कोहड़ौरा सहकारी समिति में यूरिया किल्लत, टंकी पर बायोमेट्रिक से किसान परेशान
बलरामपुर के कोहड़ौरा सहकारी समिति में यूरिया की भारी कमी है। किसानों को ऊंची पानी की टंकी पर बायोमेट्रिक कराने को मजबूर किया जा रहा है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ा है।

द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 31 जुलाई 2026
बलरामपुर जिले के विकासखंड हरैया सतघरवा के कोहड़ौरा सहकारी समिति में यूरिया की गंभीर किल्लत को लेकर किसानों में व्यापक रोष है। किसानों ने समिति के वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं, खासकर यूरिया प्राप्त करने के लिए अपनाई जा रही बायोमेट्रिक (अंगूठा) सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर। आरोप है कि यूरिया लेने के लिए किसानों को लगभग 100 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़कर सत्यापन कराना पड़ रहा है, जो किसी भी क्षण गंभीर दुर्घटना को न्योता दे सकता है।
किसानों के अनुसार, यह अव्यवहारिक व्यवस्था विशेष रूप से बुजुर्गों और शारीरिक रूप से कमजोर लोगों के लिए अत्यधिक पीड़ादायक है। बिना बायोमेट्रिक सत्यापन के यूरिया उपलब्ध न होने की स्थिति में, मजबूरीवश कई किसान अपनी जान जोखिम में डालने को विवश हैं। यह स्थिति सरकार द्वारा निर्धारित यूरिया की खुदरा मूल्य ₹266.50 प्रति बोरी से भी इतर है, क्योंकि किसानों का दावा है कि समिति पर ₹280 प्रति बोरी की दर से भुगतान वसूला जा रहा है। यह न केवल किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है, बल्कि सरकारी मूल्य is का भी उल्लंघन है।
समय पर खाद न मिलने से खरीफ फसलों पर मंडराया संकट
ग्रामीणों ने बताया कि कई किसानों को 10 जुलाई को ही यूरिया उपलब्ध होने का संदेश मोबाइल पर प्राप्त हुआ था, परंतु 29 जुलाई तक भी उन्हें यह आवश्यक खाद नहीं मिल सकी। समय पर यूरिया न मिलने के कारण धान और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई और उनकी देखभाल पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे किसानों की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।
कुछ किसानों का यह भी आरोप है कि जो किसान ऊंची टंकी पर चढ़ने में शारीरिक रूप से असमर्थ हैं, उन्हें खाद देने से साफ मना कर दिया जाता है। इस व्यवस्था से छोटे किसानों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते यूरिया उपलब्ध नहीं कराया गया तो खरीफ फसलों की उत्पादकता बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
जांच और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
किसानों ने जिला प्रशासन, सहकारिता विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए एक सुरक्षित और सुगम व्यवस्था स्थापित करना, सभी पात्र किसानों को निर्धारित सरकारी मूल्य पर यूरिया का समय पर वितरण सुनिश्चित करना और यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करना शामिल है।
इस संवेदनशील मामले पर सहकारी समिति या संबंधित सरकारी विभाग का कोई भी आधिकारिक पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हुआ है। विभाग का जवाब मिलने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
