महाराष्ट्र से गुना पहुंचे निरंकारी संत, समालखा समागम को हुए रवाना
महाराष्ट्र के भादुप से विशेष बस द्वारा गुना पहुंचे निरंकारी संत-महात्माओं का स्थानीय संगत ने सत्संग भवन में भव्य स्वागत किया।

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 20 अक्टूबर 2026
संत निरंकारी मिशन के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक यात्रा के तहत, महाराष्ट्र के भादुप से विशेष बस द्वारा निरंकारी संत-महात्माओं का एक जत्था गुना पहुंचा। स्थानीय निरंकारी संगत ने गुना स्थित निरंकारी सत्संग भवन में इन आगंतुक महात्माओं का अत्यंत गर्मजोशी और भक्तिभाव से स्वागत किया। इस आगमन से सत्संग भवन का वातावरण श्रद्धा और उल्लास से परिपूर्ण हो गया। यह आगमन संत निरंकारी मिशन की एकता और आध्यात्मिक जुड़ाव का एक जीवंत प्रमाण था, जहाँ विभिन्न क्षेत्रों से संत-महात्मा एक साझा उद्देश्य के लिए एकत्र होते हैं।
स्वागत के उपरांत, सभी संत-महात्माओं के लिए सत्संग भवन में एक विशेष लंगर का आयोजन किया गया। यहां उपस्थित सभी अनुयायियों ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। इस लंगर में सेवा का अवसर प्राप्त करना भी अनुयायियों के लिए एक अत्यंत सौभाग्य का विषय माना जाता है। यह मिलन संत निरंकारी मिशन की एकता और समर्पण की भावना को दर्शाता है, जहाँ प्रेम, सेवा और सदभाव के मूल्यों को सर्वोपरि रखा जाता है। इस आयोजन ने स्थानीय संगत को भी मिशन के उच्च आदर्शों को साझा करने और उन्हें आत्मसात करने का अवसर प्रदान किया।
समालखा वार्षिक समागम के लिए प्रस्थान
महाराष्ट्र से आए सभी संत-महात्मा अब हरियाणा के समालखा में आयोजित होने वाले 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम में भाग लेने के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। यह समागम संत निरंकारी मिशन का एक विशाल और ऐतिहासिक आयोजन होता है, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। यह वार्षिक समागम ब्रह्मज्ञान की वर्षा करने वाले पूजनीय सतगुरु के पावन सानिध्य में आयोजित होता है, जहाँ विभिन्न सामाजिक, आध्यात्मिक और मानवतावादी विषयों पर प्रवचन होते हैं।
इस अवसर पर, गुना की स्थानीय निरंकारी संगत के प्रतिनिधियों ने महाराष्ट्र से पधारे महात्माओं को समागम की सफलता के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दीं। संतों का यह समूह, पूर्ण उत्साह और ऊर्जा के साथ, अपने आध्यात्मिक गंतव्य की ओर बढ़ चला है, जो मिशन के उद्देश्यों और शांति संदेश के प्रसार में योगदान देगा। समालखा समागम न केवल आध्यात्मिक उत्थान का माध्यम बनता है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, भाईचारे और सेवा की भावना को भी सुदृढ़ करता है। इन महात्माओं की यात्रा इस पावन पर्व का हिस्सा बनने की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जहाँ वे न केवल ज्ञान प्राप्त करेंगे, बल्कि मिशन के प्रेम और एकता के संदेश को भी अपने साथ ले जाएंगे।
