मध्यप्रदेश में 'जन सुरक्षा–युवा सृजन संवाद': पुलिसिंग को समझ रहे विद्यार्थी
मध्य प्रदेश पुलिस और स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 52 जिलों में 'जन सुरक्षा–युवा सृजन संवाद' कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत विद्यार्थियों को कानून, सुरक्षा और पुलिस की कार्यप्रणाली की जानकारी दी जा रही है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 19 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश पुलिस और स्कूल शिक्षा विभाग, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के तकनीकी सहयोग से, प्रदेश के सभी 52 जिलों में 'जन सुरक्षा–युवा सृजन संवाद' नामक एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का संचालन कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य युवा पीढ़ी को कानून, उनके अधिकारों एवं कर्तव्यों, व्यक्तिगत सुरक्षा के उपायों और विशेष रूप से साइबर अपराधों से बचाव के बारे में शिक्षित करना है। इस कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 14 जुलाई 2026 को भोपाल में किया था, जिसके साथ ही एक विधिक पाठ्य सामग्री 'जन सुरक्षा–युवा सृजन संवाद' पुस्तक का विमोचन भी हुआ था।
यह सामुदायिक पुलिसिंग की राज्यव्यापी पहल विद्यार्थियों को न केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करती है, बल्कि उन्हें पुलिस थानों, जिला पुलिस कंट्रोल रूम और डायल-112 जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं की कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष अनुभव भी कराती है। इसका लक्ष्य युवाओं में सुरक्षा की भावना को बढ़ाना और कानून के प्रति उनके विश्वास को सुदृढ़ करना है।
एक समान प्रशिक्षण और पाठ्य सामग्री की व्यवस्था
कार्यक्रम के सुचारू और एकरूप संचालन के लिए पुलिस मुख्यालय ने एक विस्तृत हैंडबुक और पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन (PPT) तैयार किया है। विधिक पाठ्य सामग्री के निर्माण में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सामुदायिक पुलिसिंग) श्री डी.पी. गुप्ता और सचिव स्कूल शिक्षा विभाग डॉ. संजय गोयल ने मार्गदर्शन किया, जबकि उप पुलिस महानिदेशक (सामुदायिक पुलिसिंग) डॉ. विनीत कपूर ने मुख्य संपादन और सहायक पुलिस महानिदेशक श्री अमृत मीणा ने सह-संपादन का कार्य संभाला।
भोपाल स्थित भौंरी पुलिस अकादमी में मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया गया है। ये प्रशिक्षित पुलिस अधिकारी और शिक्षक लगभग 2 घंटे 45 मिनट का प्रशिक्षण सत्र आयोजित करते हैं। इसके पश्चात, 20 से 25 विद्यार्थियों के छोटे समूहों को पुलिस थाने, जिला पुलिस कंट्रोल रूम और डायल-112 की कार्यप्रणाली से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराया जाता है। प्रशिक्षण पुस्तिका में मानव अधिकार, न्याय संहिता, महिला एवं बाल सुरक्षा, यातायात नियम, नशा मुक्ति, नागरिकों के कर्तव्य, थाने व डायल-112 की कार्यप्रणाली, अपराध पीड़ितों की सहायता और आपदा प्रबंधन जैसे विविध विषय शामिल हैं।
कानून, साइबर सुरक्षा और सड़क सुरक्षा पर विशेष ध्यान
कार्यक्रम मुख्य रूप से कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए केंद्रित है। प्रशिक्षण में संविधान, नागरिक कर्तव्यों, महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित कानूनों, साइबर अपराधों से बचाव, नशे के दुष्प्रभावों, तथा यातायात और सड़क सुरक्षा जैसे विषयों पर गहन जानकारी दी जाती है। विद्यार्थियों को POCSO Act, किशोर न्याय अधिनियम, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम और घरेलू हिंसा से संबंधित कानूनी प्रावधानों की सामान्य जानकारी भी प्रदान की जा रही है। साइबर सुरक्षा सत्रों में ऑनलाइन ठगी, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, OTP साझा करने के जोखिम, संदिग्ध लिंक, साइबर बुलिंग और डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी से बचाव के उपायों को उदाहरणों के साथ समझाया जाता है।
