कोलकाता: दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़, 15 से अधिक घायल
कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में सप्तमी की शाम भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। इस घटना में 15 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

द क्लिफ न्यूज़ | कोलकाता | 17 अक्टूबर 2026
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान एक बड़ी दुर्घटना की खबर सामने आई है। शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 की शाम को चोरबागान स्थित सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में सप्तमी के अवसर पर दर्शन के लिए उमड़ी भारी भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस अफरा-तफरी में 15 से अधिक श्रद्धालु घायल हुए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सप्तमी की शाम देवी दुर्गा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त पंडाल पहुंचे थे। शाम के समय भीड़ इतनी बढ़ गई कि लोगों का चलना-फिरना मुश्किल हो गया। इसी दौरान, भीड़ के अत्यधिक दबाव के कारण धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जिससे कई लोग गिर पड़े और भगदड़ का माहौल बन गया। कुछ अनौपचारिक खबरों में अचानक आई बारिश या पंडाल के किसी हिस्से के कमजोर होने की आशंका भी जताई गई है, हालांकि इन कारणों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
घायलों को तत्काल उपचार के लिए ले जाया गया
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय कर दिया गया। घायलों को तुरंत उपचार के लिए कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनका इलाज शुरू कर दिया है। प्रारंभिक स्वास्थ्य बुलेटिनों में एक घायल व्यक्ति की स्थिति गंभीर बताई गई है, लेकिन सभी घायलों की पूरी सूची, उनकी पहचान और स्वास्थ्य की अंतिम स्थिति के बारे में अधिकृत जानकारी की प्रतीक्षा है।
प्रशासन ने तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रण में करने के प्रयास शुरू किए। भीड़ को संभालने और आगे किसी भी तरह की अनहोनी को रोकने के लिए पंडाल में नए प्रवेशकों को रोक दिया गया। राहत और बचाव कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया ताकि सभी प्रभावित श्रद्धालुओं को सुरक्षित सहायता मिल सके।
सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर उठे सवाल
चोरबागान का सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल कोलकाता के प्रमुख और चर्चित पूजा स्थलों में से एक है। सप्तमी के दिन यहां दर्शनार्थियों की संख्या हर साल लाखों में होती है। ऐसे में, एक प्रमुख पंडाल में भीड़ का अनियंत्रित होना आयोजकों की तैयारी और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है।
यह घटना एक बार फिर दुर्गा पूजा जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षित निकास और प्रवेश द्वारों की व्यवस्था, प्राथमिक उपचार की उपलब्धता और अस्थायी ढांचे की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती है। आयोजकों और स्थानीय प्रशासन के लिए यह आवश्यक है कि वे मेले की क्षमता के अनुसार भीड़ को नियंत्रित करें, रास्तों को बाधा-मुक्त रखें और अप्रत्याशित परिस्थितियों, जैसे कि खराब मौसम, के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतें।
जांच के बाद ही सामने आएंगे वास्तविक कारण
फिलहाल, घटना के सटीक कारणों और घायलों की अंतिम संख्या की पुष्टि के लिए प्रशासन द्वारा जांच की जा रही है। प्रारंभिक रिपोर्टें भीड़ के दबाव की ओर इशारा कर रही हैं, लेकिन पंडाल के ढांचे की स्थिति या अन्य किसी बाहरी कारक की भूमिका की स्वतंत्र जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। प्रशासन ने जनता से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक बयानों पर भरोसा करने की अपील की है।
