मध्य प्रदेश लाएगा देश का पहला टाइगर एक्शन प्लान, बाघ संरक्षण को मिलेगी नई दिशा
मध्य प्रदेश बाघ संरक्षण में एक नई पहल की दिशा में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेश में विशेष ‘टाइगर एक्शन प्लान’ तैयार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य बढ़ती बाघ आबादी का प्रबंधन और मानव-बाघ सहअस्तित्व को मजबूत करना है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 19 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश बाघ संरक्षण के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार, प्रदेश एक विशेष ‘टाइगर एक्शन प्लान’ का मसौदा तैयार कर रहा है, जिसका लक्ष्य बाघों की बढ़ती आबादी के प्रभावी प्रबंधन के साथ-साथ उनके प्राकृतिक आवास, सुरक्षा, कॉरिडोर और मानव-बाघ सहअस्तित्व को सुदृढ़ करना है। यह योजना मध्य प्रदेश को देश में बाघ संरक्षण के लिए एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखती है।
मध्य प्रदेश को वर्तमान में ‘टाइगर स्टेट’ का गौरव प्राप्त है। वर्ष 2022 की राष्ट्रीय बाघ गणना के अनुसार, प्रदेश में 785 बाघों की उपस्थिति दर्ज की गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में यह अनुमान व्यक्त किया है कि आगामी गणना में यह संख्या 1,000 के पार जा सकती है। बाघों की इस बढ़ती आबादी के लिए पर्याप्त आवास और संरक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार के समक्ष एक महत्वपूर्ण चुनौती है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह विस्तृत कार्ययोजना विकसित की जा रही है।
दीर्घकालिक संरक्षण के लिए 10-20 वर्ष का एक्शन प्लान
प्रस्तावित टाइगर एक्शन प्लान को एक दूरगामी दृष्टिकोण के साथ तैयार किया जा रहा है, जिसकी अवधि अगले 10 से 20 वर्षों तक होगी। इस योजना के अंतर्गत बाघों की जनसंख्या, उनके प्राकृतिक आवास की आवश्यकताएं, भोजन की उपलब्धता, सुरक्षित विचरण क्षेत्रों का विस्तार, वन्यजीव कॉरिडोर का सुदृढ़ीकरण और मानव-बाघ संघर्ष जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गहनता से विचार किया जाएगा।
इस महत्वाकांक्षी योजना को अंतिम रूप देने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के वन्यजीव विशेषज्ञों तथा प्रमुख शोध संस्थानों की विशेषज्ञता का लाभ उठाया जाएगा। योजना के विकास और कार्यान्वयन के लिए एक विशेषज्ञ समिति के गठन की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। यह समिति योजना के हर पहलू का वैज्ञानिक और व्यावहारिक मूल्यांकन सुनिश्चित करेगी।
बढ़ती बाघ आबादी की नई चुनौतियां
बाघों की संख्या में हो रही वृद्धि वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों की सफलता का प्रमाण है, किंतु यह अपने साथ नई और जटिल चुनौतियां भी लाती है। बाघों के लिए पर्याप्त और स्वस्थ प्राकृतिक आवास, पानी के स्रोत तथा उनके शिकार प्रजातियों की निरंतर उपलब्धता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
वन क्षेत्रों के निकट सड़क निर्माण, शहरीकरण और अन्य विकास परियोजनाओं के विस्तार से वन्यजीवों के प्राकृतिक विचरण मार्गों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, बाघों के बीच क्षेत्रीय विवादों का बढ़ना और उनका जंगलों से बाहर निकलकर मानव बस्तियों के करीब आना भी गंभीर चिंता का विषय है। इसलिए, यह प्रस्तावित योजना केवल बाघों की संख्या बढ़ाने पर केंद्रित नहीं है, बल्कि बाघों की बढ़ती आबादी के अनुपात में उनके लिए एक सुरक्षित और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के विकास पर भी बल देगी।
कॉरिडोर को मजबूत कर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित
मध्य प्रदेश में पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और पन्ना जैसे प्रतिष्ठित टाइगर रिजर्व एक विशाल लैंडस्केप का हिस्सा हैं। इन प्रमुख आवासों के बीच वन्यजीवों की निर्बाध और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए प्राकृतिक कॉरिडोर को मजबूत करना बाघ संरक्षण की एक प्रमुख आवश्यकता है।
मजबूत कॉरिडोर बाघों को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में सुरक्षित रूप से विचरण करने की सुविधा प्रदान करते हैं, जिससे उनके प्राकृतिक विस्तार को बढ़ावा मिलता है। यह एक ही क्षेत्र पर बाघों की अत्यधिक निर्भरता को कम करने के साथ-साथ विभिन्न बाघ आबादी के बीच आनुवंशिक विविधता को बनाए रखने में भी सहायक होता है। टाइगर टूरिज्म के विकास को भी इन कॉरिडोर और संरक्षण क्षेत्रों के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए आगे बढ़ाने की आवश्यकता होगी, ताकि पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिले और वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
