लहार SDOP पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, CM को पत्र
भिंड के लहार अनुभाग में पदस्थ SDOP प्रवीण त्रिपाठी पर अवैध वसूली और रेत माफिया से सांठगांठ के गंभीर आरोप लगे हैं। पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने CM से SIT जांच और कार्रवाई की मांग की है।

द क्लिफ न्यूज़ | 20 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश के भिंड जिले के लहार अनुभाग में पदस्थ अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (SDOP) प्रवीण त्रिपाठी पर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और पद के दुरुपयोग के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। इन आरोपों के संबंध में मध्य प्रदेश शासन के पूर्व मंत्री और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारी के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे विवरणों और मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के अनुसार, SDOP प्रवीण त्रिपाठी पर लहार अनुभाग के अंतर्गत आने वाले थानों के प्रभारियों और अन्य पुलिस कर्मचारियों से प्रतिमाह बड़ी राशि वसूलने का दबाव बनाने का आरोप है। मिहोना थाने में पदस्थ आरक्षक आलोक सिंह राठौड़ द्वारा किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि मातहतों से 25,000 रुपये से लेकर 1,00,000 रुपये (एक लाख) प्रति माह तक की अवैध वसूली की मांग की जा रही है।
UPI लेन-देन के स्क्रीनशॉट से बढ़ी मुश्किलें
इस मामले में विवाद को तब और बल मिला जब सोशल मीडिया पर कुछ बैंक लेन-देन (UPI) के स्क्रीनशॉट्स वायरल हुए। आरोपों के मुताबिक, मिहोना थाने में पदस्थ एक मुंशी के बैंक खाते के जरिए हुए इन ऑनलाइन लेन-देनों में 20,000 और 50,000 रुपये जैसी बड़ी रकमें ट्रांसफर की गई हैं। इन डिजिटल साक्ष्यों के सार्वजनिक होने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है और आरोपों को बल मिला है।
रेत माफिया से सांठगांठ के भी आरोप
पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि SDOP प्रवीण त्रिपाठी विगत दो वर्षों से अधिक समय से लहार में पदस्थ हैं। उन पर यह भी आरोप है कि वे इस दौरान क्षेत्र के रेत माफियाओं के साथ सांठगांठ कर अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके साथ ही, अपने अधीन काम करने वाले कर्मचारियों पर भी लगातार अवैध वसूली के लिए दबाव बना रहे हैं।
SIT जांच और निलंबन की मांग
डॉ. गोविंद सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इस मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए किसी वरिष्ठ आईपीएस या प्रशासनिक अधिकारी की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए। इसके साथ ही, जांच पूरी होने तक संबंधित SDOP को तत्काल प्रभाव से प्रशासनिक कार्रवाई के तहत पद से हटाकर निलंबित किया जाए। दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई करने की भी मांग की गई है।
