मध्य प्रदेश में अगले चार वर्षों में तापमान में 2.4 डिग्री तक वृद्धि का अनुमान
मध्य प्रदेश में अगले चार वर्षों में दिन के तापमान में 2 डिग्री और रात के तापमान में 2.4 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि का अनुमान है। यह बढ़ोतरी मौसम, कृषि और जनजीवन पर गहरा असर डालेगी।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 9 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश में आगामी चार वर्षों के दौरान तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि होने की आशंका है, जिससे प्रदेश के मौसम, कृषि, जल संसाधनों और आम जनजीवन पर गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है। अनुमान है कि दिन का तापमान करीब 2 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 2.4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है।
जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान में लगातार हो रही वृद्धि को इस अनुमानित तापमान वृद्धि का मुख्य कारण बताया जा रहा है। इसके साथ ही, वातावरण में गर्मी बढ़ने से मौसम के पैटर्न में भी बदलाव देखे जा रहे हैं। इसका सीधा असर गर्मी की अवधि, वर्षा के स्वरूप और अत्यधिक तापमान वाली घटनाओं पर पड़ सकता है।
पूर्वी मध्य प्रदेश में अधिक गर्मी की आशंका
रिपोर्टों के अनुसार, मध्य प्रदेश का पूर्वी हिस्सा अपेक्षाकृत तेजी से गर्म हो रहा है। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में तापमान वृद्धि का असर और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बढ़ता तापमान वहां की खेती, जल उपलब्धता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।
कुछ जिले अधिक संवेदनशील
जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से प्रदेश के कुछ जिले विशेष रूप से संवेदनशील माने गए हैं। डिंडोरी, भिंड और सीधी जैसे जिलों में तापमान और मौसम में होने वाले बदलावों का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक पड़ने की आशंका जताई गई है। इन क्षेत्रों में कृषि और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है।
रात के तापमान में वृद्धि चिंताजनक
रात के तापमान में 2.4 डिग्री सेल्सियस तक की संभावित वृद्धि विशेष चिंता का विषय है। रात का तापमान अधिक रहने से शरीर को दिन की गर्मी से राहत मिलने का समय कम हो जाता है, जिससे गर्मी से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा, बिजली की मांग में भी वृद्धि हो सकती है।
तापमान वृद्धि से निपटने की आवश्यकता
तापमान वृद्धि की इस चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए शहरों और गांवों में हरित क्षेत्र का विस्तार, जल संरक्षण के उपायों को मजबूत करना, पारंपरिक जलस्रोतों का संरक्षण तथा गर्मी से बचाव हेतु कार्ययोजनाएं तैयार करना अत्यंत आवश्यक है। कृषि क्षेत्र में भी बदलते मौसम के अनुरूप फसलों के चयन और सिंचाई प्रबंधन को बेहतर बनाने की जरूरत होगी।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल तापमान बढ़ने तक ही सीमित नहीं रहेगा। मौसम की अनिश्चितता, अत्यधिक वर्षा, सूखा और लंबे समय तक चलने वाली लू जैसी घटनाएं भी भविष्य में चुनौतियां बढ़ा सकती हैं। ऐसे में, मध्य प्रदेश के लिए जलवायु अनुकूलन और दीर्घकालिक पर्यावरणीय योजना को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण होगा।
