मध्यप्रदेश की जेलों में बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य सुधार के लिए एमओयू
मध्यप्रदेश जेल विभाग और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गुजरात के बीच साइको-सोशल काउंसलिंग के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। इसका उद्देश्य जेलों में तनावग्रस्त बंदियों की पहचान व परामर्श की व्यवस्था को मजबूत करना है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 21 अगस्त 2026
मध्यप्रदेश की जेलों में निरुद्ध मानसिक रूप से बीमार एवं तनावग्रस्त बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य और सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जेल विभाग और गुजरात स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) के बीच साइको-सोशल काउंसलिंग (मनो-सामाजिक परामर्श) के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक ज्ञापन समझौते (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता जेलों में बंदियों के मानसिक कल्याण को बेहतर बनाने और उन्हें आवश्यक मनो-सामाजिक सहयोग प्रदान करने की दिशा में एक ठोस कदम है।
जेल मुख्यालय, भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर की ओर से डॉ. नूरिन चौधरी (एक्टिंग डायरेक्टर) और डॉ. गीतेश कुमार सिंह (प्रोजेक्ट डायरेक्टर) ने हस्ताक्षर किए, जबकि मध्यप्रदेश जेल विभाग की ओर से संबंधित अधिकारियों ने इसमें भाग लिया। इस अवसर पर जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि मौजूद रहे, जो इस महत्वपूर्ण सहयोग की शुरुआत का गवाह बने।
मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से साइको-सोशल काउंसलिंग तंत्र का विकास
जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर के विशेष मार्गदर्शन में यह पहल बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देती है। इससे पहले, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय द्वारा संचालित साइको-सोशल काउंसलिंग योजना का गहन अध्ययन किया गया था। इसके उपरांत, आर.आर.यू. के विषय विशेषज्ञों को भोपाल स्थित क्षेत्रीय जेल प्रबंधन एवं शोध संस्थान में आमंत्रित कर 6 से 12 जुलाई 2026 तक एक सात दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस प्रशिक्षण में प्रदेश की विभिन्न जेलों के 28 अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए, जिनमें मेलनर्स, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, मुख्य प्रहरी और प्रहरी जैसे विभिन्न संवर्गों के कर्मचारी थे। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य मानसिक तनाव से जूझ रहे बंदियों की पहचान करना और उनकी काउंसलिंग के लिए आवश्यक कौशल विकसित करना था।
प्रशिक्षण प्राप्त इन अधिकारी-कर्मचारियों ने अपने-अपने जेलों में जाकर तनावग्रस्त बंदियों की काउंसलिंग की, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर द्वारा इन शुरुआती परिणामों की समीक्षा के बाद, साइको-सोशल काउंसलिंग व्यवस्था को और अधिक प्रभावी व संस्थागत स्वरूप देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के साथ इस एमओयू का मसौदा तैयार किया गया। इस एमओयू का उद्देश्य जेलों के भीतर एक स्थायी और स्व-संचालित साइको-सोशल काउंसलिंग तंत्र स्थापित करना है, जो निरंतर संचालित हो सके।
पहला साइको-सोशल काउंसलिंग सेंटर भोपाल जेल में स्थापित होगा
इस एमओयू के तहत, जेल विभाग द्वारा चयनित अधिकारियों और कर्मचारियों को राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर भेजा जाएगा, जहाँ वे मास्टर ट्रेनर का विशेष कोर्स करेंगे। ये प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स जेल विभाग के भीतर एक सुदृढ़ मानव संसाधन तैयार करेंगे। ये अधिकारी-कर्मचारी अन्य जेल अधिकारियों और कर्मचारियों को साइको-सोशल काउंसलिंग का प्रशिक्षण देंगे। इससे प्रदेश की जेलों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने, तनावग्रस्त बंदियों की पहचान करने और उन्हें आवश्यक मनो-सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए एक प्रशिक्षित कार्यबल उपलब्ध होगा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल पर भी केंद्रित होगा, ताकि प्रशिक्षुओं को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से काम करने में मदद मिल सके।
इस महत्वाकांक्षी पहल के प्रथम चरण के रूप में, केंद्रीय जेल भोपाल में प्रदेश का पहला साइको-सोशल काउंसलिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। इस सेंटर के अनुभव और प्राप्त परिणामों के आधार पर, इस योजना को चरणबद्ध तरीके से प्रदेश की अन्य जेलों में भी लागू किया जाएगा। इसका सर्वोपरि उद्देश्य बंदियों को केवल कारावास की सजा तक सीमित न रखकर, उनके मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। इससे जेलों में सुधारात्मक सेवाओं की प्रभावशीलता को बढ़ाया जा सकेगा।
मध्यप्रदेश जेल विभाग की यह पहल सुधारात्मक सेवाओं को अधिक मानवीय दृष्टिकोण से सशक्त बनाने तथा जेलों में निरुद्ध बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके सफल पुनर्वास के लिए एक मजबूत संस्थागत व्यवस्था विकसित करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। यह कदम न केवल बंदियों के जीवन को बेहतर बनाएगा, बल्कि जेलों को सुधार गृह के रूप में स्थापित करने के सरकारी लक्ष्यों को भी गति प्रदान करेगा। इस परियोजना का दीर्घकालिक लक्ष्य जेलों के भीतर एक ऐसा वातावरण बनाना है जहाँ बंदियों को न केवल शारीरिक दंड मिले, बल्कि मानसिक और भावनात्मक समर्थन भी मिले, जिससे उनके समाज में पुन: एकीकरण की संभावनाएँ बढ़ें। यह पहल भारतीय जेल प्रणाली में एक आदर्श परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है, जहाँ कैदियों के कल्याण और पुनर्वास पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
