लाल किले से पीएम मोदी का संकल्प: 2047 तक विकसित भारत, 'शक्ति की सप्त धारा' पर जोर
लाल किले से पीएम मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य दोहराया। उन्होंने 'शक्ति की सप्त धारा' का आह्वान करते हुए आत्मनिर्भरता, युवा शक्ति व तकनीकी क्षमता पर जोर दिया।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 15 अगस्त 2026
80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार राष्ट्रीय ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के बाद 21 तोपों की सलामी दी गई। अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री ने 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को रेखांकित किया और इसे देश की विकास यात्रा का मुख्य आधार बताया। उन्होंने आत्मनिर्भरता, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी क्षमता, रक्षा उत्पादन, महिला सशक्तीकरण और युवा शक्ति जैसे प्रमुख स्तंभों पर जोर देते हुए कहा कि भारत को अब छोटे सपने देखने के बजाय बड़े संकल्प लेने होंगे और अपनी पूरी सामर्थ्य का उपयोग करना होगा।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पूरा राष्ट्र 'वंदे मातरम्' की भावना से जुड़ा हुआ है और उत्साह के साथ नए संकल्पों की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “समय भारत का है और संकल्प भी भारत का होना चाहिए। बड़े लक्ष्य तभी हासिल किए जा सकते हैं, जब संकल्प दृढ़ हों और कठिन परिस्थितियों के बीच रास्ता निकालने का साहस हो।”
सोच की सीमाओं को तोड़ने का आह्वान
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि किसी देश के विकास में संसाधनों की कमी से अधिक बाधा उसकी सोच की सीमाएं बनती हैं। जब राष्ट्र अपनी क्षमताओं को सीमित मानने लगता है, तो उपलब्ध संसाधनों का भी पूरा उपयोग नहीं हो पाता। उन्होंने माओवादी विचारधारा का अप्रत्यक्ष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि वैचारिक स्तर पर ऐसी सोच समाज को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश करती है, जिससे बाहर निकलना आवश्यक है। उन्होंने समुद्री क्षेत्र में तेल और गैस की खोज का उदाहरण देते हुए कहा कि लंबे समय तक पर्याप्त अन्वेषण न होने के कारण संभावनाओं का उपयोग नहीं हो पाया, जिसे अब गति दी जा रही है। ऊर्जा सुरक्षा के लिए जमीन के साथ समुद्र के भीतर भी नए संसाधनों की खोज को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।
वैश्विक परिस्थितियों के बीच आत्मनिर्भरता का महत्व
प्रधानमंत्री ने वैश्वीकरण के दौर में वैश्विक अर्थव्यवस्था के जुड़े होने की बात कही, लेकिन साथ ही यह भी इंगित किया कि कई देश रणनीतिक दबाव बनाने के लिए संसाधनों और क्षमताओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने पेट्रोल, डीजल, खाद और दवाओं जैसी आवश्यक आपूर्तियों के वैश्विक परिस्थितियों से प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की। इस संदर्भ में, उन्होंने आत्मनिर्भरता को केवल आर्थिक नीति न मानकर राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हित से जुड़ी आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि यदि भारत ने पिछले वर्षों में अपनी उत्पादन क्षमता और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत नहीं किया होता, तो वैश्विक संकटों का सामना और कठिन हो सकता था। ‘मेक इन इंडिया’, स्वदेशी और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को केवल बड़ा बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक उत्पादन और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनना है।
'शक्ति की सप्त धारा' से विकसित भारत का मार्ग
प्रधानमंत्री ने अगले पांच से सात वर्षों में उन कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य रखा, जो पिछले दशकों में नहीं हो सके। उन्होंने भारत की विकास यात्रा को गति देने के लिए 'शक्ति की सप्त धारा' का आह्वान किया। इसमें पहली धारा मैन्युफैक्चरिंग पावर, दूसरी कृषि व खाद्य उत्पादन, तीसरी प्रौद्योगिकी व नवाचार, चौथी गतिशक्ति (आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर), पांचवीं रक्षा शक्ति (आत्मनिर्भरता), छठी ग्रीन व ब्लू इकोनॉमी (पर्यावरण-अनुकूल विकास और समुद्री अर्थव्यवस्था) और सातवीं भारत की सॉफ्ट पावर (संस्कृति, योग, ज्ञान का वैश्विक प्रसार) शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सातों शक्तियों को देश की युवा शक्ति से जोड़कर भारत को नई गति और ऊंचाई दी जा सकती है।
ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाली दुनिया ऊर्जा के बिना नहीं चल सकती और सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व डेटा सेंटर जैसी आधुनिक तकनीकों के लिए भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होगी। इसलिए, भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ नवीकरणीय ऊर्जा और नए संसाधनों पर काम तेज करने पर जोर दिया। ऊर्जा के बेहतर उपयोग, नए स्रोतों की खोज और आत्मनिर्भरता के माध्यम से भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर सकता है। उन्होंने ऊर्जा अवसंरचना के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि 2014 से पहले जहां करीब 70 शहरों में पाइप गैस की व्यवस्था थी, वहीं अब यह संख्या करीब 700 शहरों तक पहुंच गई है। घरों में पाइप गैस कनेक्शन की संख्या भी करीब 20-22 लाख से बढ़कर लगभग 1.75 करोड़ हो गई है।
