लीलावती अस्पताल में महिला की सर्जरी के बाद बिगड़ी हालत, लापरवाही के आरोप
नरसिंहगढ़ के मलावर क्षेत्र की महिला की लीलावती अस्पताल में सर्जरी के बाद हालत बिगड़ने पर परिजनों ने गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। स्वास्थ्य विभाग जांच की तैयारी में है।

द क्लिफ न्यूज़ | नरसिंहगढ़ | 12 अगस्त 2026
नरसिंहगढ़ से लगभग 12 किलोमीटर दूर मलावर क्षेत्र के ग्राम जामी की निवासी सुरक्षा यादव की लीलावती अस्पताल में सर्जरी के बाद अचानक हालत बिगड़ने का गंभीर मामला सामने आया है। महिला के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सक पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हरकत में आ गए हैं और स्थानीय स्तर पर जांच शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, सुरक्षा यादव को ब्लीडिंग की समस्या के चलते उनके पति विनोद यादव नरसिंहगढ़ के लीलावती अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि 6 अगस्त को उपचार के दौरान जब महिला की सर्जरी की जा रही थी, तब ऑपरेशन के दौरान उसकी स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ गई। अस्पताल प्रबंधन ने तत्परता दिखाते हुए महिला को तत्काल भोपाल रेफर कर दिया।
बच्चेदानी और अंदरूनी अंगों को नुकसान का गंभीर आरोप
परिजनों का दावा है कि सर्जरी के दौरान महिला की बच्चेदानी और आसपास के अन्य अंदरूनी अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। परिवार का यह भी कहना है कि महिला की स्थिति इतनी चिंताजनक हो गई थी कि उसे तुरंत भोपाल के एक वरिष्ठ अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उसका उपचार किया। भोपाल के चिकित्सकों ने भविष्य में सुरक्षा यादव के दोबारा मां बनने की संभावना पर भी गंभीर चिंता जताई है। सुरक्षा यादव पहले से एक बच्ची की मां हैं, ऐसे में भविष्य में मां न बन पाने की आशंका ने उन्हें और उनके पूरे परिवार को गहरा सदमा पहुंचाया है और वे मानसिक रूप से अत्यंत परेशान हैं।
बाहरी विशेषज्ञ की जगह अचानक ऑपरेशन का आरोप
पीड़ित महिला के पति विनोद यादव ने बताया कि लीलावती अस्पताल में उपचार के लिए उनसे लगभग 12 हजार रुपये की राशि ली गई थी। परिजनों का आरोप है कि उन्हें शुरुआत में यह विश्वास दिलाया गया था कि उपचार के लिए बाहर से किसी विशेषज्ञ डॉक्टर को बुलाया जाएगा। हालांकि, बाद में अस्पताल में ही अचानक सुरक्षा यादव का ऑपरेशन कर दिया गया। परिवार ने इस बात पर सवाल उठाया है कि जिस चिकित्सक ने ऑपरेशन किया, उसकी शैक्षणिक योग्यता और अनुभव का स्तर क्या है, और यदि बाहरी विशेषज्ञ को बुलाया जाना था तो फिर स्थानीय चिकित्सक ने ही ऑपरेशन क्यों किया?
परिजनों ने विशेष रूप से डॉक्टर अमरीन अली खान और अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की गहन जांच की मांग की है। हालांकि, इन गंभीर आरोपों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
अस्पताल में विवाद और पुलिस की मदद
शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे परिजनों का आरोप है कि उनकी बात सुनने के बजाय वहां विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। परिवार का दावा है कि इस दौरान उनके साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की गई और उन्हें अस्पताल से बाहर जाने को कहा गया। इस अप्रिय स्थिति के बाद परिवार ने तत्काल डायल-112 पर संपर्क कर पुलिस की सहायता मांगी और मामले की जानकारी पुलिस को दी। परिवार ने स्थानीय थाना प्रभारी से अपनी सुरक्षा की गुहार भी लगाई है। यादव समाज की ओर से भी इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर स्वास्थ्य विभाग को एक ज्ञापन सौंपने की तैयारी की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की जांच पर टिकी निगाहें
यह मामला अब स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के स्तर तक पहुंच गया है। स्थानीय सिविल अस्पताल के CMHO डॉ. राजेन्द्र अहिरवार ने बताया है कि मामले की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला के उपचार और सर्जरी के दौरान किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही हुई है या नहीं।
अस्पताल प्रबंधन का आरोपों को 'मामूली' बताया
इस संबंध में लीलावती अस्पताल की डायरेक्टर मोनिका सैनी से मीडिया का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन कथित तौर पर उन्होंने बातचीत शुरू होने से पहले ही फोन काट दिया। अस्पताल प्रबंधन की ओर से अभी तक अनौपचारिक तौर पर यह कहा गया है कि यह मामला कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। हालांकि, परिजनों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के मद्देनजर, जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन का विस्तृत पक्ष महत्वपूर्ण साबित होगा।
पुराने मामलों का भी हो रहा उल्लेख
स्थानीय लोगों और महिला के परिजनों द्वारा इस अस्पताल से जुड़े कुछ पुराने मामलों का भी जिक्र किया जा रहा है। इन पुरानी घटनाओं में एक गर्भवती महिला की प्रसव के दौरान कथित मौत और एक अन्य मामले में बच्चेदानी के उपचार के दौरान महिला के अंदरूनी अंग को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाना शामिल है। इन पूर्व आरोपों की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, और इनकी सच्चाई संबंधित जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही सामने आ सकेगी।
फिलहाल, सुरक्षा यादव के मामले ने एक बार फिर निजी अस्पतालों में महिलाओं के स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, सर्जनों की चिकित्सकीय योग्यता, सर्जरी की प्रक्रियाओं और आपातकालीन स्थितियों में रेफरल व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब स्वास्थ्य विभाग की जांच पर ही यह निर्भर करेगा कि परिजनों के आरोप कितने सत्य साबित होते हैं और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
