महोबा: भूमि संरक्षण विभाग पर किसानों की जमीन से मिट्टी चुराने का आरोप
किसानों ने बिना सहमति अपनी निजी भूमि से उपजाऊ मिट्टी उठाने और मेड़बंदी कराने का आरोप लगाते हुए जांच और मुआवजे की मांग की है।

संवाददाता: अभिनय सिंह चंदेल
द क्लिफ न्यूज़ | महोबा | 2 सितंबर 2026
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में भूमि संरक्षण विभाग की कुलपहाड़ इकाई पर किसानों की निजी भूमि से उनकी सहमति के बिना उपजाऊ मिट्टी उठाने और मेड़बंदी कराने का गंभीर आरोप लगा है। इस संबंध में इंद्रहटा गांव के किसान आशुतोष शर्मा सहित अन्य प्रभावित काश्तकारों ने उप कृषि निदेशक महोबा को एक शिकायती पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत पत्र में किसानों ने दावा किया है कि इंद्रहटा गांव के गाटा संख्या 603/1 स्थित उनकी स्वामित्व वाली भूमि से भूमि संरक्षण विभाग के अधिकारियों ने कथित तौर पर बिना अनुमति मिट्टी उठाई है। किसानों के अनुसार, विभाग के अधिकारी ओपी रावत और प्रदीप राजपूत ने सरकारी धन का दुरुपयोग करते हुए किसानों के खेतों से मिट्टी निकलवाकर मेड़बंदी का निर्माण कराया। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस कार्य के लिए एलएनटी मशीन का प्रयोग लगभग 40 घंटे तक किया गया।
किसानों की सहमति और जानकारी का अभाव
किसानों का मुख्य आरोप है कि उनकी जमीन से काफी लंबी, चौड़ी और गहरी खुदाई करके मिट्टी निकाली गई, लेकिन इस प्रक्रिया के लिए न तो उनकी सहमति ली गई और न ही उन्हें इसकी कोई जानकारी दी गई। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इस कथित कृत्य से उन्हें लाखों रुपये मूल्य की उपजाऊ मिट्टी का नुकसान हुआ है, जिससे उनकी परेशानी लगातार बढ़ रही है।
जांच और मुआवजे की मांग
शिकायत में यह भी बताया गया है कि राजस्व टीम द्वारा स्थल निरीक्षण किया जा चुका है, जिसमें प्रथम दृष्टया भूमि संरक्षण विभाग के पदाधिकारियों को दोषी पाया गया है। किसानों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, मिट्टी की क्षति का आकलन कराकर उचित मुआवजा दिलाने और जांच पूरी होने तक संबंधित सरकारी भुगतान पर रोक लगाने की मांग की है।
किसानों ने यह सवाल भी उठाया है कि बिना किसानों की सहमति के उनकी भूमि से मिट्टी उठाने की अनुमति किस आधार पर दी गई और सरकारी धन का किस प्रकार उपयोग किया गया। उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की भी मांग की है। इस शिकायत की एक प्रतिलिपि आयुक्त बांदा, जिलाधिकारी महोबा, एसडीएम कुलपहाड़, जिला भूमि संरक्षण अधिकारी कुलपहाड़, उप कृषि निदेशक महोबा, बुंदेलखंड किसान यूनियन तथा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को भी प्रेषित की गई है, ताकि मामले की गंभीरता को समझा जा सके और त्वरित न्याय मिल सके।
