खाद्य तेल बाजार में मिश्रित रुख: सोयाबीन में नरमी, मूंगफली मजबूत, त्योहारी मांग ने बढ़ाई हलचल
देश के खाद्य तेल बाजार में सोयाबीन की कीमतों में गिरावट और मूंगफली तेल की मजबूती के बीच त्योहारी मांग से हलचल बढ़ी है। सोयाबीन के भाव पर आवक का दबाव है, जबकि मूंगफली की सीमित उपलब्धता उसके दाम बढ़ा रही है।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 25 अगस्त 2026
देश के प्रमुख तेल-तिलहन बाजारों में इन दिनों खाद्य तेलों की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। जहां सोयाबीन तिलहन के भाव में नरमी का दबाव बना हुआ है, वहीं सीमित उपलब्धता और मजबूत मांग के कारण मूंगफली तेल-तिलहन के भाव मजबूत बने हुए हैं। आने वाले त्योहारी सीजन की बढ़ती मांग के बीच सोयाबीन तेल, पामोलीन और बिनौला तेल में भी तेजी का रुख दिखाई दे रहा है।
मंत्रालय के मूल्य निगरानी प्रणाली (Price Monitoring System) के अनुसार, 12 अगस्त 2026 को सोयाबीन तेल का खुदरा मूल्य ₹164.5 प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया था। दूसरी ओर, 24 अगस्त 2026 को मूंगफली तेल का खुदरा मूल्य ₹207.91 प्रति किलोग्राम था, जो इसकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
सोयाबीन तिलहन पर दबाव
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सोयाबीन तिलहन पर दबाव का मुख्य कारण संयंत्रों द्वारा खरीद मूल्य घटाना है। लागत से नीचे भाव पर बिकवाली की स्थिति बनने के कारण किसान और व्यापारी दबाव में हैं। थोक बाजार में सोयाबीन दाना का भाव घटकर करीब 6,775 से 6,825 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गया है। सोयाबीन लूज में भी गिरावट का रुख जारी है।
बाजार पर्यवेक्षकों का कहना है कि सोयाबीन की आवक, घरेलू खरीदारी और प्रसंस्करण इकाइयों की मांग के बीच संतुलन न बनने के कारण फिलहाल इसमें मजबूती लौटने की उम्मीद कम है। इस स्थिति का असर इससे जुड़े तेल बाजार पर भी पड़ सकता है, हालांकि आगामी दिनों में मांग, आपूर्ति और त्योहारी खपत बाजार की दिशा तय करेगी।
मूंगफली तेल-तिलहन में बनी हुई मजबूती
इसके विपरीत, मूंगफली तेल-तिलहन बाजार में मजबूत स्थिति बनी हुई है। मूंगफली की सीमित उपलब्धता के बावजूद, ऊंचे भाव पर भी मांग बनी हुई है। यही वजह है कि मूंगफली तेल और तिलहन के भाव में गिरावट के बजाय मजबूती का रुख बना हुआ है। थोक बाजार में गुजरात मूंगफली का भाव करीब 17,000 रुपये प्रति क्विंटल तक बताया जा रहा है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, उपलब्धता में कमी और मांग में मजबूती के कारण मूंगफली बाजार पर फिलहाल दबाव कम है। मूंगफली तेल की कीमतों को भी तिलहन की सीमित उपलब्धता का सहारा मिल रहा है। यदि आगामी दिनों में मांग इसी स्तर पर बनी रहती है और आवक में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होती है, तो मूंगफली तेल के भाव में मजबूती बनी रह सकती है।
त्योहारी मांग से खाद्य तेलों की खपत में वृद्धि
त्योहारी सीजन नजदीक आने के साथ ही खाद्य तेलों की मांग में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जा रही है। घरों में उपयोग के साथ-साथ मिठाई, नमकीन और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में तेल की खपत बढ़ने से बाजार में मांग का दबाव मजबूत हुआ है। इस बढ़ती मांग का असर सोयाबीन तेल, पामोलीन और बिनौला तेल पर भी दिखाई दे रहा है। सीमित सप्लाई के बीच मांग बढ़ने से इन तेलों के भाव में तेजी का रुख बना हुआ है। थोक कारोबारियों का मानना है कि त्योहारी मांग आने वाले दिनों में खाद्य तेल बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनी रहेगी।
आपूर्ति और मांग का असंतुलन बाजार को प्रभावित कर रहा है
खाद्य तेल बाजार में फिलहाल सबसे बड़ा अंतर उपलब्धता और मांग के स्तर में दिखाई दे रहा है। जहां सोयाबीन तिलहन में खरीद मूल्य घटने से दबाव है, वहीं मूंगफली की सीमित उपलब्धता उसके भाव को मजबूती दे रही है। दूसरी ओर, त्योहारी मांग ने विभिन्न खाद्य तेलों की खपत बढ़ा दी है। बाजार की दिशा काफी हद तक आगामी आवक, घरेलू मांग और तेल मिलों की खरीदारी पर निर्भर करेगी। यदि सोयाबीन की आवक बढ़ती है, तो इसके भाव पर दबाव और बढ़ सकता है, जबकि मूंगफली की उपलब्धता में सुधार न होने पर इसके भाव मजबूत बने रह सकते हैं।
उपभोक्ताओं पर संभावित असर
खाद्य तेलों के इस मिश्रित रुख का असर खुदरा बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। जिन तेलों की थोक कीमतों में तेजी बनी हुई है, वहां आने वाले समय में खुदरा भाव बढ़ने की संभावना है। वहीं, सोयाबीन तिलहन में आई गिरावट का लाभ यदि प्रसंस्करण और वितरण स्तर तक पहुंचता है, तो सोयाबीन तेल के दामों में उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सकती है।
वर्तमान में, बाजार में सोयाबीन में मंदी और मूंगफली तेल में मजबूती का विरोधाभासी रुख बना हुआ है। त्योहारी मांग, उपलब्धता की स्थिति और आगामी फसल की नई आवक आने वाले दिनों में खाद्य तेल बाजार की अगली दिशा तय करेगी। भारत अपनी खाद्य तेल की आवश्यकता का लगभग 60% आयात करता है, जो वैश्विक बाजार के रुझानों और भू-राजनीतिक विकास से भी प्रभावित होता है।
