महादेव परिवार की तीसरी विशाल कांवड़ यात्रा, 350 भक्तों ने किया जलाभिषेक
देवरी में महादेव परिवार द्वारा लगातार तीसरे वर्ष विशाल कांवड़ यात्रा का आयोजन किया गया। करीब 350 शिवभक्तों ने बरमान से नर्मदा जल लाकर पशुपतिनाथ मंदिर में जलाभिषेक किया।

द क्लिफ न्यूज़ | देवरी | 10 अगस्त 2026
सावन माह के पावन अवसर पर महादेव परिवार द्वारा देवरी नगर में लगातार तीसरे वर्ष एक विशाल कांवड़ यात्रा का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में लगभग 350 शिवभक्तों ने भाग लिया, जिन्होंने बरमान से नर्मदा का पवित्र जल लेकर पैदल यात्रा की और फूटा मंदिर स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
यह परंपरा पिछले तीन वर्षों से जारी है, जिसका मुख्य उद्देश्य सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था और भगवान शिव के प्रति श्रद्धा को जन-जन तक पहुंचाना है। कांवड़ यात्रा में 7 वर्ष की आयु से लेकर 45 वर्ष तक के युवा और वरिष्ठ शिवभक्त शामिल हुए। यात्रा के दौरान, श्रद्धालुओं ने पूरे मार्ग में भगवान शिव के जयकारों से भक्तिमय वातावरण बना दिया, जिससे स्थानीय नागरिक भी उत्साहित हुए।
आकर्षणपूर्ण झांकियां और नगरवासियों का स्वागत
देवरी नगर में प्रवेश करने के बाद, कांवड़ यात्रा ने विभिन्न मार्गों से प्रस्थान किया। इस यात्रा की एक विशेष विशेषता भगवान शिव से संबंधित विभिन्न आकर्षक झांकियां रहीं, जिन्होंने श्रद्धालुओं के साथ-साथ मार्ग में खड़े नगरवासियों का भी ध्यान खींचा। झांकियों और कांवड़ यात्रियों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में नगरवासी उमड़े। जगह-जगह स्थानीय लोगों ने कांवड़ यात्रियों का पुष्प वर्षा और उत्साहवर्धन के साथ स्वागत किया।
पशुपतिनाथ मंदिर में भक्तिमय जलाभिषेक
बरमान से नर्मदा का पवित्र जल लेकर पहुंचे कांवड़ यात्रियों ने देवरी के पशुपतिनाथ मंदिर में विधि-विधान और पूर्ण श्रद्धा के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक किया। इस दौरान मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयघोषों से गूंज उठा। जलाभिषेक के उपरांत, सभी श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम में गणमान्य नागरिकों, महिलाओं और युवाओं सहित बड़ी संख्या में शिवभक्त उपस्थित रहे, जिसने आयोजन को एक विशाल जन-सहभागिता का स्वरूप दिया।
महादेव परिवार द्वारा आयोजित यह तीसरी विशाल कांवड़ यात्रा देवरी नगर में धार्मिक उत्साह और भक्ति की एक अलख जगाने में सफल रही है। इस आयोजन ने समुदाय के भीतर आध्यात्मिक जुड़ाव को और मजबूत किया है।
