मैसूरु में 'परम्परे परिसरा पाठशाला' का शुभारंभ, शांति और प्रकृति का होगा संगम
मैसूरु में 21 सितंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस पर 'परम्परे परिसरा पाठशाला' का उद्घाटन होगा। यह केंद्र सामुदायिक जीवन, प्रकृति और शांति अर्थव्यवस्था पर...

mesoor karnataka | संवाददाता: दिनेश सिकरवार
द क्लिफ न्यूज़ | मैसूरु | 15 सितंबर 2026
अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के अवसर पर कर्नाटक के मैसूरु में एक अभिनव पहल 'परम्परे परिसरा पाठशाला' का शुभारंभ किया जा रहा है। 21 सितंबर 2026, सोमवार को प्रातः 5:55 बजे के.आर.एस. रोड स्थित पंप हाउस परिसर में इस पाठशाला का विधिवत उद्घाटन होगा। यह केंद्र केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित न होकर, शांति, रचनात्मकता और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए सामुदायिक जीवन को समृद्ध करने के एक अनुभव-क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता और एकता परिषद के अध्यक्ष पी. वी. राजगोपाल होंगे, जो इस पाठशाला का उद्घाटन करेंगे। पी. वी. राजगोपाल को सामाजिक न्याय और अहिंसा के क्षेत्र में उनके दशकों के अथक प्रयासों के लिए जाना जाता है। उन्हें वर्ष 2023 में प्रतिष्ठित 40वें निवानो पीस प्राइज से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी उपस्थिति और मार्गदर्शन इस पहल को अहिंसा और सामाजिक न्याय की उस परंपरा को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा, जिसके वे स्वयं प्रणेता रहे हैं।
सामुदायिक जीवन और सतत विकास पर केंद्रित पहल
आयोजकों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 'परम्परे परिसरा पाठशाला' का उद्देश्य सामुदायिक जीवन के विभिन्न महत्वपूर्ण आयामों को एक साथ लाना है। इसमें कृषि, स्वास्थ्य, स्वदेशी आजीविका, संस्कृति और सतत विकास जैसे विषयों को प्रमुखता दी जाएगी। इस पहल का एक व्यापक लक्ष्य यह भी है कि लोग, प्रकृति और संस्कृति के बीच एक स्थायी संतुलन स्थापित किया जा सके। इसके माध्यम से वर्ष 2047 और उसके बाद के भविष्य के लिए एक 'शांति अर्थव्यवस्था' की नींव रखने की दिशा में ठोस कार्ययोजनाएँ तैयार की जाएंगी।
यह केंद्र इस संदेश को रेखांकित करेगा कि शांति केवल युद्ध या संघर्षों की अनुपस्थिति मात्र नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे जीवन-वातावरण का निर्माण है जिसमें मनुष्य, प्रकृति और समुदाय परस्पर सहयोग करते हुए प्रगति कर सकें। यह दृष्टिकोण स्थायी विकास और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है। इस समग्र दृष्टिकोण के तहत, स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के साथ सह-अस्तित्व और सामुदायिक कल्याण को सर्वोपरि रखा जाएगा, जिससे एक अधिक न्यायसंगत और टिकाऊ समाज का निर्माण हो सके।
अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस की भावना से प्रेरित
संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस का इस वर्ष का विषय 'सभी के लिए, हर जगह और हर दिन शांति में निवेश करना' है। मैसूरु में शुरू होने वाली यह पाठशाला इसी वैश्विक भावना से प्रेरित है। यह शांति को न केवल एक राजनीतिक या सामाजिक अवधारणा के रूप में, बल्कि एक जीवन-पद्धति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसे रचनात्मकता, सामाजिक जुड़ाव और कृषि के माध्यम से पोषित किया जाएगा।
आमंत्रण-पत्र में इस पहल को प्रकृति, समुदाय और एक सतत भविष्य के लिए सीखने का एक समग्र केंद्र बताया गया है। 'बिल्ड, लर्न, ग्रो टुगेदर' (निर्माण करें, सीखें, साथ मिलकर बढ़ें) के नारे के साथ, यह आयोजन शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और सतत विकास की एक नई मिसाल कायम करने की आकांक्षा रखता है। यह केवल एक घोषणापत्र नहीं, बल्कि एक सक्रिय प्रयास है जो सहभागी सीखने और स्थानीय संसाधनों के सतत उपयोग पर बल देता है, ताकि एक अधिक लचीला और आत्मनिर्भर समुदाय विकसित हो सके।
शांति अर्थव्यवस्था की ओर एक व्यावहारिक कदम
कार्यक्रम में परिवारों, मित्रों और प्रकृति-प्रेमियों को बड़ी संख्या में आमंत्रित किया गया है, ताकि वे सब मिलकर सीखने और विकसित होने की इस यात्रा का हिस्सा बन सकें। मैसूरु के के.आर.एस. रोड पर आयोजित होने वाला यह आयोजन, शांति के प्रति एक नई और व्यावहारिक दृष्टि प्रस्तुत करता है। यदि यह प्रयास अपने घोषित उद्देश्यों के अनुरूप आगे बढ़ता है, तो यह भविष्य में शांति, प्रकृति और सामुदायिक जीवन को एक सूत्र में पिरोने वाली एक विशिष्ट पहचान स्थापित कर सकता है, जो स्थायी विकास के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन सकती है।
इस पाठशाला में भविष्य की पीढ़ियों के लिए ज्ञान हस्तांतरण और सामुदायिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया जाएगा। स्थानीय परंपराओं, स्वदेशी ज्ञान और आधुनिक सतत प्रथाओं का एकीकरण इस केंद्र की विशेषता होगी। यह उम्मीद की जाती है कि 'परम्परे परिसरा पाठशाला' मैसूरु और आसपास के क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास और पर्यावरणीय चेतना को बढ़ावा देने में एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेगी, जिससे 'शांति अर्थव्यवस्था' के वास्तविक अर्थ को साकार किया जा सके। यह केवल एक संस्थान का शुभारंभ नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया का आरम्भ है जो सामुदायिक भागीदारी और सहयोगात्मक कार्रवाई पर आधारित है, जिसका अंतिम लक्ष्य सभी के लिए एक शांतिपूर्ण और समृद्ध भविष्य का निर्माण करना है।
