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मध्य प्रदेश जेलों में 27,733 बंदियों ने एक साथ लिया आध्यात्मिक कार्यक्रम में भाग, वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज

फरवरी 2026 में मध्यप्रदेश की जेलों में 27,733 बंदियों ने श्रीमद्भगवद्गीता पर आधारित विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम में एक साथ भाग लिया। यह अनूठा आयोजन वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन में दर्ज हुआ है।

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मध्य प्रदेश जेलों में 27,733 बंदियों ने एक साथ लिया आध्यात्मिक कार्यक्रम में भाग, वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 10 अगस्त 2026

मध्य प्रदेश जेल विभाग ने बंदियों के सुधार, पुनर्वास और चरित्र निर्माण की दिशा में एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए फरवरी 2026 में प्रदेश की सभी जेलों में एक साथ एक विशाल आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया। महानिदेशक जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं, डॉ. वरुण कपूर के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में 27,733 बंदियों ने एक ही समय में भाग लेकर विश्व रिकॉर्ड बनाया है, जिसे 'वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन' में स्थान मिला है।

इस राज्यव्यापी पहल के तहत, केंद्रीय जेल इंदौर से श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाओं पर आधारित एक विशेष आध्यात्मिक एवं सुधारात्मक कार्यक्रम का सीधा प्रसारण प्रदेश की विभिन्न जेलों में स्थित बंदियों तक पहुँचाया गया। प्रसिद्ध गीता मर्मज्ञ एवं आध्यात्मिक संत श्री ज्ञानानंद जी महाराज ने इस अवसर पर बंदियों को संबोधित किया, जिससे उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिला।

अभूतपूर्व सहभागिता और विश्व कीर्तिमान

एक ही समय में जेल में निरुद्ध इतनी बड़ी संख्या में बंदियों द्वारा किसी लाइव आध्यात्मिक एवं सुधारात्मक कार्यक्रम में हिस्सा लेना एक अनूठा और ऐतिहासिक उदाहरण है। फरवरी 2026 में हुए इस कार्यक्रम में 27,733 बंदियों की रियल-टाइम सहभागिता ने इसे विश्व रिकॉर्ड के रूप में स्थापित किया। यह उपलब्धि न केवल मध्यप्रदेश जेल विभाग के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि बंदी सुधार के क्षेत्र में विभाग के सकारात्मक और मानवीय दृष्टिकोण को भी रेखांकित करती है।

आध्यात्मिकता के माध्यम से सुधार का प्रयास

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जेलों में बंदियों के आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक उत्थान को बढ़ावा देना, उनमें सकारात्मक सोच विकसित करना तथा चरित्र निर्माण के प्रति प्रेरित करना था। आध्यात्मिक शिक्षा को बंदी सुधार और पुनर्वास की प्रक्रिया से जोड़कर, विभाग ने इन व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए सशक्त बनाने का प्रयास किया है। यह पहल दर्शाती है कि आध्यात्मिकता किस प्रकार कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्तियों को सकारात्मक दिशा दे सकती है।