लोकतंत्र बचाने का संकल्प: मीरगंज में कांग्रेस नेता इलियास अंसारी नजरबंद
बरेली के मीरगंज में कांग्रेस नेता इलियास अंसारी को पुलिस द्वारा नजरबंद किए जाने के बाद उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी...

अफसार खान संवाददाता बरेली | संवाददाता: इज़हार आलम
द क्लिफ न्यूज़ | बरेली | 9 अक्टूबर 2026
बरेली के मीरगंज में कांग्रेस नेता एवं पूर्व चेयरमैन इलियास अंसारी को पुलिस ने घर में ही नजरबंद कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद इलियास अंसारी ने कहा है कि उनका हौसला कम नहीं होगा और वे न डरने वाले हैं, न ही झुकने वाले हैं। उन्होंने स्वयं को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का सिपाही बताते हुए जोर दिया कि उनकी लड़ाई लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए है।
कांग्रेस नेता इलियास अंसारी ने कहा कि आवाज दबाने की हर कोशिश का जवाब वे लोकतांत्रिक संघर्ष के माध्यम से देंगे। उन्होंने कहा कि तानाशाही नहीं चलेगी और लोकतंत्र की आवाज को किसी भी स्थिति में रुकने नहीं दिया जाएगा। इस दौरान, उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी प्रमुखता से उठाई और कहा कि संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए उनका यह संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
प्रशासन द्वारा की गई इस कार्रवाई के बावजूद, कांग्रेस नेता ने अपने तेवर कड़े रखे हैं और भविष्य में भी अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धताओं पर अडिग रहने का दावा किया है। स्थानीय स्तर पर यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसमें इलियास अंसारी ने अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संकल्प व्यक्त किया है।
पूर्व चेयरमैन इलियास अंसारी ने तानाशाही के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की बात कही।
कांग्रेस नेता इलियास अंसारी को मीरगंज में पुलिस द्वारा नजरबंद किए जाने की घटना ने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है। अंसारी ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र के दमन का प्रयास बताते हुए इसे कतई बर्दाश्त न करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि जब भी जनता की आवाज को दबाने का प्रयास किया जाएगा, वे और उनकी पार्टी ऐसे हर प्रयास का पुरजोर विरोध करेंगे। इलियास अंसारी ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए कहा कि वे उनके दिखाए रास्ते पर चलते हुए देश के लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
अपने निवास पर नजरबंद होने के बावजूद, इलियास अंसारी ने मीडिया के माध्यम से जनता से सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति विशेष के खिलाफ कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में लोकतंत्र की आवाज को कुचलने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। अंसारी ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी प्रकार के दबाव या धमकी से डरने वाले नहीं हैं और अपने सिद्धांतों पर अडिग रहकर संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि तानाशाही रवैये के खिलाफ उनका यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक कि लोकतंत्र पूरी तरह से बहाल नहीं हो जाता।
इस नजरबंदी को उन्होंने अपने विरोध की आवाज को बुलंद करने का एक और अवसर बताते हुए कहा कि वे इस स्थिति का उपयोग जनता को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य हमेशा से ही जनता की सेवा करना और उनके हकों की रक्षा करना रहा है, और यह लक्ष्य किसी भी परिस्थिति में बदलने वाला नहीं है।
कांग्रेस नेता ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाते हुए आवाज बुलंद की।
इलियास अंसारी ने अपनी नजरबंदी के संदर्भ में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करती है और यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। अंसारी के अनुसार, ज्ञानेश कुमार के पद पर बने रहने से संवैधानिक अधिकारों की रक्षा संभव नहीं है, इसीलिए उनका तत्काल इस्तीफा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई केवल तानाशाही के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन नीतियों और व्यक्तियों के खिलाफ भी है जो संविधान की अवहेलना करते हैं।
कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग किसी व्यक्तिगत द्वेष का परिणाम नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य और संवैधानिक व्यवस्था की मजबूती के लिए एक आवश्यक कदम है। उन्होंने कहा कि यदि ज्ञानेश कुमार तत्काल अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो कांग्रेस और उनके समर्थक विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी रखेंगे। इलियास अंसारी ने कहा कि वे संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को किसी भी हाल में कमजोर नहीं पड़ने देंगे और इस मांग को पूरा करवाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन इस मामले की गंभीरता को समझेगा और ज्ञानेश कुमार पर इस्तीफा देने का दबाव बनाएगा। इलियास अंसारी ने कहा कि यह मुद्दा केवल बरेली या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। उन्होंने कहा कि वे इस संघर्ष में अकेले नहीं हैं, बल्कि पूरा देश उनके साथ है जो लोकतंत्र को बचाना चाहता है।
