लगातार दर्द को न करें नज़रअंदाज़, एनकॉन्ड्रोमा की विशेषज्ञ जांच आवश्यक
एनकॉन्ड्रोमा, हड्डी के अंदर विकसित होने वाला एक बिनाइन ट्यूमर है, जो अधिकतर लक्षणरहित होता है। हालांकि, लगातार दर्द या सूजन को नज़रअंदाज़ करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यह दुर्लभ मामलों में कैंसर का रूप ले सकता है।

द क्लिफ न्यूज़ | 29 जुलाई 2026
लगातार बने रहने वाले हड्डी के दर्द या सूजन को कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए, भले ही वह बिनाइन (कैंसर-रहित) ट्यूमर के कारण हो। एनकॉन्ड्रोमा, हड्डी के अंदर विकसित होने वाला एक सामान्य बिनाइन कार्टिलेज ट्यूमर है, जो ज्यादातर मामलों में शुरुआती चरणों में लक्षणरहित होता है। हालांकि, कुछ परिस्थितियों में यह दर्द, फ्रैक्चर या दुर्लभ रूप से कैंसरयुक्त परिवर्तनों का कारण बन सकता है, जिसके लिए विशेषज्ञ जांच और समय पर उपचार अत्यंत महत्वपूर्ण है।
एनकॉन्ड्रोमा एक इंट्रा-मेडुलरी कार्टिलेज ट्यूमर है, जो हड्डी के मज्जा गुहा (बोन मैरो कैविटी) में मौजूद हाइलिन कार्टिलेज से उत्पन्न होता है। यह सबसे आम बिनाइन बोन ट्यूमर में से एक है और अक्सर अन्य कारणों से कराए गए एक्स-रे में इसका पता चलता है। अच्छी बात यह है कि यह ट्यूमर धीरे-धीरे बढ़ता है और लंबे समय तक हड्डी को गंभीर नुकसान नहीं पहुंचाता।
एनकॉन्ड्रोमा के प्रकार और स्थान
यह ट्यूमर शरीर की विभिन्न हड्डियों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन हाथों की छोटी हड्डियों, जैसे फैलेन्जेस और मेटाकार्पल्स में इसका पाया जाना सबसे आम है। इसके अलावा, यह ह्यूमरस, फीमर और टिबिया जैसी लंबी हड्डियों में भी विकसित हो सकता है। एनकॉन्ड्रोमा के मुख्य प्रकारों में सोलिटरी एनकॉन्ड्रोमा (एकल ट्यूमर), मल्टीपल एनकॉन्ड्रोमा (एनकॉन्ड्रोमैटोसिस), ओलिएर बीमारी और मैफुची सिंड्रोम शामिल हैं। सोलिटरी एनकॉन्ड्रोमा सबसे सामान्य है। वहीं, ओलिएर बीमारी और मैफुची सिंड्रोम जैसी स्थितियों में ट्यूमर के कैंसरयुक्त (मैलिग्नेंट) बदलाव का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक होता है, जो विशेष चिंता का विषय है।
लक्षण और चेतावनी संकेत
अधिकांश एनकॉन्ड्रोमा बिना किसी लक्षण के होते हैं और मरीजों को इसका पता किसी अन्य कारण से हुई जांच के दौरान चलता है। लेकिन, कुछ मामलों में प्रभावित हड्डी में दर्द, सूजन या एक गांठ जैसी उभार महसूस हो सकती है। जब हड्डी ट्यूमर के कारण कमजोर हो जाती है, तो पैथोलॉजिकल फ्रैक्चर (सामान्य चोट के बिना हड्डी का टूटना) हो सकता है, खासकर हाथों की छोटी हड्डियों में। यदि ट्यूमर के कारण लगातार दर्द हो, उसका आकार तेजी से बढ़ रहा हो, या वह आसपास के कोमल ऊतकों पर दबाव डाल रहा हो, तो यह संभावित मैलिग्नेंट (कैंसरयुक्त) परिवर्तन का संकेत हो सकता है। ऐसे किसी भी बदलाव को गंभीरता से लेना चाहिए।
निदान की प्रक्रिया
एनकॉन्ड्रोमा के निदान के लिए सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम प्लेन एक्स-रे है। एक्स-रे में हड्डी के अंदर एक लाइटिक घाव (हल्का या पारदर्शी क्षेत्र) दिखाई देता है। कार्टिलेज के कैल्सीफिकेशन (कैल्शियम का जमाव) के कारण अक्सर इसमें "रिंग्स और आर्क्स" जैसा एक विशिष्ट पैटर्न देखने को मिलता है। यदि एक्स-रे से निदान स्पष्ट न हो या ट्यूमर के कैंसर में बदलने की आशंका हो, तो मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI) जैसी उन्नत जांचें उपयोगी साबित होती हैं। कंप्यूटेड टोमोग्राफी (CT) स्कैन हड्डी के बाहरी आवरण (कॉर्टिकल संरचना) और कैल्सीफिकेशन की स्थिति का अधिक विस्तृत मूल्यांकन करने में मदद करता है। कुछ संदिग्ध मामलों में, विशेषकर जब इमेजिंग में असामान्य निष्कर्ष मिले, तो ऊतक का नमूना लेने के लिए बायोप्सी की आवश्यकता पड़ सकती है।
