मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू: समाजसेविका ने जताई खुशी, सरकार को सराहा
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने पर समाजसेविका पंडित सुमित्रा शुक्ला ने इसे समानता, न्याय और महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 22 जुलाई 2026
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) के लागू होने के निर्णय का समाजसेविका पंडित सुमित्रा शुक्ला ने पुरजोर स्वागत किया है। उन्होंने प्रदेश की जनता, विशेषकर मातृशक्ति और महिला समाज को इस ऐतिहासिक कदम के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। पंडित सुमित्रा शुक्ला ने कहा कि यह निर्णय समाज में समानता, न्याय की स्थापना और महिलाओं के अधिकारों को सशक्त बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव है।
इस अवसर पर उन्होंने भारत सरकार और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा समान नागरिक संहिता की मांग उठाई जाती रही है। इस दिशा में आगे बढ़ाया गया यह कदम सामाजिक समरसता, समान अधिकार और एक न्यायपूर्ण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध होगा।
पंडित सुमित्रा शुक्ला ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे सभी इस महत्वपूर्ण निर्णय का सम्मान करें और सामाजिक सौहार्द, भाईचारे तथा राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएं। उन्होंने विशेष रूप से महिला समाज को संबोधित करते हुए कहा कि यह निर्णय महिलाओं के सम्मान, उनके अधिकारों और उनके सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
समान नागरिक संहिता: लैंगिक समानता की ओर एक महत्वपूर्ण कदम
समाजसेविका पंडित सुमित्रा शुक्ला ने इस बात पर जोर दिया कि समान नागरिक संहिता का कार्यान्वयन वास्तव में समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संहिता सभी नागरिकों के लिए, चाहे उनका धर्म या लिंग कुछ भी हो, विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों में एकरूपता लाएगी। यह महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार प्रदान करेगी, जिससे सदियों से चली आ रही सामाजिक असमानताओं को दूर करने में मदद मिलेगी। पंडित शुक्ला के अनुसार, यह कानून महिलाओं को अधिक सशक्त बनाएगा, उन्हें अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में अधिक स्वतंत्रता देगा और समाज में उनकी स्थिति को और मजबूत करेगा।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल कानूनी सुधार नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक क्रांति की शुरुआत है। महिलाओं के उत्थान और सशक्तिकरण के बिना किसी भी समाज का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। समान नागरिक संहिता इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो महिलाओं को समाज की मुख्यधारा में लाने और उन्हें बराबरी का दर्जा दिलाने का मार्ग प्रशस्त करेगी। प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह दोनों सरकारों की दूरदर्शिता और महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा
पंडित सुमित्रा शुक्ला ने आगे कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विभिन्न समुदायों के बीच अनावश्यक मतभेदों को समाप्त कर सामाजिक समरसता को बढ़ाना है। जब कानून सभी के लिए समान होंगे, तो यह भावना कम होगी कि किसी विशेष समुदाय को विशेष लाभ मिल रहा है। इससे राष्ट्रव्यापी स्तर पर एकता और सद्भाव को बल मिलेगा। उन्होंने नागरिकों से इस परिवर्तन को खुले मन से स्वीकार करने और इसे मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।
उन्होंने बताया कि समान नागरिक संहिता लागू होने से विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े जटिल मामले भी सुलझेंगे, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर बोझ कम होगा और न्याय सुलभ होगा। यह देश की न्याय प्रणाली को अधिक कुशल बनाने में भी योगदान देगा। पंडित शुक्ला ने विश्वास व्यक्त किया कि यह कदम भारत को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में स्थापित करेगा जहां प्रत्येक नागरिक को समान अवसर और समान अधिकार प्राप्त होंगे, जो कि एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण के लिए आवश्यक है।
