कॉकरोच पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके को मिली जमानत
दिल्ली में 'लहरा दो तिरंगा' मार्च से पहले गिरफ्तार कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत से जमानत मिल...

द क्लिफ न्यूज़ | दिल्ली | 17 अक्टूबर 2026
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और राजनीतिक कार्यकर्ता अभिजीत दीपके को 17 अक्टूबर 2026 को दिल्ली की एक विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत से जमानत मिल गई है। उन्हें शांति भंग होने की आशंका के चलते भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत एहतियाती तौर पर गिरफ्तार किया गया था।
दिल्ली पुलिस ने दीपके को 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में 'लहरा दो तिरंगा' अभियान के तहत प्रस्तावित मार्च से पहले हिरासत में लिया था। इस मार्च का मुख्य उद्देश्य मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना था। पुलिस का कहना है कि दीपके को प्रदर्शन स्थल पर न आने की हिदायत दी गई थी, लेकिन वे वहां पहुंचे और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई गई।
गिरफ्तारी और जमानत की प्रक्रिया
विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेशी के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। दीपके के कानूनी प्रतिनिधि रत्ना सिंह ने गिरफ्तारी की वैधता पर सवाल उठाते हुए अदालत से उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। उन्होंने हिरासत के दौरान वकीलों को दीपके से मिलने में आ रही कठिनाइयों और उनकी स्थिति के बारे में जानकारी न दिए जाने का आरोप भी लगाया। हालांकि, पुलिस का पक्ष इन आरोपों से भिन्न था।
BNSS की धारा 126 शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बांड की प्रक्रिया से संबंधित है, जबकि धारा 170 पुलिस को कुछ परिस्थितियों में संभावित संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए एहतियाती गिरफ्तारी का अधिकार देती है। इन धाराओं के तहत की गई कार्रवाई का उद्देश्य संभावित अशांति को रोकना होता है, लेकिन इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन भी महत्वपूर्ण है।
पृष्ठभूमि में चुनावी विवाद
यह घटनाक्रम दिल्ली में चुनावी प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे राजनीतिक विवादों के बीच हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी ने निर्वाचन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग की थी। इसी मांग के समर्थन में पार्टी ने तिरंगा मार्च आयोजित करने की योजना बनाई थी। वहीं, पुलिस ने अपनी कार्रवाई को सार्वजनिक जमावड़े पर लगे प्रतिबंधों और कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने की आवश्यकता का आधार बताया।
