लीलावती अस्पताल में महिला की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
नरसिंहगढ़ के लीलावती अस्पताल में इलाज के दौरान हेमलता यादव की मौत के बाद हंगामा। परिजनों ने हाई डोज और लापरवाही का आरोप लगाया। स्वास्थ्य विभाग जांच में जुटा।

संवाददाता: महेंद्र शर्मा
द क्लिफ न्यूज़ | नरसिंहगढ़ | 13 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश के नरसिंहगढ़ में नेशनल हाईवे-46 पर स्थित निजी लीलावती अस्पताल में इलाज के लिए लाई गई हेमलता यादव नामक एक महिला की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में घोर लापरवाही और कथित तौर पर अत्यधिक दवा (हाई डोज) देने का आरोप लगाया है। इस घटना के बाद अस्पताल में हंगामे की स्थिति बन गई और स्वास्थ्य विभाग की एक टीम ने मौके पर पहुंचकर अस्पताल की व्यवस्थाओं, डॉक्टरों की उपलब्धता और उपचार संबंधी दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी है।
हेमलता यादव (पति राहुल यादव) ग्राम संवासी की रहने वाली थीं और भोपाल में नौकरी करती थीं। बुधवार रात अपने पति के साथ एक जन्मदिन कार्यक्रम से लौटकर गांव पहुंचने के बाद अचानक उन्हें पेट में तेज दर्द उठा। इसके बाद परिजन उन्हें तत्काल नेशनल हाईवे-46 स्थित लीलावती अस्पताल ले गए। परिजनों के अनुसार, अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने हेमलता की जांच की और उनकी शुगर का स्तर अधिक बताया। जिसके बाद उन्हें दवाइयां और इंजेक्शन दिए गए।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप, इलाज पर उठाए सवाल
मृतका के पति राहुल यादव का आरोप है कि उपचार के दौरान हेमलता को कथित तौर पर हाई डोज दी गई, जिसके परिणामस्वरूप उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। परिजनों के अनुसार, गुरुवार तड़के लगभग साढ़े तीन बजे अस्पताल की ओर से हेमलता को भोपाल रेफर कर दिया गया। उन्हें लेकर परिजन भोपाल के लिए रवाना हुए, लेकिन नरसिंहगढ़ से लगभग 30 किलोमीटर दूर कुरावर के पास रास्ते में ही महिला ने दम तोड़ दिया। इस घटना से आहत परिजनों ने शव को वापस लाकर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की।
परिजनों ने न केवल इलाज में बरती गई कथित लापरवाही पर चिंता व्यक्त की, बल्कि उपचार संबंधी फाइल और दस्तावेज उपलब्ध कराने में अस्पताल प्रबंधन द्वारा की गई आनाकानी का भी आरोप लगाया। कुछ स्थानीय लोगों ने तो अस्पताल के कुछ कर्मचारियों के नशे की हालत में होने का भी दावा किया, हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। परिजनों ने बताया कि अस्पताल की बाहरी सुविधाओं और व्यवस्थाओं से प्रभावित होकर उन्होंने अपनी पत्नी को यहां भर्ती कराया था, लेकिन उनकी मौत के बाद परिवार को गहरा सदमा लगा है।
स्वास्थ्य विभाग सक्रिय, अस्पताल की व्यवस्थाएं जांच के दायरे में
स्थानीय लोगों और परिजनों का दावा है कि पिछले लगभग पांच दिनों के भीतर यह इसी अस्पताल से जुड़ी दूसरी ऐसी शिकायत है। इससे पहले भी एक विवाहिता के उपचार को लेकर इसी अस्पताल के खिलाफ पुलिस थाने तक शिकायत पहुंचने की बात सामने आई थी। इन लगातार सामने आ रही शिकायतों को देखते हुए स्थानीय लोगों में अस्पताल की व्यवस्थाओं की गंभीरता से जांच कराने की मांग ने जोर पकड़ा है।
महिला की मृत्यु की सूचना मिलने के तुरंत बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीबीएमओ) डॉ. राजेंद्र अहिरवार के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की एक टीम ने लीलावती अस्पताल का निरीक्षण किया। टीम ने अस्पताल की विभिन्न व्यवस्थाओं, जैसे आईसीयू, इमरजेंसी, जनरल वार्ड, ऑपरेशन थिएटर, एक्स-रे और लैब का जायजा लिया। इसके साथ ही अस्पताल में उपलब्ध डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की जानकारी भी जुटाई गई।
जांच में डॉक्टर, दवाएं और आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड शामिल
जांच के दौरान, अस्पताल की सूची में दर्ज दो डॉक्टर मौके पर उपस्थित पाए गए, जबकि एक डॉक्टर के संबंध में दस्तावेजों की जांच विभागीय स्तर पर की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कार्यरत डॉक्टरों से संबंधित दस्तावेजों को भी जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया है। इस मामले के प्रकाश में आने के बाद यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित सभी चिकित्सकीय और अन्य आवश्यक मापदंडों का पालन किया जा रहा है।
मृतका हेमलता यादव के शव का पोस्टमार्टम नरसिंहगढ़ सिविल अस्पताल में कराया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अस्पताल से प्राप्त उपचार संबंधी रिकॉर्ड के आधार पर ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। सीबीएमओ डॉ. राजेंद्र अहिरवार ने बताया कि शिकायत की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल का विस्तृत निरीक्षण किया गया है। सभी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के बाद एक विस्तृत प्रतिवेदन एसडीएम और वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
फिलहाल, हेमलता यादव की मौत को लेकर परिजनों द्वारा लगाए गए लापरवाही और हाई डोज के आरोप जांच के दायरे में हैं। यह निश्चित रूप से कहना जल्दबाजी होगी कि मौत का कारण इलाज में लापरवाही है या किसी विशेष दवा की अधिक मात्रा। इसका अंतिम और वस्तुनिष्ठ निर्धारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट, अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड और विशेषज्ञ जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकेगा। इस घटना ने स्थानीय नागरिकों में निजी अस्पतालों की चिकित्सकीय व्यवस्थाओं, डॉक्टरों की उपलब्धता और मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सभी की निगाहें अब स्वास्थ्य विभाग द्वारा सौंपी जाने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके आधार पर ही अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सकेगी।
