BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
The Cliff News
State

मध्य प्रदेश में कम तौल पर ₹1 लाख तक जुर्माना, नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी

मध्य प्रदेश सरकार 'विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियम, 2011' में संशोधन का ड्राफ्ट जारी कर चुकी है। कम तौल, गलत माप और नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना और पंजीयन शुल्क में बढ़ोतरी का प्रस्ताव है।

Few hours ago
6 मिनट में पढ़ें
मध्य प्रदेश में कम तौल पर ₹1 लाख तक जुर्माना, नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 8 अगस्त 2026

मध्य प्रदेश सरकार उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों में माप-तौल की शुद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। राज्य के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने 'मध्यप्रदेश विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियम, 2011' में संशोधन का एक मसौदा (ड्राफ्ट) जारी किया है। इस प्रस्तावित संशोधन का मुख्य उद्देश्य माप-तौल में अनियमितता पाए जाने पर लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि को बढ़ाना और संबंधित व्यवसायों के लिए पंजीयन शुल्क को अधिक करना है। यह कदम व्यापारिक जगतात में पारदर्शिता लाने और उपभोक्ताओं को उनके द्वारा खरीदे गए सामान की सही मात्रा दिलवाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

विधिक माप विज्ञान (Legal Metrology) प्रणाली का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजारों में उपयोग किए जाने वाले बाट, तराजू, मापक यंत्र, पेट्रोल पंपों की प्रणालियाँ और अन्य सभी मापन उपकरण निर्धारित राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों। केंद्र सरकार द्वारा भी समय-समय पर इस क्षेत्र के नियमों को अद्यतन किया जाता रहा है, ताकि यह व्यवस्था आधुनिक और प्रभावी बनी रहे। मध्य प्रदेश सरकार का यह मसौदा इसी क्रम का एक हिस्सा है, जिसका लक्ष्य उपभोक्ताओं को ठगे जाने से बचाना और निष्पक्ष व्यापारिक व्यवहार को बढ़ावा देना है।

कम तौल पर ₹1 लाख तक जुर्माना प्रस्तावित

प्रस्तावित संशोधनों में सबसे प्रमुख बदलाव यह है कि यदि किसी दुकानदार या पेट्रोल पंप संचालक द्वारा कम तौल या गलत माप दिया जाता है, तो उन पर ₹1 लाख तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, यदि वे निर्धारित विधिक माप विज्ञान नियमों का उल्लंघन करते पाए जाते हैं, तो उन पर भी यह प्रावधान लागू होगा। वर्तमान में, इस तरह के उल्लंघन के लिए जुर्माने की राशि अपेक्षाकृत कम है, लेकिन नए प्रस्ताव के लागू होने पर उल्लंघनकर्ताओं पर काफी आर्थिक दबाव बढ़ेगा। यह उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत का संकेत है, क्योंकि कम वजन या मात्रा देकर मुनाफा कमाने वाले व्यापारियों पर अब कड़ी कार्रवाई हो सकेगी।

विभिन्न व्यापारिक प्रतिष्ठानों से इस प्रकार की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं, जैसे किराना दुकानों पर अनाज या अन्य सामानों का कम वजन तौलना, या व्यापारिक संस्थानों में अप्रमाणित व गलत तराजू का उपयोग करना। इसी तरह, पेट्रोल पंपों पर भी ईंधन की माप में हेरफेर की शिकायतें कभी-कभी प्रकाश में आती हैं। विधिक माप विज्ञान विभाग इन सभी गतिविधियों पर अपनी पैनी नजर रखता है और प्रस्तावित संशोधनों से उसकी निरीक्षण और कार्रवाई की क्षमता में निश्चित रूप से वृद्धि होगी।

माप-तौल उपकरणों के रिपेयररों और विक्रेताओं पर भी नियमन

मसौदे में न केवल उपभोक्ताओं को ठगे जाने से बचाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है, बल्कि माप-तौल उपकरणों के कारोबार से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी नियमन कड़ा किया जा रहा है। प्रस्तावित नियमों के तहत, जो व्यक्ति या संस्थाएं माप-तौल उपकरणों की मरम्मत का कार्य करती हैं, उन्हें ‘रिपेयरर’ के रूप में पंजीकृत होना होगा। इसके लिए ₹50,000 का पंजीयन शुल्क निर्धारित किया गया है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मरम्मत के बाद उपकरणों की सटीकता सीधे तौर पर व्यापारिक लेन-देन की शुद्धता को प्रभावित करती है। पंजीकृत रिपेयररों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि मरम्मत किए गए उपकरण निर्धारित तकनीकी मानकों पर खरे उतरें।

