केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग, देश भर में विरोध प्रदर्शन
देश के विभिन्न शहरों में युवाओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। आरोन, गुना में भी 'मूवमेंट अगेंस्ट अनएम्प्लॉयमेंट' के बैनर तले प्रदर्शन हुआ।

द क्लिफ न्यूज़ | 21 जुलाई 2026
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शनों की लहर तेज हो गई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शनों की गूंज अब मध्य प्रदेश के आरोन, गुना तक सुनाई दे रही है। आरोन में 'मूवमेंट अगेंस्ट अनएम्प्लॉयमेंट' के बैनर तले युवाओं ने भारतीय स्टेट बैंक के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर केंद्रीय मंत्री से इस्तीफे की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने जोर देकर कहा कि युवाओं के रोजगार और शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों का शीघ्र समाधान होना चाहिए। उनका मानना है कि इन मुद्दों पर केंद्रीय मंत्री की निष्क्रियता अस्वीकार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे। यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जो देश भर में छात्रों और युवाओं के बीच बढ़ते असंतोष को दर्शाता है।
विभिन्न शहरों में विरोध की लहर
यह केवल आरोन तक सीमित नहीं है; देशभर के कई शहरों में ऐसे ही प्रदर्शन देखे जा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, पुणे और नासिक जैसे स्थानों पर भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन हुए हैं। इन विरोधों का मुख्य कारण कथित तौर पर नीट (NEET) परीक्षा में अनियमितताएं, पेपर लीक के आरोप और नीट परीक्षार्थियों द्वारा उठाई गई चिंताएं हैं। प्रदर्शनकारी इन गंभीर मुद्दों पर धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आगे की राह
इस बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने 'कॉक्रेच जनता पार्टी (CJP)' के एक प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि वह उनके मांगों पर, जिसमें प्रधान का इस्तीफा भी शामिल है, आंतरिक रूप से चर्चा करेंगे। पूर्व ओडिशा मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। इन प्रतिक्रियाओं से यह स्पष्ट है कि यह मुद्दा अब राजनीतिक गलियारों में भी गरमा गया है।
फिलहाल, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांगें लगातार जोर पकड़ रही हैं।