सर्जिकल प्रबंधन का औचित्य
यह समझना महत्वपूर्ण है कि हर एनकॉन्ड्रोमा का ऑपरेशन आवश्यक नहीं होता। यदि ट्यूमर बिना किसी लक्षण के है और हड्डी को नुकसान नहीं पहुंचा रहा है, तो डॉक्टर इसे केवल नियमित निगरानी में रख सकते हैं। हालांकि, सर्जरी की सलाह उन मामलों में दी जाती है जहां ट्यूमर के कारण लगातार दर्द हो, पैथोलॉजिकल फ्रैक्चर हुआ हो, ट्यूमर का आकार असामान्य रूप से बढ़ रहा हो, हड्डी का बाहरी आवरण (कॉर्टिकल हिस्सा) कमजोर हो रहा हो, या लो-ग्रेड कॉन्ड्रोसारकोमा (कैंसर का प्रारंभिक रूप) का संदेह हो। बार-बार होने वाले ट्यूमर के मामलों में भी सर्जिकल हस्तक्षेप की आवश्यकता हो सकती है।
उपचार और पुनर्रचना
एनकॉन्ड्रोमा के लिए सबसे सामान्य सर्जिकल उपचार इंट्रा-लेशनल क्यूरेटेज है। इस प्रक्रिया में, सर्जन हड्डी के अंदर मौजूद ट्यूमर को सावधानीपूर्वक खुरच कर निकालते हैं। ट्यूमर कोशिकाओं के अवशेषों को पूरी तरह से हटाने के लिए अक्सर हाई-स्पीड बर्र (एक प्रकार का सर्जिकल ड्रिल) का उपयोग किया जाता है। क्यूरेटेज के बाद हड्डी में जो खाली जगह बन जाती है, उसे भरने के लिए विभिन्न तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें मरीज की अपनी हड्डी (ऑटोलॉगस कैंसलस बोन ग्राफ्ट), दाता की हड्डी (एलोग्राफ्ट बोन चिप्स), या सिंथेटिक सामग्री जैसे कैल्शियम फॉस्फेट और कैल्शियम सल्फेट सीमेंट का उपयोग शामिल है। यदि हड्डी फ्रैक्चर के कारण बहुत कमजोर हो गई हो, तो उपचार के दौरान या बाद में फ्रैक्चर को स्थिर करने के लिए प्लेट, स्क्रू या अन्य आंतरिक फिक्सेशन उपकरणों की आवश्यकता हो सकती है। हाथों में पाए जाने वाले एनकॉन्ड्रोमा के लिए क्यूरेटेज और बोन ग्राफ्टिंग से आमतौर पर उत्कृष्ट परिणाम मिलते हैं। फ्रैक्चर की स्थिति में, उपचार की अवधि मरीज की स्थिति और हड्डी की मजबूती पर निर्भर करती है।
सर्जरी के बाद की निगरानी
सर्जरी के बाद नियमित फॉलो-अप अत्यंत आवश्यक है। शुरुआती दौर में, आमतौर पर हर 6 से 12 महीने में एक्स-रे के माध्यम से निगरानी की जाती है। इसका उद्देश्य ट्यूमर के दोबारा बनने (रिकरेंस) या किसी असामान्य बदलाव का समय पर पता लगाना होता है। सोलिटरी एनकॉन्ड्रोमा के मामलों में, क्यूरेटेज के बाद परिणाम सामान्यतः बहुत अच्छे होते हैं और ट्यूमर के दोबारा होने की संभावना काफी कम होती है। ऐसे मामलों में मैलिग्नेंट परिवर्तन का खतरा एक प्रतिशत से भी कम होता है। हालांकि, ओलिएर बीमारी और मैफुची सिंड्रोम जैसी जटिलताओं में मैलिग्नेंसी का जोखिम अधिक होता है, इसलिए ऐसे मरीजों को जीवन भर लंबी अवधि की निगरानी की आवश्यकता हो सकती है।
संक्षेप में, एनकॉन्ड्रोमा एक आम और अधिकतर हानिरहित हड्डी का ट्यूमर है। परंतु, लगातार दर्द, ट्यूमर के आकार में तेजी से वृद्धि, हड्डी के बाहरी आवरण को नुकसान या कोमल ऊतकों में फैलाव जैसे किसी भी चेतावनी संकेत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षणों को लो-ग्रेड कॉन्ड्रोसारकोमा की संभावना को ध्यान में रखते हुए गंभीरता से लेना चाहिए और विशेषज्ञ जांच व उचित उपचार की व्यवस्था करनी चाहिए। समय पर निदान और प्रभावी सर्जिकल प्रबंधन से मरीज सामान्य जीवन में लौट सकते हैं और उपचार के सकारात्मक परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।
