केंद्रीय जेल बड़वानी का निरीक्षण: बंदियों के सुधार और पुनर्वास पर जोर
जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर ने केंद्रीय जेल बड़वानी का निरीक्षण कर सुरक्षा, पुनर्वास, शिक्षा और कौशल विकास की समीक्षा की। "जेलवाणी" और नवसज्जित विद्यालय का शुभारंभ कर बंदियों के सर्वांगीण विकास पर बल दिया।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 9 अगस्त 2026
मध्यप्रदेश की जेलों को सुरक्षित, संवेदनशील और सुधारात्मक संस्थानों के रूप में विकसित करने की दिशा में जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस क्रम में, जेल महानिदेशक डॉ. वरुण कपूर ने केंद्रीय जेल बड़वानी का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जेल की सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों के पुनर्वास, शिक्षा, कौशल विकास और विभिन्न कल्याणकारी गतिविधियों की गहन समीक्षा की। डॉ. कपूर ने जेल प्रशासन द्वारा किए जा रहे सुधारात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए बंदियों के सर्वांगीण विकास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए नवाचारों को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान, डॉ. कपूर ने जेल की सुरक्षा प्रणाली, बैरकों, पाकशाला, भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने केंद्रीय जेल में संचालित विभिन्न जेल उद्योगों की कार्यप्रणाली, बंदियों की भागीदारी, कौशल विकास और उत्पादन गतिविधियों की भी समीक्षा की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जेल उद्योग बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके सफल पुनर्वास का एक प्रभावी माध्यम हैं।
महिला बंदियों और बच्चों के लिए मानवीय पहल
निरीक्षण के दौरान डॉ. कपूर ने महिला वार्ड का भी भ्रमण किया। उन्होंने महिला बंदियों से आत्मीयता से संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना और उनके निराकरण के लिए आवश्यक निर्देश दिए। इस अवसर पर, उन्होंने महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों को उपहार भी प्रदान किए। यह पहल विभाग की मानवीय और संवेदनशील कार्यशैली को दर्शाती है, जहाँ केवल बंदियों ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों के कल्याण का भी ध्यान रखा जा रहा है।
'जेलवाणी' और शैक्षणिक सुधारों का शुभारंभ
केंद्रीय जेल बड़वानी में स्थापित 'जेलवाणी' का शुभारंभ करते हुए, डॉ. कपूर ने स्वयं इसका संचालन कर इसकी कार्यप्रणाली को परखा। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि 'जेलवाणी' बंदियों को प्रेरणादायी विचार, संगीत और श्रवण-गायन जैसी सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच बनेगी। इसके माध्यम से बंदी मानसिक रूप से सकारात्मक रहेंगे और भावनात्मक रूप से अपने परिवार व समाज से जुड़ाव महसूस कर पाएंगे।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने नवसज्जित विद्यालय और पुस्तकालय का भी शुभारंभ किया, जहाँ उन्होंने उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं का जायजा लिया। बंदियों से संवाद करते हुए उन्होंने उनके साक्षरता और शैक्षणिक स्तर का परीक्षण किया। डॉ. कपूर ने शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए सभी बंदियों को अध्ययन, आत्म-विकास और रचनात्मक गतिविधियों से निरंतर जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि शिक्षा ही पुनर्वास का सबसे प्रभावी माध्यम है, जो बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।
प्रशासनिक निर्देश और सराहना
जेल में संचालित विभिन्न सुधारात्मक गतिविधियों, उद्योगों और व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए महानिदेशक ने जेल प्रशासन के प्रयासों की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने मौखिक और लिखित रूप से प्रस्तुत किए गए बंदियों के आवेदनों के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। साथ ही, आवश्यक प्रकरणों को विचारार्थ जेल मुख्यालय भेजने के लिए भी कहा गया।
इस निरीक्षण के दौरान जेल अधीक्षक सुश्री शेफाली तिवारी, जेल उप अधीक्षक श्री महेश प्रसाद टिकारिया, जेल उप अधीक्षक श्रीमती कुसुमलता डावर, मेडिकल ऑफिसर डॉ. कल्याणसिंह बेनल, सहायक जेल अधीक्षक श्री विनय काबरा सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
