ध्यान
मानसून के दौरान रेल संरक्षा का एक प्रमुख पहलू पुलों की सुरक्षा है। मंडल ने अपने अधीन आने वाले सभी बांधों, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं को चिन्हित कर उनकी निगरानी प्रणाली को और भी कड़ा कर दिया है। संवेदनशील पुलों पर 'वॉटर लेवल अलार्म सिस्टम' स्थापित किए गए हैं। यह प्रणाली जल स्तर में किसी भी प्रकार की असामान्य वृद्धि की स्थिति में तुरंत चेतावनी जारी करेगी, जिससे आपातकालीन कार्रवाई के लिए समय रहते कदम उठाए जा सकें।
रेलवे ट्रैक और यार्ड क्षेत्रों में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए, नालियों, पुलियों और अन्य जल निकासी मार्गों की बड़े पैमाने पर सफाई का कार्य किया गया है। जल निकासी व्यवस्था का गहन निरीक्षण कर सभी आवश्यक रखरखाव कार्य भी पूरे कर लिए गए हैं, ताकि बारिश का पानी ट्रैक पर जमा न हो सके और रेल परिचालन सुचारू रूप से चलता रहे।
विद्युत आपूर्ति और संचार व्यवस्था की मजबूती
विद्युतीकृत रेलखंडों पर ओवरहेड उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, रेल परिचालन में बाधा उत्पन्न करने वाली पेड़ों की अतिरिक्त शाखाओं की छंटाई का कार्य भी पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, ट्रैक और सिग्नलिंग प्रणाली का भी नियमित निरीक्षण और आवश्यक रखरखाव किया जा रहा है।
मानसून के दौरान सिग्नलिंग और संचार व्यवस्था में किसी भी प्रकार की बाधा को रोकने के लिए, सिग्नलिंग केबलों की जांच, मेगरिंग और अन्य तकनीकी अनुरक्षण कार्य युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित संपर्क और प्रभावी समन्वय स्थापित करने के लिए, वॉकी-टॉकी सेटों को पूरी तरह से कार्यशील और चार्ज अवस्था में रखा गया है।
समन्वित प्रयास और प्रतिबद्धता
भोपाल मंडल ने स्थानीय प्रशासन और अन्य आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क और समन्वय स्थापित किया है। संभावित आपात स्थितियों से निपटने के लिए त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने हेतु सभी संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, पश्चिम मध्य रेलवे का भोपाल मंडल मानसून के पूरे मौसम में एक सुरक्षित और विश्वसनीय रेल सेवा प्रदान करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
