मध्य प्रदेश में मूसलाधार बारिश: नदियां उफान पर, कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात
मध्य प्रदेश के रायसेन, विदिशा, सीहोर, भोपाल, मंडला और डिंडौरी सहित कई जिलों में लगातार मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रमुख...

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 12 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश में मानसून का रौद्र रूप जारी है। पिछले कुछ दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण राज्य के कई जिलों में नदियां अपने उफान पर हैं और निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। नर्मदा, बेतवा, घोड़ा पछाड़ जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। प्रशासन अलर्ट मोड पर है और प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य चला रहा है।
लगातार हो रही वर्षा ने रायसेन, विदिशा, सीहोर, भोपाल, मंडला और डिंडौरी जैसे जिलों में गंभीर स्थिति उत्पन्न कर दी है। कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न हो गई हैं, जिससे आवागमन बाधित हो रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों से लोगों और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार जुटी हुई हैं।
रायसेन में पुलों के ऊपर बह रहा पानी, ग्रामीण संपर्क बाधित
रायसेन जिले के दीवानगंज क्षेत्र में घोड़ा पछाड़ नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। नदी का पानी पुलों के ऊपर से बहने लगा है, जिससे इस क्षेत्र के लगभग एक दर्जन गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है। सेमरा स्थित सरकारी स्कूल परिसर में भी पानी भर गया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। ग्रामीण इलाकों में कच्चे-पक्के रास्ते भी पानी में डूब गए हैं, जिससे लोगों को आवागमन में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
जिला प्रशासन ने स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे नदी-नालों के किनारे अनावश्यक रूप से न घूमें और जलभराव वाले रास्तों से दूर रहें। बाढ़ की आशंका को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
विदिशा में बेतवा नदी का विकराल रूप, घाटों और मंदिरों में घुसा पानी
विदिशा जिले में बेतवा नदी का जलस्तर अभूतपूर्व रूप से बढ़ गया है। नदी का पानी अपने किनारों को तोड़कर शहर के निचले इलाकों तक पहुंच गया है। नदी किनारे स्थित ऐतिहासिक घाट और कई छोटे-बड़े मंदिर जलमग्न हो गए हैं। बामनखेड़ा और पथरिया जैसे गांवों में पानी भरने से कई ग्रामीण अपने घरों में फंस गए थे, जिन्हें एसडीआरएफ की टीमों ने रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विदिशा क्षेत्र से कुल 19 ग्रामीणों और सात मवेशियों को जलभराव वाले इलाकों से बचाया गया है।
प्रशासन ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। लोगों को नदी, पुलों और घाटों की ओर जाने से रोका जा रहा है ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना को टाला जा सके।
सीहोर और भोपाल में भी जलभराव से जनजीवन प्रभावित
सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कई मकानों में पानी भर गया है। स्थानीय जलस्रोतों के उफान पर होने से ग्रामीण इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासनिक टीमें इन क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखे हुए हैं और आवश्यकतानुसार लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर स्थानांतरित करने की कार्रवाई कर रही हैं।
राजधानी भोपाल में भी मूसलाधार बारिश का असर साफ देखने को मिला। शहर की जीवनरेखा माने जाने वाले बड़े तालाब का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति निर्मित हुई है, जिससे सड़कों और रिहायशी क्षेत्रों में पानी भर गया है। यहां तक कि ईंटखेड़ी थाना परिसर भी पानी की चपेट में आ गया, जिसके चलते पुलिसकर्मियों को जरूरी रिकॉर्ड और फर्नीचर को सुरक्षित करने के साथ-साथ परिसर से पानी निकालने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।
मंडला और डिंडौरी में नर्मदा का बढ़ता जलस्तर चिंता का सबब
मंडला और डिंडौरी जिलों से होकर बहने वाली नर्मदा नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। नदी के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने इन संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है और संभावित खतरे को देखते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
प्रदेश के इन जिलों के अलावा अन्य कई स्थानों पर भी नदी-नालों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। मौसम विभाग ने आगामी कुछ घंटों में मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना जताई है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है।
प्रशासन सतर्क, आमजन से सावधानी की अपील
बाढ़ और जलभराव की आशंका वाले क्षेत्रों में प्रशासन ने अपनी सतर्कता बढ़ा दी है। राहत और बचाव दलों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से यह अपील की गई है कि वे उफनती नदियों, नालों और जलमग्न पुल-पुलियों को पार करने का जोखिम कतई न उठाएं।
मौसम विभाग के पूर्वानुमानों को देखते हुए, निचले इलाकों में रहने वाले नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने और स्थानीय प्रशासन द्वारा दिए जा रहे निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। वर्तमान स्थिति में, नदियों और जलाशयों का तेजी से भरना एक तरफ जहां जल संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, वहीं दूसरी ओर निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा भी बढ़ा रहा है। ऐसे में, प्रशासन के सामने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन और आवागमन को बहाल करने की एक बड़ी चुनौती है।
