कृमि मुक्ति: सीएमओ ने मॉप-अप राउंड का निरीक्षण कर कवरेज बढ़ाने पर दिया जोर
बलरामपुर के सीएमओ ने राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के मॉप-अप राउंड का निरीक्षण किया। उन्होंने छूटे बच्चों को दवा पिलाने और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर बल दिया।

द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 14 अगस्त 2026
बलरामपुर में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान के तहत आयोजित मॉप-अप राउंड का मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी ने निरीक्षण किया। विकासखंड गैंसड़ी के प्राथमिक विद्यालय चौहत्तर खुर्द में पहुंचे डॉ. रस्तोगी ने अभियान की प्रगति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोई भी पात्र बच्चा कृमिनाशक दवा से वंचित न रहे।
निरीक्षण के दौरान, सीएमओ ने विशेष रूप से छूटे हुए बच्चों को मॉप-अप राउंड के माध्यम से दवा खिलाने की प्रक्रिया को सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य के लिए कृमि संक्रमण से बचाव अत्यंत आवश्यक है और इसके लिए नियमित रूप से कृमिनाशक दवा का सेवन महत्वपूर्ण है। यह अभियान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का एक अहम हिस्सा है, जिसका लक्ष्य देश भर में बच्चों को कृमि संक्रमण से मुक्त करना है। कृमि संक्रमण न केवल बच्चों के शारीरिक विकास को बाधित करता है, बल्कि उनकी बौद्धिक क्षमता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसीलिए, इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
स्वच्छता और जागरूकता की महत्ता
डॉ. रस्तोगी ने बच्चों को कृमि संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता, हाथों की नियमित सफाई, स्वच्छ पेयजल का उपभोग और साफ-सुथरे भोजन को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को अभियान को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। साथ ही, अभिभावकों और बच्चों के बीच कृमि मुक्ति अभियान के महत्व और लाभों के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल दवा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके साथ-साथ स्वच्छ्ता की आदतों को अपनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों को कृमि संक्रमण के दुष्प्रभावों से बचाना और उनके समग्र स्वास्थ्य व विकास को सुनिश्चित करना है। कृमि संक्रमण से बच्चों में एनीमिया, कुपोषण और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जो उनके सीखने की क्षमता और स्कूल में उपस्थिति को भी प्रभावित करती हैं। इसलिए, इन दवाइयों को हर छह महीने में एक बार देना एक निवारक उपाय के रूप में कार्य करता है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे जमीनी स्तर पर पूरी सक्रियता से कार्य करें और यह सुनिश्चित करें कि निर्धारित लक्ष्य प्राप्त हो सके। मॉप-अप राउंड उन बच्चों पर विशेष ध्यान केंद्रित करता है जो राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर दवा लेने से चूक गए थे, ताकि कोई भी बच्चा दवा से अछूता न रहे। इस अवसर पर विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