प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर को भारत के भविष्य के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आधुनिक डिजिटल दुनिया में चिप हर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के लिए आवश्यक है। इसलिए, भारत को चिप का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता और तकनीकी विकास का केंद्र बनना होगा। उन्होंने देश में सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए विकसित हो रहे इकोसिस्टम और स्थापित किए जा रहे संयंत्रों का उल्लेख किया। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और अन्य उभरती तकनीकों में भारत की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।
रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग में प्रगति
प्रधानमंत्री ने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन में चार गुना, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग में सात गुना और आधुनिक रेलवे कोच के उत्पादन में 21 गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में चार गुना और डिजिटल लेनदेन में करीब 100 गुना वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत अब केवल बाजार बनने के बजाय उत्पादन, तकनीक और नवाचार का केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
वैश्विक मंच पर भारतीय ब्रांडों का उदय
प्रधानमंत्री ने भारतीय कंपनियों और ब्रांडों को वैश्विक पहचान दिलाने का लक्ष्य भी सामने रखा। उन्होंने सवाल उठाया कि आने वाले दशक में दुनिया की 500 बड़ी कंपनियों में भारत की कम से कम 50 कंपनियां क्यों न हों। उन्होंने भारतीय बैंकों को दुनिया के शीर्ष पांच बैंकों में शामिल करने, वैश्विक स्तर की बड़ी फार्मा कंपनियों में भारतीय कंपनियों की संख्या बढ़ाने और दुनिया के प्रमुख ब्रांडों में भारतीय नाम स्थापित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारत के ब्रांड ही भारत की वैश्विक पहचान बनेंगे, जिसके लिए केंद्र के साथ राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों को भी सुधारों की गति तेज करनी होगी। पिछली सदी के नियमों से 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना नहीं किया जा सकता, इसलिए समय के अनुरूप नीतियों और नियमों में बदलाव जरूरी है।
2047 तक विकसित भारत: एक राष्ट्रीय संकल्प
प्रधानमंत्री ने 'विकसित भारत @2047' को अपने संबोधन का केंद्रीय लक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना 140 करोड़ देशवासियों का साझा सपना है। उन्होंने कहा कि सदी का एक-चौथाई हिस्सा बीत चुका है और आने वाला एक-चौथाई भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प बनना चाहिए, जिसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश अब रुक नहीं सकता और न उसकी गति धीमी हो सकती है; कार्य संस्कृति, सोच और काम करने की गति में बदलाव आवश्यक है। उन्होंने युवा शक्ति, महिलाओं, किसानों और मजदूरों पर भरोसा जताते हुए कहा कि भारत की नई पीढ़ी में बड़े बदलाव की क्षमता है।
महिला सशक्तीकरण और गरीबी उन्मूलन पर जोर
प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण विधेयक को लागू कराने की दिशा में मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी की क्षमता का पूरा उपयोग किए बिना भारत अपने बड़े लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सकता। उन्होंने राजनीति, अर्थव्यवस्था, विज्ञान, तकनीक, उद्योग और सामाजिक विकास के हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की शक्ति निर्णायक भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में करीब 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर आने में सफल हुए हैं, जिसे नागरिकों की मेहनत, सरकारी योजनाओं और आर्थिक अवसरों के विस्तार का परिणाम बताया। नल से जल, शौचालय, आवास और गैस कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का भी उन्होंने उल्लेख किया।
भारत की आर्थिक यात्रा और युवा शक्ति
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय भारत को दुनिया की ‘फ्रैजाइल फाइव’ अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन अब देश दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। 140 करोड़ भारतीयों का सामूहिक संकल्प भारत की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने मेट्रो नेटवर्क, आधुनिक रेलवे, सड़क, डिजिटल कनेक्टिविटी और अन्य बुनियादी ढांचे के विस्तार को विकास की गति का उदाहरण बताते हुए कहा कि तेज गति से हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास 2047 तक विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार कर रहा है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से नए विचारों, नवाचार और मेहनत के साथ आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत के सामने बड़े अवसर हैं, जिन्हें हासिल करने के लिए तेजी, अनुशासन, नई सोच और परिणाम देने वाली कार्य संस्कृति जरूरी होगी। उन्होंने युवाओं की ऊर्जा को ‘शक्ति की सप्त धारा’ से जोड़ते हुए कहा कि यही सामर्थ्य भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जा सकती है।
स्वतंत्रता सेनानियों को नमन और आपदा प्रभावितों के प्रति संवेदना
प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी सहित सभी स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों के बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता करोड़ों भारतीयों के त्याग और संघर्ष का परिणाम है। ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक भूमिका को याद करते हुए उन्होंने इसे देश के गौरव और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ा। प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित परिवारों के प्रति भी संवेदना व्यक्त की और भरोसा दिलाया कि सरकार और पूरा देश संकट की इस घड़ी में प्रभावित लोगों के साथ खड़ा है।
