कूनो में चीता शावकों की जान बचाने के लिए नया निगरानी तंत्र
कूनो नेशनल पार्क ने चीता शावकों की उत्तरजीविता दर बढ़ाने हेतु एक अभूतपूर्व निगरानी प्रणाली विकसित की है, जो अफ्रीकी मॉडल से भिन्न है।

द क्लिफ न्यूज़ | श्योपुर | 7 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीता संरक्षण के प्रयासों को एक बड़ी सफलता मिली है। पार्क अधिकारियों ने चीता शावकों की उत्तरजीविता दर को प्रभावी ढंग से बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष निगरानी प्रणाली विकसित की है। यह नवीन प्रोटोकॉल पारंपरिक अफ्रीकी पद्धतियों से एक महत्वपूर्ण प्रस्थान है, जहां अक्सर चीता के डेन (आवास) को मानवीय हस्तक्षेप से दूर रखा जाता है, जिसके कारण दुर्भाग्यवश कई शावकों की मृत्यु हो जाती है।
कूनो का यह नया मॉडल गहन निगरानी और मां को परेशान न करने की दूरी के बीच एक नाजुक संतुलन स्थापित करता है। प्रोजेक्ट चीता के निदेशक, उत्तम कुमार शर्मा के अनुसार, इस विशेष तकनीक को तब विकसित करने की आवश्यकता महसूस हुई जब कूनो में जन्मे पहले चार शावकों में से तीन की अत्यधिक गर्मी के कारण मृत्यु हो गई थी। यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत थी कि मौजूदा पद्धतियां पर्याप्त नहीं हैं और शावकों की सुरक्षा के लिए एक अधिक प्रभावी दृष्टिकोण की तत्काल आवश्यकता है।
विशेष निगरानी तंत्र की आवश्यकता
पारंपरिक रूप से, वन्यजीव विशेषज्ञों और जीवविज्ञानियों का यह मानना रहा है कि सक्रिय डेन स्थलों के पास मानवीय उपस्थिति से मां चीता के व्यवहार में बदलाव आ सकता है। ऐसी आशंकाएं थीं कि मां अपने शावकों को स्थानांतरित कर सकती है, या गंभीर परिस्थितियों में उन्हें छोड़ भी सकती है। हालांकि, कूनो ने इस जोखिम को उठाने का निर्णय लिया और यह परीक्षण करने का प्रयास किया कि क्या मां को परेशान किए बिना और शावकों की सुरक्षा से समझौता किए बिना डेन की बारीकी से निगरानी संभव है। यह प्रयोग पूरी तरह से सफल रहा है और अब कूनो इस अनुभव के आधार पर एक मैनुअल भी जारी करने जा रहा है, ताकि अन्य संरक्षण स्थलों को भी इसका लाभ मिल सके।
आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी
कूनो नेशनल पार्क में नवजात शावकों की सुरक्षित निगरानी के लिए 100 से अधिक वन रक्षकों और ट्रैकर्स की एक समर्पित टीम दिन-रात कार्य कर रही है। शावकों की सुरक्षा और मानवीय हस्तक्षेप को कम करने के लिए, 24/7 सीसीटीवी कैमरे, मां चीता के गले में लगे सैटेलाइट कॉलर से प्राप्त रियल-टाइम डेटा और ड्रोन निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों का भरपूर उपयोग किया जा रहा है। चीता मां आमतौर पर जन्म के बाद तीन से चार दिन तक शावकों के साथ डेन में रहती है और फिर भोजन की तलाश में दिन में बाहर निकलती है। मां के शिकार के लिए बाहर जाने के समय का उपयोग करते हुए, विशेष निगरानी टीम सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए शावकों के स्वास्थ्य की गहन जांच करती है। यह तकनीक वन्यजीव टीम को बिना किसी प्रत्यक्ष मानवीय हस्तक्षेप के बच्चों की शारीरिक स्थिति का आकलन करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है।
सफलता के आंकड़े और वर्तमान स्थिति
इस नवीन और सफल निगरानी प्रणाली के परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगे हैं। कूनो नेशनल पार्क में चीता शावक उत्तरजीविता दर में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है, जो अब 61 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि प्राकृतिक अफ्रीकी आवासों में, औसतन केवल 10 से 40 प्रतिशत चीता शावक ही वयस्कता तक पहुँच पाते हैं। वर्तमान में, कूनो नेशनल पार्क में कुल 49 चीते मौजूद हैं। इनमें 15 वयस्क नर, 15 वयस्क मादा और 19 नवजात शावक शामिल हैं। यह दर्शाता है कि नई निगरानी प्रणाली न केवल शावकों के अस्तित्व को सुनिश्चित करने में प्रभावी है, बल्कि चीता आबादी के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। इसके अतिरिक्त, डेढ़ साल पहले तीन चीतों (दो नर और एक मादा) को मध्य प्रदेश के ही गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित किया गया था, जो संरक्षण के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।
यह प्रणाली साबित करती है कि संवेदनशील वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण में, पारंपरिक ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक प्रौद्योगिकी का सामंजस्यपूर्ण उपयोग कैसे अभूतपूर्व परिणाम दे सकता है।