इसी प्रकार, जो विक्रेता बाट, तराजू, मापक यंत्र और अन्य विधिक माप उपकरणों का व्यापार करते हैं, उनके लिए भी पंजीयन शुल्क ₹1 लाख प्रस्तावित किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में आने वाले सभी माप-तौल उपकरण अधिकृत निर्माताओं और विक्रेताओं द्वारा ही बेचे जाएं। इससे विभाग को ऐसे विक्रेताओं और उनके द्वारा बेचे जाने वाले उपकरणों का एक व्यवस्थित रिकॉर्ड रखने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह बाजार में उपलब्ध उपकरणों की गुणवत्ता और वैधानिक मानकों की निगरानी को भी सरल बनाएगा, जिससे उपभोक्ताओं को विश्वसनीय उपकरण मिलने की संभावना बढ़ेगी।

निरीक्षण व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

प्रस्तावित संशोधनों का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू विभागीय अधिकारियों को निरीक्षण और प्रवर्तन (Enforcement) की शक्तियों को मजबूत करना है। नए नियमों के लागू होने पर, अधिकारी किसी भी दुकान, व्यापारिक प्रतिष्ठान या फैक्ट्री में कभी भी औचक निरीक्षण कर सकते हैं। इस दौरान वे माप-तौल उपकरणों की वैधता, उनके सत्यापन की स्थिति, उस पर लगी मुहर (स्टाम्प), उपकरणों की कार्यक्षमता और व्यापार में उपयोग की जा रही पूरी माप प्रणाली की गहन जांच कर सकेंगे। यदि निरीक्षण के दौरान किसी भी प्रकार की खामी या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित कारोबारी के खिलाफ कड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

यह प्रावधान व्यापारियों को हमेशा सतर्क रहने के लिए प्रेरित करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि वे नियमित रूप से अपने उपकरणों का सत्यापन करवाएं और उन्हें मानकों के अनुरूप बनाए रखें। औचक निरीक्षण की व्यवस्था व्यापार जगत में एक अनुशासन लाने में सहायक सिद्ध होगी।

जनता से सुझाव आमंत्रित

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में यह संशोधन केवल एक मसौदा (ड्राफ्ट) के रूप में जारी किया गया है। इस पर आम जनता, व्यापारी संघों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्राप्त सभी सुझावों पर गहन विचार-विमर्श के बाद ही इन संशोधनों को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि ₹1 लाख तक का प्रस्तावित जुर्माना और पंजीयन शुल्क अभी केवल प्रस्ताव हैं और अंतिम नियम बनने से पहले इनमें बदलाव संभव है।

यह प्रक्रिया पारदर्शिता और जन-सहभागिता सुनिश्चित करती है, जिससे लागू होने वाले नियम अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बन सकें।

उपभोक्ता हित सर्वोपरि

समग्र रूप से, इन प्रस्तावित बदलावों का व्यापक उद्देश्य माप-तौल व्यवस्था में अधिक से अधिक पारदर्शिता लाना और यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक उपभोक्ता को अपने भुगतान के बदले में सही और निर्धारित मात्रा का सामान मिले। यदि नियमों में प्रस्तावित कड़े दंड और पंजीयन की नई व्यवस्थाएं सफलतापूर्वक लागू होती हैं, तो निश्चित रूप से कम तौल या गलत माप जैसी अनियमितताओं में कमी आएगी। इससे कारोबारियों पर अपनी व्यापारिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और मानकों का पालन करने का दबाव बढ़ेगा, वहीं विभागीय निगरानी भी कहीं अधिक प्रभावी हो जाएगी। यह कदम केंद्र सरकार द्वारा विधिक माप विज्ञान के क्षेत्र में किए जा रहे लगातार संशोधनों के अनुरूप है और उपभोक्ताओं के अधिकारों को सशक्त बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।