पुलिस थानों और कंट्रोल रूम का प्रत्यक्ष अनुभव
कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को स्थानीय पुलिस थानों का भ्रमण कराया जाता है। इस दौरान उन्हें FIR पंजीकरण, CCTNS (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स), महिला ऊर्जा डेस्क, बाल-मित्र कक्ष, हवालात, शस्त्रागार और मालखाने जैसी विभिन्न व्यवस्थाओं से अवगत कराया जाता है। जिला पुलिस कंट्रोल रूम के भ्रमण के दौरान, विद्यार्थियों को डायल-112 की कार्यप्रणाली, GPS आधारित लोकेशन ट्रैकिंग, घटना प्रेषण (इवेंट डिस्पैचिंग) और आपातकालीन सूचना प्राप्त होने पर पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया प्रक्रिया से परिचय कराया जाता है।
कार्यक्रम का चरणबद्ध विस्तार और एकता दिवस योजना
यह कार्यक्रम प्रदेश के सभी 55 जिलों में विद्यार्थियों और पुलिस के बीच संवाद स्थापित कर उनकी शंकाओं का समाधान कर रहा है। 5 और 6 अगस्त को पुलिस अधीक्षकों के आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रमों में विद्यार्थियों ने पुलिस अधिकारियों से कानून, सुरक्षा, यातायात और पुलिस की कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न विषयों पर खुलकर प्रश्न पूछे।
'जन सुरक्षा–युवा सृजन संवाद' को दो चरणों में विस्तारित किया जा रहा है। पहला चरण 5 अगस्त से 15 सितंबर 2026 तक जिला मुख्यालयों के शासकीय, पीएमश्री और सांदीपनि विद्यालयों में आयोजित किया जा रहा है। इसके बाद, द्वितीय चरण 15 सितंबर से 30 अक्टूबर 2026 तक तहसील और अनुभाग स्तर के विद्यालयों तक पहुंचाया जाएगा।
31 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर, कार्यक्रम को विद्यार्थियों के विशेष थाना भ्रमण से भी जोड़ा गया है। उत्कृष्ट कार्य करने वाले मास्टर ट्रेनर शिक्षकों और सक्रिय सहभागिता करने वाले विद्यार्थियों को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। ये छात्र एकता दिवस के अवसर पर प्रदेश भर में विभिन्न कार्यक्रमों में भी भाग लेंगे।
विभिन्न जिलों में नवाचारी आयोजन
हरदा में, विद्यार्थियों ने पुलिस अधिकारियों से खाकी वर्दी के रंग के पीछे का कारण, समानता के अधिकार से संबंधित जानकारी और थानों में अपराधों के रिकॉर्ड रखे जाने की प्रक्रिया के बारे में सवाल पूछे। उन्होंने डायल-100 से डायल-112 में हुए परिवर्तन और आपातकालीन सेवा की कार्यप्रणाली को भी समझा।
भिंड में, रक्षित निरीक्षक श्री अरविंद सिंह सिकरवार ने आत्मरक्षा और कानूनी संरक्षण पर स्वरचित कविताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को जानकारी दी। विद्यार्थियों को पुलिस बस से थाना परिसर तक ले जाया गया और फिर विद्यालय वापस पहुँचाया गया।
सागर के गोपालगंज थाना प्रभारी श्री घनश्याम शर्मा ने छात्राओं का स्वागत किया और सहज संवाद के माध्यम से उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया, उन्हें थाने की कार्यप्रणाली और उपलब्ध सेवाओं की जानकारी दी।
राजगढ़ में, साइबर सेल के विशेषज्ञ श्री शशांक यादव ने गतिविधि-आधारित तरीके से साइबर अपराधों से बचाव के उपाय बताए, जिसमें फर्जी लिंक और ऑनलाइन धोखाधड़ी से संबंधित उदाहरण शामिल थे।
नरसिंहपुर में, पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना ने विद्यार्थियों से संवाद किया और महिलाओं व बालिकाओं की सुरक्षा हेतु संचालित 'ऑपरेशन अपराजिता' व निर्भया मोबाइल की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला।
'जन सुरक्षा–युवा सृजन संवाद' कार्यक्रम विद्यार्थियों को कक्षा की सैद्धांतिक शिक्षा के साथ-साथ पुलिस की वास्तविक कार्यप्रणाली को समझने का अनूठा अवसर प्रदान कर रहा है। थाना, कंट्रोल रूम और डायल-112 जैसी व्यवस्थाओं से परिचय के माध्यम से, यह पहल युवाओं में कानून के प्रति जागरूकता, सुरक्षित व्यवहार और पुलिस सेवाओं के बारे में जानकारी को मजबूत करने का प्रयास कर रही है। यह कार्यक्रम पुलिस और युवा पीढ़ी के बीच संवाद और सहभागिता को बढ़ावा देने वाली सामुदायिक पुलिसिंग की एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हो रही है।
