महोबा में वीर ऊदल की जयंती पर उमड़ी भीड़, संग्रहालय निर्माण की उठी मांग
कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर महोबा में वीर ऊदल की जयंती मनाई गई। बुंदेली समाज ने वीर भूमि में आल्हा-ऊदल के जीवन को दर्शाने वाले...

MAHOBA | संवाददाता: अभिनय सिंह चंदेल
द क्लिफ न्यूज़ | महोबा | 10 सितंबर 2026
उत्तर प्रदेश के महोबा में 11वीं और 12वीं शताब्दी के महान चंदेल योद्धा वीर ऊदल की जयंती कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर अत्यंत श्रद्धा और गौरव के साथ मनाई गई। सुबह से हो रही बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में बुंदेली समाज के लोग ऊदल चौक स्थित उनके स्मारक पर एकत्रित हुए। उपस्थित लोगों ने वीर ऊदल की अमर गाथाओं का स्मरण करते हुए उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान एक प्रमुख मांग यह उठी कि महोबा में एक ऐसा आधुनिक संग्रहालय स्थापित किया जाए, जिसमें आल्हा और ऊदल के जन्म से लेकर उनकी ऐतिहासिक वीरता और बलिदान तक का सचित्र वर्णन सुरक्षित रहे।
बुंदेली समाज की वीरतापूर्ण गाथाओं का स्मरण
बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने बताया कि वीर ऊदल का जन्म महोबा से लगभग 10 किलोमीटर दूर दिसरापुर गांव में सेनापति दक्षराज और माता देवला के घर हुआ था। उनके पिता की हत्या के बाद राजा परमाल ने उनका पालन-पोषण किया। आल्हा और ऊदल ने मांडवगढ़ के राजाओं को पराजित कर अपने पिता की मृत्यु का बदला लिया और दिल्ली के शासक पृथ्वीराज चौहान के विरुद्ध भी युद्ध में विजय प्राप्त की। उन्होंने अपने जीवनकाल में 52 लड़ाइयां लड़कर चंदेल साम्राज्य का विस्तार किया।
ऐतिहासिक विजयों और बलिदान का संरक्षण
महामंत्री डॉ. अजय बरसैंया ने कहा कि 1182 में कीरत सागर के तट पर पृथ्वीराज चौहान की सेना पर प्राप्त विजय ने वीर ऊदल की वीरता को जन-जन तक पहुँचाया। महाकवि जगनिक ने 'आल्हा खंड' के माध्यम से उन्हें इतिहास में अमर कर दिया। अंततः बैरागढ़ में युद्ध के दौरान ऊदल वीरगति को प्राप्त हुए। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि आज संरक्षण के अभाव में उनकी निशानियां लुप्त होती जा रही हैं। इस अवसर पर अवधेश, पवन गुप्ता, गया प्रसाद, प्रेम चौरसिया, मनप्रीत सिंह अरोड़ा, प्रमोद शुक्ला, अच्छे लाल, महेंद्र, दीपू, मुन्ना और रवि सोनी सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। महोबा के कजली महोत्सव में आज भी उनकी विजय यात्रा की गौरवशाली परंपरा जीवंत रहती है।
