मध्य प्रदेश: 10 साल बाद मंडियों का नया वर्गीकरण, किसानों को मिलेगी बेहतर सुविधाएं
मध्यप्रदेश में 259 कृषि उपज मंडी समितियों का 10 साल बाद नया वर्गीकरण किया गया है। यह वर्गीकरण 19 अगस्त 2026 से प्रभावी है और इसका उद्देश्य मंडियों की प्रशासनिक क्षमता बढ़ाना तथा किसानों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 20 अगस्त 2026
मध्यप्रदेश की कृषि उपज मंडी समितियों का लगभग एक दशक बाद नवीन वर्गीकरण किया गया है, जिसे 19 अगस्त 2026 से प्रभावी कर दिया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि इस कदम से मंडियों की प्रशासनिक और वित्तीय क्षमताएं मजबूत होंगी, जिससे किसानों को मंडी प्रांगण में बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। यह वर्गीकरण मंडियों की पिछले तीन वित्तीय वर्षों की औसत कृषि उपज आवक और औसत आय के आधार पर किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंसाना के निर्देशन में मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने इस नवीन वर्गीकरण को अंतिम रूप दिया है। वर्तमान में प्रदेश में 259 कृषि उपज मंडी समितियां और 298 उपमंडियां कार्यरत हैं। इससे पहले मंडियों का वर्गीकरण वर्ष 2016 में हुआ था। दस वर्षों के दौरान कृषि उपज आवक, मंडियों की आय, व्यापारिक गतिविधियों और विपणन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए नए वर्गीकरण की आवश्यकता महसूस की गई।
चार वर्गों में बंटी 259 मंडी समितियां
नवीन वर्गीकरण के अनुसार, प्रदेश की 259 मंडी समितियों को उनकी औसत आय और कृषि उपज की आवक के आधार पर चार वर्गों—‘A’, ‘B’, ‘C’ और ‘D’ में बांटा गया है। इस नई व्यवस्था के तहत 47 मंडी समितियां ‘A’ वर्ग में, 63 ‘B’ वर्ग में, 81 ‘C’ वर्ग में और 68 मंडी समितियां ‘D’ वर्ग में शामिल की गई हैं। इन वर्गों के लिए औसत आय और कृषि उपज आवक के अलग-अलग मानक निर्धारित किए गए हैं। ‘A’ वर्ग की मंडियों के लिए औसत आय छह करोड़ रुपये से अधिक और औसत कृषि उपज आवक 2.50 लाख मीट्रिक टन से अधिक रखी गई है। ‘B’ वर्ग के लिए आय छह करोड़ रुपये तक और आवक 1.25 से 2.50 लाख मीट्रिक टन है। ‘C’ वर्ग के लिए औसत आय 1.50 से तीन करोड़ रुपये और आवक 0.50 से 1.25 लाख मीट्रिक टन है, जबकि ‘D’ वर्ग की मंडियों में औसत आय 1.50 करोड़ रुपये से कम और आवक 0.50 लाख मीट्रिक टन से कम है।
मंडियों के प्रदर्शन में आया सकारात्मक बदलाव
नए वर्गीकरण के आंकड़े मंडियों के प्रदर्शन में आए महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाते हैं। वर्ष 2016 के वर्गीकरण की तुलना में, ‘A’ वर्ग की मंडियों की संख्या 39 से बढ़कर 47, ‘B’ वर्ग की 42 से बढ़कर 63 और ‘C’ वर्ग की 56 से बढ़कर 81 हो गई है। इसके विपरीत, ‘D’ वर्ग की मंडियों की संख्या 122 से घटकर 68 रह गई है। विभाग के अनुसार, 54 मंडियों ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए उच्च श्रेणी में क्रमोन्नति प्राप्त की है। ‘D’ वर्ग की मंडियों की संख्या में 54 की कमी को मंडी व्यवस्था में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों का संकेत माना जा रहा है।
प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों पर पड़ेगा असर
नवीन वर्गीकरण का प्रभाव केवल मंडियों की श्रेणी निर्धारण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर मंडी समितियों के प्रशासनिक ढांचे और वित्तीय अधिकारों पर भी पड़ेगा। मंडी की श्रेणी के अनुसार अधिकारी-कर्मचारियों के सेटअप में बदलाव किए जा सकेंगे, जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी। साथ ही, मंडी समितियों को उपलब्ध वित्तीय अधिकारों में वृद्धि की जाएगी, जिससे वे अपने क्षेत्र की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार किसानों के लिए सुविधाओं का विकास कर सकेंगी। इससे मंडी प्रांगणों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने, व्यापारिक गतिविधियों को व्यवस्थित करने और कृषि उपज विपणन को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी।
हम preh-माल और तुलावटियों के लाइसेंस विस्तार की संभावना
मंडी समितियों में हम्माल और तुलावटियों सहित अन्य आवश्यक लाइसेंसों के सुव्यवस्थित विस्तार की संभावना भी बढ़ेगी। इससे मंडी में होने वाली व्यापारिक गतिविधियों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकेगा। व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर विकल्प और व्यवस्थित व्यवस्था मिलेगी, जिसका लाभ व्यापारियों, हम्मालों, तुलावटियों और मंडी से जुड़े अन्य हितधारकों को भी प्राप्त होगा।
सुरक्षा प्रावधान: चालू वित्तीय वर्ष में किसी भी मंडी का स्तर नीचे नहीं जाएगा
किसानों और मंडी समितियों के हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रावधान भी किया गया है। इसके तहत, चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 (31 मार्च 2027 तक) में, किसी भी मंडी समिति को नए वर्गीकरण के कारण निम्नतर वर्ग में नहीं रखा जाएगा। इस प्रावधान से उन मंडियों को तत्काल नुकसान से बचाया गया है जिनकी श्रेणी नए मानकों के आधार पर कम हो सकती थी। यह उन्हें नई व्यवस्था के अनुरूप कार्य करने और अपनी प्रशासनिक एवं वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगा।
सफलता की कुंजी: किसान-केंद्रित सुविधाएं
मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के आयुक्त-सह-प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम द्वारा जारी आदेश के बाद, नवीन वर्गीकरण को लागू करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया गया है। हालांकि, इस नवीन वर्गीकरण की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नई श्रेणियों के अनुरूप प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों का कितना प्रभावी उपयोग किया जाता है। केवल वर्ग बदलने से किसानों की समस्याएं हल नहीं होंगी; मंडी समितियों को किसानों की वास्तविक जरूरतों के आधार पर सुविधाओं का विकास करना होगा। मंडी प्रांगणों में साफ-सफाई, पेयजल, शेड, पार्किंग, तौल व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा और उपज के व्यवस्थित विपणन जैसी सुविधाओं को मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।
मध्य प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था में मंडी व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस नए वर्गीकरण के माध्यम से मंडी व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। ‘D’ वर्ग की मंडियों की संख्या में कमी आना मंडी व्यवस्था में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों का सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसका स्थायी लाभ तभी मिलेगा जब बढ़ी हुई आय और आवक का उपयोग किसानों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने में किया जाए।