कोर क्षेत्रों से गांवों का स्वैच्छिक पुनर्वास
बाघों के लिए बड़े और निर्बाध आवास क्षेत्र उपलब्ध कराने की दिशा में, टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्रों से गांवों का स्वैच्छिक पुनर्वास एक महत्वपूर्ण कदम रहा है। मध्य प्रदेश में अब तक लगभग 200 गांवों को कोर क्षेत्रों से बाहर पुनर्वासित किया जा चुका है। इस प्रक्रिया ने कई टाइगर रिजर्व में बाघों के लिए शांत और सुरक्षित वातावरण बनाने में सहायता की है।
भविष्य में जहां भी पुनर्वास की आवश्यकता होगी, वहां स्थानीय ग्रामीणों की सहमति, उचित मुआवजा, बेहतर पुनर्वास सुविधाएं और उनकी आजीविका के नए अवसरों का सृजन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा। वन्यजीव संरक्षण की दीर्घकालिक सफलता तभी संभव है जब स्थानीय समुदाय स्वयं को इस प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग महसूस करे और इसमें सक्रिय भागीदारी निभाए।
आधुनिक तकनीक से बाघों की निगरानी
बाघों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ उनकी सुरक्षा व्यवस्था को भी और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी जैसी आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए आधुनिक तकनीक, जैसे कैमरा ट्रैप, नियमित गश्त और उन्नत निगरानी प्रणालियों का उपयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (STPF) और वन विभाग की गश्ती टीमों को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाएगा, और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी को बढ़ाया जाएगा। तकनीक के उपयोग से बाघों की गतिविधियों और उनके विचरण क्षेत्रों की निगरानी कर मानव-बाघ संघर्ष की संभावित घटनाओं वाले क्षेत्रों की पहचान पहले से की जा सकेगी, जिससे समय पर निवारक उपाय किए जा सकें।
मानव-बाघ संघर्ष को रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता
बाघों की आबादी बढ़ने के साथ ही उनके जंगलों से बाहर निकलकर मानव बस्तियों के करीब आने की घटनाओं को रोकना एक प्रमुख प्राथमिकता है। जंगल से सटे गांवों में बाघों की उपस्थिति ग्रामीणों और उनके मवेशियों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन जाती है।
ऐसे क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया दल (Rapid Response Teams) की स्थापना, स्थानीय निवासियों को बाघों के व्यवहार और सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूक करना, बाघों की गतिविधियों की निरंतर निगरानी करना और समय पर सूचना प्रणाली को मजबूत करना आवश्यक है। टाइगर एक्शन प्लान में मानव और वन्यजीव के बीच एक संतुलित सहअस्तित्व स्थापित करने की रणनीति को एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में शामिल किया जाएगा।
पर्यटन और संरक्षण का सामंजस्यपूर्ण विकास
मध्य प्रदेश में वन्यजीव पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। प्रदेश के टाइगर रिजर्व राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण केंद्र बने हुए हैं। इस संदर्भ में, टाइगर टूरिज्म को संरक्षण के साथ जोड़कर स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
हालांकि, पर्यटन गतिविधियों का विस्तार करते समय बाघों के संवेदनशील क्षेत्रों, प्रजनन स्थलों और उनके प्राकृतिक व्यवहार का विशेष ध्यान रखना होगा। जिम्मेदार पर्यटन न केवल संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करता है।
‘टाइगर स्टेट’ से संरक्षण मॉडल बनने की ओर
मध्य प्रदेश में बाघ संरक्षण की यात्रा कई दशकों की निरंतर प्रयासों का परिणाम है। अब सरकार बाघों की बढ़ती आबादी के अगले चरण के प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। प्रस्तावित टाइगर एक्शन प्लान इसी दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
इस योजना में वैज्ञानिक अध्ययन, प्राकृतिक आवास का विस्तार, वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा, आधुनिक निगरानी तकनीक, अवैध शिकार पर नियंत्रण, स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी और मानव-बाघ संघर्ष को कम करने जैसी व्यापक रणनीतियों को एकीकृत किया जाएगा। यदि यह योजना प्रभावी ढंग से कार्यान्वित होती है, तो मध्य प्रदेश न केवल बाघों की संख्या के मामले में, बल्कि बाघों के दीर्घकालिक संरक्षण और प्रबंधन के लिए एक राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभर सकता है। बाघों की संभावित 1,000 से अधिक की संख्या के साथ, उनके लिए सुरक्षित जंगल और एक संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण अब प्रदेश की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
