लोकायुक्त के 50 वर्ष: सीएम ने कहा, सुशासन जनविश्वास पर आधारित
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकायुक्त के 50वें स्थापना दिवस पर कहा कि सुशासन जनविश्वास पर आधारित है। उन्होंने दस्तावेजीकरण और भविष्य के रोडमैप पर जोर...

द क्लिफ न्यूज़ डेस्क | संवाददाता: शशि भूषण कंचनीय
द क्लिफ न्यूज़ | लखनऊ | 14 सितंबर 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित लोकायुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं में आम नागरिक का अटूट विश्वास ही लोकतंत्र की असली शक्ति है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि सुशासन पूरी तरह से जनविश्वास पर ही टिका होता है और इसकी कसौटी यही है कि समाज के अंतिम पायदान पर बैठा व्यक्ति भी संस्थाओं पर भरोसा करे।
मुख्यमंत्री ने लोकायुक्त संगठन की पांच दशक की यात्रा को एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने याद दिलाया कि 14 सितंबर 1977 को न्यायमूर्ति विशम्भर दयाल के नेतृत्व में इस संस्था का गठन हुआ था। वर्तमान में न्यायमूर्ति संजय मिश्रा के मार्गदर्शन में संगठन नई ऊर्जा के साथ कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया कि संगठन को अपनी स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में अब तक निपटाए गए मामलों का व्यापक दस्तावेजीकरण करना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने आगामी 50 वर्षों के लिए एक प्रभावी रोडमैप तैयार करने हेतु देश भर के लोकायुक्तों और विशेषज्ञों के साथ संवाद स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
पारदर्शिता में तकनीक की भूमिका
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन में पारदर्शिता लाने में तकनीक की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिसिस और ई-गवर्नेंस जैसी आधुनिक प्रणालियां प्रशासन को अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बना रही हैं। उन्होंने सार्वजनिक वितरण प्रणाली का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार ई-पॉस मशीनों और ट्रकों की ट्रैकिंग जैसी तकनीकों के प्रयोग से राशन वितरण में होने वाली शिकायतों को लगभग शून्य कर दिया गया है। इसी प्रकार, राजस्व विभाग के 34 लाख लंबित मामलों का निस्तारण तकनीक और समयबद्ध प्रक्रियाओं के माध्यम से सफलतापूर्वक किया गया है, जिससे नागरिकों को राहत मिली है।
उन्होंने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) व्यवस्था की भी सराहना की, जिसके माध्यम से सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है और योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक बिना किसी बाधा के पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि शिकायतों के निवारण की व्यवस्था का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए, क्योंकि अनावश्यक और निराधार शिकायतें ईमानदार नागरिकों के कीमती समय को व्यर्थ करती हैं।
भ्रष्टाचार पर लोकायुक्त का पक्ष
इस अवसर पर लोकायुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्रा ने अपने संबोधन में भ्रष्टाचार को केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि समाज के गरीब और युवा वर्ग के अधिकारों का हनन बताया। उन्होंने डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से पारदर्शिता को और अधिक सुदृढ़ करने का संकल्प दोहराया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में लोकायुक्त संगठन द्वारा परिवादों के निस्तारण की दर 98 प्रतिशत रही है, जो संस्था की कार्यकुशलता और निष्पक्षता को दर्शाता है।
समारोह में उपलोकायुक्त सुरेंद्र कुमार यादव, दिनेश कुमार सिंह और शंभू सिंह यादव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने संस्था के 50 वर्षों के सफर पर प्रकाश डाला और इसके महत्व को रेखांकित किया। इस अवसर पर संगठन की पांच दशक की यात्रा पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिसमें संस्था के उद्भव, विकास और उपलब्धियों को दर्शाया गया। समारोह में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे, जिन्होंने लोकायुक्त संगठन की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।
