कोसमी में आदिवासियों के मकान तोड़े जाने पर सीएम को सौंपा ज्ञापन
सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकानों और फसलों को नुकसान पहुंचाने के मामले में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर हस्तक्षेप की मांग की।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 16 अक्टूबर 2026
सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के आवासों और फसलों को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाए जाने का संवेदनशील मामला अब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुँच गया है। गुरुवार देर शाम, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री निवास पर मुख्यमंत्री यादव से मुलाकात की। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य वन विभाग की कथित कार्रवाई से प्रभावित आदिवासी परिवारों की व्यथा को मुख्यमंत्री के समक्ष रखना और इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाना था।
मुख्यमंत्री निवास पर हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी उपस्थित रहे। चर्चा का मुख्य केंद्रबिंदु कोसमी गांव में वन विभाग द्वारा की गई कार्रवाई, जिसके परिणामस्वरूप आदिवासी परिवारों के घरों को तोड़े जाने और उनकी खड़ी फसलों को नष्ट किए जाने का आरोप है, रहा। शिवराज सिंह चौहान ने इस कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे प्रभावित परिवारों के प्रति अमानवीय और अन्यायपूर्ण बताया। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी निष्पक्ष और विस्तृत जांच कराए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
वन विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल, जांच का आश्वासन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी भी अधिकारी को दोषी पाया जाता है, तो उनके विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के इस आश्वासन से प्रभावित आदिवासी परिवारों में प्रशासनिक स्तर पर न्याय मिलने की आशा जगी है। हालांकि, जांच की कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की गई है, न ही जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान स्पष्ट की गई है, और न ही आगामी कार्रवाई के संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक हुई है।
कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकानों को तोड़े जाने की घटना सामने आने के बाद से ही यह मुद्दा स्थानीय तथा राज्य-स्तरीय चर्चाओं का विषय बना हुआ है। प्रभावित परिवारों के समक्ष आवास और आजीविका के गंभीर संकट उत्पन्न होने की बात कही जा रही है। मकानों के साथ-साथ फसलों को भी नुकसान पहुंचाए जाने के आरोपों ने इस मामले की संवेदनशीलता को और बढ़ा दिया है। इन परिस्थितियों में, प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई के औचित्य, उसके आधार तथा प्रभावित परिवारों को प्रदान की जाने वाली राहत और पुनर्वास योजनाओं पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
शिवराज सिंह चौहान की पूर्व में भी जताई थी नाराजगी
यह पहला अवसर नहीं है जब शिवराज सिंह चौहान ने इस मुद्दे पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की हो। इससे पहले भी, जब यह मामला पहली बार प्रकाश में आया था, तब उन्होंने गांव में हुई कार्रवाई पर गहरी नाराजगी जताई थी। उन्होंने इसे अमानवीय और अन्याय की पराकाष्ठा बताते हुए प्रभावित आदिवासी परिवारों के साथ मिलकर धरना भी दिया था। अब मुख्यमंत्री से मुलाकात के माध्यम से, उन्होंने इस संवेदनशील मामले को सीधे सरकार के सर्वोच्च नेतृत्व के समक्ष लाकर इसकी गंभीरता को रेखांकित किया है। उनके हस्तक्षेप के पश्चात्, इस मामले में होने वाली जांच और संभावित प्रशासनिक कार्रवाइयों पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।
जांच का दायरा और प्रभावितों को राहत की उम्मीद
इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि आखिर वन विभाग ने किन विशिष्ट परिस्थितियों और किन कानूनी या प्रशासनिक आधारों पर मकानों को तोड़ने तथा फसलों को नष्ट करने जैसी कार्रवाई को अंजाम दिया। आगामी जांच में इस कार्रवाई की वैधानिकता, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल, और सबसे बढ़कर, प्रभावित आदिवासी परिवारों की वर्तमान स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया जाना आवश्यक होगा। इसके साथ ही, जिन परिवारों के आवास या फसलें इस कार्रवाई से प्रभावित हुई हैं, उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन द्वारा क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं, यह भी अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।
मुख्यमंत्री द्वारा निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई का दिया गया आश्वासन इस मामले में एक निर्णायक अगला कदम माना जा रहा है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के निष्कर्ष क्या निकलते हैं और सरकार इन निष्कर्षों के आधार पर क्या कार्रवाई करती है। इन्हीं सरकारी कार्रवाइयों से यह स्पष्ट हो पाएगा कि कोसमी गांव के प्रभावित आदिवासी परिवारों को किस प्रकार का न्याय और राहत प्राप्त होती है।
12 आदिवासी परिवारों के थे मकान
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोसमी गांव में इस कथित कार्रवाई के दौरान कुल 12 आदिवासी परिवारों के मकानों को तोड़ा गया था। वन विभाग की ओर से इस पूरी घटना को वनभूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने की एक सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत किया गया था। वहीं, दूसरी ओर, प्रभावित आदिवासी परिवारों ने प्रशासन पर अपने घरों को उजाड़ने और उनकी मेहनत की फसलों को बर्बाद करने का गंभीर आरोप लगाया है।
