महोबा में मूंगफली बीज वितरण: एमएलसी ने उठाई उच्चस्तरीय जांच की मांग
महोबा में मूंगफली बीज वितरण योजना में अनियमितताओं के आरोप। एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर ने विधान परिषद में किसानों के शोषण और गलत बीज वितरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

द क्लिफ न्यूज़ | महोबा | 4 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स (NMEO) के तहत संचालित मूंगफली बीज वितरण योजना को लेकर विधान परिषद में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) जितेंद्र सिंह सेंगर ने नियम-115 के तहत सदन में इस योजना के क्रियान्वयन में अनियमितताओं, किसानों के कथित शोषण और कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
एमएलसी सेंगर ने सदन में कहा कि महोबा जिले के कबरई, चरखारी, कुलपहाड़, जैतपुर और पनवाड़ी केंद्रों पर लगभग 10 हजार किसानों को मूंगफली बीज वितरित किया जाना था। योजना के अनुसार, यह वितरण किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और वैल्यू चेन पार्टनर के माध्यम से होना तय था। हालांकि, एमएलसी ने आरोप लगाया कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जिससे किसानों को योजना का अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका।
बीज वितरण में देरी और दुरुपयोग के आरोप
श्री सेंगर ने विशेष रूप से बीज वितरण के समय पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा अप्रैल माह में मूंगफली का बीज उपलब्ध करा दिया गया था, लेकिन इसका वितरण 30 जून से शुरू किया गया। यह वह समय था जब अधिकांश क्षेत्रों में मूंगफली की बुवाई का उपयुक्त समय लगभग समाप्त हो चुका था। इस देरी के कारण बड़ी संख्या में किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल पाया।
इसके अतिरिक्त, एमएलसी ने किसानों से सीधे तौर पर जुड़ी गंभीर शिकायतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई किसानों से ई-पॉस मशीन पर अंगूठा लगवाकर रिकॉर्ड में मूंगफली बीज का वितरण दिखाया गया, जबकि हकीकत में उन्हें उड़द या तिल का बीज थमाया गया। इससे भी गंभीर बात यह है कि कुछ किसानों से ₹1500 से ₹3000 तक की अवैध वसूली किए जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
इन आरोपों के मद्देनजर, एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर ने सदन से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है। उन्होंने पांचों भंडारण केंद्रों के स्टॉक, वितरण अभिलेख, ई-पॉस मशीन के डेटा और लाभार्थी किसानों का भौतिक सत्यापन कराने की भी वकालत की। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि कोई अनियमितता हुई है, तो दोषियों पर कार्रवाई हो और किसानों का सरकारी योजनाओं पर विश्वास बना रहे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने प्रकरण को आवश्यक कार्रवाई के लिए सरकार को निर्देशित किया है। इस निर्देश के बाद, प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अब किसानों और जनप्रतिनिधियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कब जांच के आदेश जारी होते हैं और आरोपों की सत्यता सामने आती है।
