मध्य प्रदेश: अघोषित बिजली कटौती से खरीफ फसलें संकट में, किसान उग्र आंदोलन की चेतावनी
मध्य प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में अघोषित बिजली कटौती और कम वोल्टेज की समस्या ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खरीफ सीजन की महत्वपूर्ण फसलों की सिंचाई प्रभावित होने से खेतों में लगी फसलें सूखने लगी हैं। किसानों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 29 जुलाई 2026
मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में अघोषित बिजली कटौती और कम वोल्टेज की गंभीर समस्या ने खरीफ सीजन की महत्वपूर्ण फसलों को संकट में डाल दिया है। विशेष रूप से धान की रोपाई और अन्य खरीफ फसलों की सिंचाई के महत्वपूर्ण दौर में पर्याप्त बिजली की अनुपलब्धता के कारण खेत सूखने लगे हैं, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। भिंड, गोहद, सिवनी मालवा, आमला सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के किसान लंबे समय से बिजली आपूर्ति में सुधार की मांग कर रहे हैं। अपनी मांगों को लेकर किसान संगठनों द्वारा जगह-जगह ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं और बिजली कार्यालयों का घेराव किया जा रहा है। किसानों ने चेताया है कि यदि उनकी मांगें शीघ्र पूरी नहीं हुईं तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
सिंचाई के समय बिजली की अनुपलब्धता, किसान चिंतित
खरीफ मौसम में धान, सोयाबीन, मक्का और अन्य प्रमुख फसलों के स्वास्थ्य और उत्पादन के लिए नियमित और निर्बाध सिंचाई अत्यंत आवश्यक है। हालांकि, प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बिना किसी पूर्व सूचना के घंटों बिजली कटौती के कारण किसान अपने खेतों तक समय पर पानी पहुंचाने में असमर्थ हो रहे हैं। किसानों के अनुसार, कई गांवों में रात के समय बिजली आने की उम्मीद बनी रहती है, लेकिन उसी दौरान लंबे समय तक कटौती कर दी जाती है। ऐसे में पूरी रात खेतों पर जागने के बावजूद सिंचाई नहीं हो पाती, जिससे फसलों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
कम वोल्टेज के कारण ट्यूबवेल संचालन में बाधा
जहां बिजली उपलब्ध भी कराई जा रही है, वहां भी कम वोल्टेज की समस्या किसानों के लिए एक नई मुसीबत बन गई है। पर्याप्त वोल्टेज न मिलने के कारण ट्यूबवेल, सबमर्सिबल पंप और सिंचाई मोटर अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं। कई स्थानों पर मोटरें बार-बार बंद हो जाती हैं, या फिर पानी की निकासी इतनी धीमी होती है कि वह सिंचाई के लिए पर्याप्त नहीं होती। किसानों का कहना है कि बिजली बिल का भुगतान नियमित रूप से करने के बावजूद उन्हें गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। इस समस्या के कारण न केवल खेती की लागत बढ़ रही है, बल्कि उत्पादन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।
खराब हो रही फसलें, मंडरा रहा आर्थिक नुकसान
धान की रोपाई के प्रारंभिक चरण में खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखना फसल के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। समय पर पानी की आपूर्ति न होने के कारण पौधे कमजोर पड़ रहे हैं और उनकी बढ़वार रुक गई है। इसी तरह की स्थिति प्रदेश की अन्य खरीफ फसलों के साथ भी देखी जा रही है। यदि बिजली आपूर्ति की यह समस्या जल्द ही हल नहीं होती है, तो किसानों को उत्पादन में भारी गिरावट और गंभीर आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। यह स्थिति ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय है, जहां कृषि मुख्य व्यवसाय है।
जर्जर बिजली व्यवस्था और उपकरणों की खराबी
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति में बार-बार आने वाली बाधाओं के पीछे कई मुख्य कारण हैं। कई स्थानों पर बिजली के तार वर्षों पुराने हो चुके हैं, लाइनें कमजोर हैं और ट्रांसफार्मर क्षमता से अधिक लोड झेलने के कारण बार-बार खराब हो रहे हैं। खराब उपकरणों की समय पर मरम्मत न होने के कारण फॉल्ट की स्थिति बनती रहती है, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित होती है। किसानों का यह भी आरोप है कि बिजली विभाग में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद समस्या समाधान में अत्यधिक देरी की जाती है, जिससे परेशानी लंबे समय तक बनी रहती है।
किसानों का विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन, तीन दिन का अल्टीमेटम
बिजली संकट के विरोध में प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसानों ने बिजली वितरण कंपनियों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। कई स्थानों पर बिजली कार्यालयों का घेराव कर स्थानीय अधिकारियों को अपनी मांगों के संबंध में ज्ञापन सौंपे गए हैं। किसानों की प्रमुख मांगों में ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना, कम वोल्टेज की समस्या का तत्काल समाधान, खराब ट्रांसफार्मर और जर्जर लाइनों को शीघ्र बदलना, सिंचाई के लिए निर्धारित समय पर पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना और अघोषित बिजली कटौती पर पूर्ण रोक लगाना शामिल है। कई जिलों में किसान संगठनों ने प्रशासन और बिजली विभाग को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो वे चक्काजाम, धरना-प्रदर्शन और बड़े जनआंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। किसानों का कहना है कि खेती पहले से ही बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और बाजार की चुनौतियों से जूझ रही है, ऐसे में यह बिजली संकट उनकी कठिनाइयों को और बढ़ा रहा है।
खेती-किसानी पर बढ़ता बिजली संकट का प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ सीजन के दौरान कृषि उत्पादन के लिए नियमित और पर्याप्त बिजली की आपूर्ति अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि सिंचाई प्रभावित होती रही, तो न केवल फसल उत्पादन में कमी आएगी, बल्कि किसानों की आय पर भी सीधा और गंभीर असर पड़ेगा। इस परिप्रेक्ष्य में, किसानों की यह मांग जायज है कि प्रदेश सरकार और बिजली वितरण कंपनियां तत्काल प्रभाव से ग्रामीण बिजली व्यवस्था में सुधार लाएं, ताकि खेतों तक समय पर पानी पहुंच सके और किसानों की कड़ी मेहनत तथा उनकी खड़ी फसल दोनों सुरक्षित रह सकें। यह सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावी कार्य योजना की आवश्यकता है।
