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मध्य प्रदेश: इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन तेज, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

मध्य प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड वृद्धि का आंदोलन उग्र हो गया है। पुलिस कार्रवाई के बाद जूनियर डॉक्टर भी शामिल, ओपीडी ठप होने से स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट।

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मध्य प्रदेश: इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन तेज, स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 9 सितंबर 2026

मध्यप्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों का अपनी मासिक स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब उग्र रूप ले चुका है। मंगलवार को आंदोलन के दूसरे दिन, पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और वाटर कैनन के इस्तेमाल की घटनाओं के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। इस बीच, जूनियर डॉक्टरों ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए ओपीडी (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) और ऑपरेशन थिएटर सेवाएं बंद करने की घोषणा कर दी है, जिससे प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर संकट मंडराने लगा है।

भोपाल के हमीदिया अस्पताल से शुरू हुआ यह विरोध अब पूरे राज्य में फैलने की आशंका है। इंटर्न डॉक्टर वर्तमान में मिलने वाले लगभग 14,337 रुपये के मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अस्पतालों में मरीजों की नियमित देखभाल और महत्वपूर्ण चिकित्सकीय जिम्मेदारियां निभाते हैं, जिसके एवज में उन्हें उचित मानदेय मिलना चाहिए।

पुलिस कार्रवाई और बढ़ता विवाद

आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा बल प्रयोग और वाटर कैनन के इस्तेमाल के वीडियो सामने आने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले का संज्ञान लिया है। भोपाल पुलिस कमिश्नर ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और डीसीपी जोन-2 विकास सहवाल को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष होगी और सभी पक्षों को सुना जाएगा। हालांकि, प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के घायल होने की खबरें आने के बाद विवाद केवल स्टाइपेंड की मांग से बढ़कर अब पुलिस कार्रवाई और चिकित्सकों के सम्मान का मुद्दा बन गया है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन का सीधा असर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने लगा है। सोमवार को आंदोलन के पहले दिन से ही कई सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं प्रभावित रहीं। जूनियर डॉक्टरों द्वारा ओपीडी और ऑपरेशन थिएटर सेवाएं बंद करने के ऐलान के बाद स्थिति और बिगड़ सकती है। यदि वरिष्ठ डॉक्टर भी आंदोलन में शामिल होते हैं, तो सरकारी अस्पतालों में मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, विशेषकर आपातकालीन सेवाओं को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

यातायात बाधित, बढ़ी मुश्किलें

आंदोलन का असर मंगलवार को राजधानी भोपाल की सड़कों पर भी देखने को मिला। प्रदर्शनकारी इंटर्न डॉक्टरों ने कमला पार्क क्षेत्र में एक लेन को अवरुद्ध कर दिया, जिससे पॉलिटेक्निक चौराहे से रेतघाट तक यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। शाम तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

यह गतिरोध जल्द समाप्त न होने पर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर और अधिक दबाव बढ़ने की आशंका है। प्रशासन के लिए जहां आंदोलन को समाप्त कराना एक चुनौती है, वहीं स्वास्थ्य सेवाओं को सामान्य बनाए रखना भी प्राथमिकता है।