माँ भगवती की महिमा: आचार्य निलिम्प त्रिपाठी ने बताई भक्ति से भयमुक्ति का मार्ग
भोपाल में श्रीमद् देवी भागवत पुराण कथा के चतुर्थ दिवस पर आचार्य डॉ. निलिम्प त्रिपाठी ने मां भगवती की महिमा, शक्ति उपासना और भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा भय से मुक्ति दिलाती है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 14 अक्टूबर 2026
भोपाल के छान स्थित महर्षि शिक्षा संस्थान में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत पुराण कथा के चतुर्थ दिवस पर आचार्य डॉ. निलिम्प त्रिपाठी ने मां भगवती की महिमा, शक्ति उपासना और भक्ति के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति मनुष्य को भय से पूर्णतः मुक्त कर देती है और उसे धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है। देवी की कृपा से भक्त के भीतर आत्मविश्वास, अदम्य साहस और सकारात्मकता का संचार होता है, जिससे जीवन की विषम परिस्थितियों का सामना करने में सहायता मिलती है।
व्यासपीठ से कथावाचन करते हुए आचार्य डॉ. निलिम्प त्रिपाठी ने देवी भागवत पुराण के विभिन्न प्रसंगों की व्याख्या की। उन्होंने भारतीय सनातन परंपरा में शक्ति को सृष्टि के मूल आधार के रूप में स्वीकार किए जाने पर बल दिया। आचार्य त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि मां भगवती की उपासना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को आत्मिक बल, असीम धैर्य और जीवन की कठिनतम परिस्थितियों से जूझने की क्षमता भी प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि श्रद्धा, निष्ठा और निरंतर नामस्मरण के माध्यम से व्यक्ति अपने मन को एकाग्र करने में सफल होता है और जीवन में धर्म एवं सदाचार को अपनाकर परम आत्मिक शांति प्राप्त कर सकता है।
सृष्टि उत्पत्ति और पृथ्वी का महत्व
कथा के दौरान आचार्य डॉ. निलिम्प त्रिपाठी ने पृथ्वी की उत्पत्ति से जुड़े एक पौराणिक प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार मधु और कैटभ नामक राक्षसों के मेद (चर्बी) से पृथ्वी का नाम 'मेदिनी' पड़ा। पृथ्वी समस्त प्राणियों को धारण करती है, इसी कारण उसे 'धरणी' भी कहा जाता है। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति, पृथ्वी केGrand महत्व और सनातन धर्म में वर्णित पौराणिक मान्यताओं को श्रद्धालुओं के समक्ष सरल शब्दों में प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को भारतीय धर्मग्रंथों में निहित गहन आध्यात्मिक संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करने के लिए प्रेरित किया, ताकि वे अपने जीवन को अधिक सार्थक बना सकें।
भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक चेतना की भूमिका
इस कथा आयोजन में शक्ति उपासना के साथ-साथ भक्ति, धर्म, आस्था और मानव जीवन में आध्यात्मिक चेतना की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी गहन चर्चा हुई। यह बताया गया कि जब मनुष्य सच्चे हृदय से मां अम्बा का स्मरण करता है और अपने दैनिक जीवन में सदाचार तथा धर्म का निष्ठापूर्वक पालन करता है, तब उसे अलौकिक मानसिक संबल प्राप्त होता है और वह जीवन की कठिनाइयों से लड़ने की प्रेरणा पाता है। नामस्मरण को मन की चंचलता को दूर करने तथा ईश्वर के प्रति विश्वास को दृढ़ करने का अत्यंत प्रभावी माध्यम बताया गया।
आचार्य जी ने इस बात पर जोर दिया कि देवी की आराधना भक्त के भीतर समर्पण की भावना और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करती है। उन्होंने भक्ति के वास्तविक उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका केवल सांसारिक सुखों की प्राप्ति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने आचरण को श्रेष्ठ बनाना, दूसरों के प्रति करुणा का भाव रखना और जीवन में सत्य तथा धर्म का निर्वाह करना भी भक्ति का अभिन्न अंग है। शक्ति की उपासना व्यक्ति को उसकी आंतरिक दुर्बलताओं पर विजय प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है।
कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। देवी भजनों, मंत्रोच्चार और जयकारों से पूरा परिसर भक्तिमय हो गया था। श्रद्धालुओं ने मंत्रमुग्ध होकर कथा का श्रवण किया और मां भगवती की महिमा का गुणगान किया। इस आयोजन के माध्यम से धार्मिक आस्था, सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों का महत्वपूर्ण संदेश जन-जन तक पहुँचाया गया।
