महोबा में गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के जिलाधिकारी ने दिए निर्देश
महोबा की जिलाधिकारी गजल भारद्वाज ने गो-आश्रय स्थलों में गोवंश के लिए चारा, पानी और सुरक्षा के इंतजामों की समीक्षा करते हुए सभी व्यवस्थाएं तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।

संवाददाता: अभिनय सिंह चंदेल
द क्लिफ न्यूज़ | महोबा | 8 सितंबर 2026
महोबा की जिलाधिकारी गजल भारद्वाज ने जिला स्तरीय गो-वंश संरक्षण, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन समिति की बैठक में गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वर्षा ऋतु को देखते हुए सभी गो-आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश के लिए पर्याप्त मात्रा में भूसा, हरा चारा और पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके अतिरिक्त, बारिश से बचाव के लिए भी उचित प्रबंध किए जाने चाहिए।
जिलाधिकारी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जिन गो-आश्रय स्थलों में अभी तक शेड, पानी की चरही और भूसा गोदाम जैसी मूलभूत सुविधाओं का निर्माण नहीं हुआ है, वहां संबंधित खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) को तत्काल निर्माण कार्य शुरू कराने के आदेश दिए गए हैं। यह कदम गोवंश को मौसम की मार से बचाने और उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
गोवंश के बेहतर प्रबंधन पर जोर
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिन गो-आश्रय स्थलों में गोवंश की संख्या कम है और प्रबंधन की दृष्टि से वे छोटे हैं, उन्हें बड़े गो-संरक्षण केंद्रों में स्थानांतरित किया जाएगा। इस प्रक्रिया से गोवंश का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित होगा और उन्हें आवश्यक सुविधाएं मिल सकेंगी। जिलाधिकारी ने कहा कि किसी भी गो-आश्रय स्थल में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गोवंश के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री सहभागिता योजना की समीक्षा
जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत गोवंश के भरण-पोषण और भुगतान की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजना से संबंधित सभी प्रकार के भुगतान समय पर पूरे किए जाएं। इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश सरकार प्रति गोवंश प्रतिदिन 50 रुपये, यानी मासिक 1500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करती है। अधिकतम चार निराश्रित गोवंश पालने वाले व्यक्ति को सरकार सालाना 72,000 रुपये तक की सहायता दे सकती है, जिसका उद्देश्य निराश्रित गोवंश का संरक्षण और संवर्धन करना है। उन्होंने योजनांतर्गत सुपुर्द किए गए गोवंशों का सत्यापन कराने के भी निर्देश दिए।
