खड़गे का केंद्र पर हमला: छात्रों की आवाज दबाना लोकतंत्र पर प्रहार
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिसिया कार्रवाई और संसद में विपक्ष को बोलने का मौका न देने को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया है।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 29 जुलाई 2026
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर देश में लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों को लगातार आघात पहुंचाने तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने विशेष रूप से दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन पर हुई पुलिस कार्रवाई और संसद में विपक्ष को पर्याप्त अवसर न दिए जाने को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया।
खड़गे ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर लाठीचार्ज तथा आंसू गैस के इस्तेमाल को लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला उल्लंघन करार दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों, खासकर युवाओं और छात्रों को अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अधिकार है। लेकिन, सरकार विरोध की हर आवाज को बल प्रयोग से दबाने का प्रयास कर रही है, जो कि कतई स्वीकार्य नहीं है।
संसद में विपक्ष की भूमिका पर उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने संसद के मानसून सत्र के संचालन पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष को छात्रों, युवाओं और अन्य जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने का पर्याप्त अवसर नहीं दे रही है। खड़गे ने दावा किया कि विपक्षी सांसदों के माइक बंद कर दिए जाते हैं और महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से बचने का प्रयास किया जाता है, जिससे संसद की लोकतांत्रिक परंपराएं प्रभावित हो रही हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नीतियों के कारण पिछले कुछ वर्षों में लोकतांत्रिक संस्थाओं, संघीय ढांचे और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर लगातार दबाव बढ़ा है। खड़गे के अनुसार, लोकतंत्र की मूल भावना, जो कि संवाद, असहमति और जवाबदेही पर आधारित है, उसे कमजोर किया जा रहा है।
संवाद से समाधान की अपील
खड़गे ने केंद्र सरकार से अपेक्षा की है कि वह छात्रों से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता दिखाए। उन्होंने संसद में सभी दलों को अपनी बात रखने का समान अवसर देने तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और स्वतंत्रता बनाए रखने की अपील की। कांग्रेस अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में असहमति को दबाने के बजाय, संवाद के माध्यम से समाधान निकालना ही सबसे उचित और प्रभावी रास्ता है।
फिलहाल, मल्लिकार्जुन खड़गे के इन आरोपों पर केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस बीच, छात्रों के आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और संसद की कार्यवाही को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होता जा रहा है।
