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मधुसूदनगढ़ में प्रकृति का कहर: पीली पड़ी सोयाबीन, किसान मुआवजे की आस में

गुना जिले के ग्राम दुर्गपुरा में प्राकृतिक प्रकोप से सोयाबीन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। पीड़ित किसानों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर तत्काल...

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संवाददाता: राजा हतम वेग
मधुसूदनगढ़ में प्रकृति का कहर: पीली पड़ी सोयाबीन, किसान मुआवजे की आस में

गुना/ मधुसूदनगढ़ | संवाददाता: राजा हतम वेग

द क्लिफ न्यूज़ | 8 सितंबर 2026

गुना जिले की मधुसूदनगढ़ तहसील के ग्राम दुर्गपुरा में प्राकृतिक प्रकोप ने किसानों की कमर तोड़ दी है। क्षेत्र में सोयाबीन की पूरी फसल के बर्बाद हो जाने के कारण किसान गहरे आर्थिक संकट में घिर गए हैं। अपनी बदहाल स्थिति से प्रशासन को अवगत कराने के लिए किसानों ने मधुसूदनगढ़ तहसीलदार को एक सामूहिक ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित पटवारी को तत्काल मौके पर भेजकर फसल नुकसान का सटीक और पारदर्शी सर्वे कराया जाए, ताकि उन्हें उचित मुआवजा मिल सके।

किसानों का कहना है कि उन्होंने अपने खेतों में कड़ी मेहनत और भारी लागत लगाकर सोयाबीन की बुवाई की थी। हालांकि, बीते दिनों हुए प्राकृतिक प्रकोप और विपरीत मौसम की मार ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। खेतों में खड़ी सोयाबीन की फसल पूरी तरह पीली पड़कर नष्ट हो चुकी है, जिससे किसी भी प्रकार की पैदावार की कोई संभावना शेष नहीं बची है।

किसानों की आर्थिक तंगी और प्रशासन से गुहार

पीड़ित किसानों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि पौधों में जो इक्का-दुक्का फलियां आई भी थीं, वे भी गलकर नीचे गिर गई हैं। फसल के पूर्ण विनाश ने उन्हें कर्ज के जाल में धकेल दिया है। खाद-बीज का खर्च और बैंकों का कर्ज चुकाना अब उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। तहसीलदार को सौंपे गए आवेदन पर रामनारायण, देविराम, मूलचंद, सोनू, जोरम, इंदरसिंह, मांगीलाल, रामासा, विजयसिंह, राजू, कमलेश, जमनालाल, रमेश और अमन समेत कई ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं।

ग्रामीणों ने शासन से गुहार लगाई है कि उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से राहत राशि और क्षतिपूर्ति प्रदान की जाए। किसान परिवारों को संबल मिले, इसके लिए प्रशासन द्वारा सर्वे की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देशों का इंतजार है।