खाद्य मंत्री ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम को सामाजिक न्याय का माध्यम बताया
भोपाल में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने अधिनियम को सामाजिक न्याय का सशक्त माध्यम करार दिया।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 21 जुलाई 2026
मध्यप्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम को मात्र एक खाद्यान्न वितरण योजना से कहीं अधिक बताते हुए इसे सामाजिक न्याय का एक सशक्त माध्यम करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का संवैधानिक आधार प्रदान करता है। राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में राज्य खाद्य आयोग और केंद्रीय नीति आयोग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013: प्रगति, चुनौतियां और भविष्य की दिशा' विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री श्री राजपूत ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'गरीब कल्याण' के संकल्प और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में यह सुनिश्चित कर रही है कि राज्य का कोई भी पात्र परिवार खाद्यान्न के अधिकार से वंचित न रहे और भूखा न सोए।
मंत्री श्री राजपूत ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में किए गए व्यापक सुधारों पर प्रकाश डाला, जिनके परिणामस्वरूप व्यवस्था अधिक आधुनिक, पारदर्शी और जनकेंद्रित बनी है। उन्होंने बताया कि अब वितरण केंद्र से लेकर उपभोक्ता तक राशन की प्रत्येक जानकारी पंजीकृत मोबाइल नंबर पर संदेश के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार का उद्देश्य केवल राशन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र हितग्राही तक उसका अधिकार समय पर, पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ पहुंचाना है। इस दिशा में उचित मूल्य की दुकानों को अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है, जिसमें पीओएस मशीनों के माध्यम से प्रमाणीकरण, ई-केवाईसी, डिजिटल राशन वितरण, ऑनलाइन निगरानी तथा संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला की रियल-टाइम मॉनिटरिंग शामिल है। इन नवाचारों से खाद्यान्न वितरण प्रणाली में न केवल पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ी है, बल्कि अनियमितताओं पर भी प्रभावी अंकुश लगा है, जिससे हितग्राहियों का विश्वास मजबूत हुआ है।
विकसित मध्यप्रदेश के लिए खाद्य सुरक्षा की अनिवार्यता
मंत्री श्री राजपूत ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित मध्यप्रदेश का सपना तभी साकार हो सकता है, जब प्रत्येक नागरिक को भोजन, पोषण और सामाजिक सुरक्षा का अधिकार पूरी तरह सुनिश्चित हो। प्रदेश सरकार इसी लक्ष्य के साथ निरंतर कार्य कर रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी पात्र परिवार किसी भी परिस्थिति में अपने अधिकार से वंचित न रहे। उन्होंने राज्य के नवनिर्माण में समाज और सरकार की संयुक्त भागीदारी का आह्वान किया। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, जनसेवा से जुड़े संगठनों और नागरिकों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वे प्रत्येक पात्र हितग्राही तक उसका अधिकार पहुंचाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ। मंत्री ने विश्वास जताया कि सरकार और समाज के संयुक्त प्रयासों से ही भूख-मुक्त, कुपोषण-मुक्त, आत्मनिर्भर और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प साकार होगा।
खाद्य मंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में बुजुर्ग और विकलांग उपभोक्ता खाद्यान्न प्राप्त करने के लिए किसी भी व्यक्ति को नामित कर सकते हैं। नवाचार के तौर पर 'आपका राशन-आपके द्वार' योजना लागू की गई है, जिसके तहत राशन की गाड़ी सीधे गांवों में जाकर उपभोक्ताओं को खाद्यान्न उपलब्ध कराती है। यह योजना दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष रूप से सहायक सिद्ध हो रही है, जिससे उन्हें राशन के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती।
अन्य राज्यों की बेहतर योजनाओं का होगा अध्ययन
कार्यशाला के दौरान, मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने यह भी घोषणा की कि अधिकारियों की एक टीम अन्य राज्यों में संचालित बेहतर खाद्यान्न वितरण और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का अध्ययन करने के लिए भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह टीम अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर महत्वपूर्ण सुझावों पर विचार कर उन्हें मध्यप्रदेश में लागू करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कार्यशाला में प्राप्त महत्वपूर्ण सुझावों को अमल में लाने का आश्वासन भी दिया।
कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए मध्यप्रदेश राज्य खाद्य आयोग के सचिव श्री श्रीमन शुक्ला ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के कार्यान्वयन की प्रगति का आकलन करना, इसके समक्ष आने वाली चुनौतियों की पहचान करना और भविष्य की दिशा तय करना है।
इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेशचंद्र, मध्यप्रदेश राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष प्रो. वीरेंद्र कुमार मल्होत्रा, आयुक्त खाद्य भास्कर लक्षकार, डॉ. योगेश सूरी, नीति आयोग के प्रतिनिधि, देश भर के विभिन्न राज्यों से खाद्य आयोगों के अध्यक्ष व सदस्य सचिवों सहित खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। यह आयोजन खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, जहाँ विभिन्न राज्यों के अनुभवों और सुझावों का आदान-प्रदान किया गया।
