कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु के सीएम विजय पर स्टालिन का हमला, सर्वदलीय बैठक की मांग
तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने सीएम सी. जोसेफ विजय पर कावेरी जल बंटवारे और मेकेदाटू बांध विवाद में अकेले बातचीत के असफल...

द क्लिफ न्यूज़ | चेन्नई | 1 अगस्त 2026
कावेरी नदी के जल बंटवारे और कर्नाटक द्वारा मेकेदाटू बांध के निर्माण को लेकर तमिलनाडु में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने वर्तमान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साधा है। स्टालिन का आरोप है कि सीएम विजय द्वारा कर्नाटक के साथ सीधे बातचीत के किए गए प्रयास विफल रहे हैं, जिससे तमिलनाडु अलग-थलग पड़ गया है। उन्होंने तमिलनाडु सरकार से राज्य का पक्ष मजबूत करने और एक एकीकृत रणनीति तैयार करने के लिए तत्काल एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर अपने बयान में कहा कि मुख्यमंत्री विजय ने राजनीतिक दलों और किसान संगठनों की चेतावनियों को अनसुना कर अकेले ही कर्नाटक से संवाद करने की कोशिश की, जिसका परिणाम असफलता और अनदेखी के रूप में सामने आया है।
कानूनी लड़ाई और कर्नाटक की एकजुटता पर जोर
एम. के. स्टालिन ने कहा, “पुराने अनुभवों ने हमें यही सिखाया है कि कावेरी का जायज हक नकारने वाले राज्य के खिलाफ कानूनी लड़ाई ही एकमात्र रास्ता है। कर्नाटक तमिलनाडु को केवल अधिशेष (surplus) पानी के निकास का बेसिन मानता है। सामूहिक विचार-विमर्श से ही इस जीवनरेखा से जुड़े मुद्दे का समाधान निकाला जा सकता है।”
स्टालिन के अनुसार, कर्नाटक सरकार द्वारा तमिलनाडु का पानी रोके जाने और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के आदेशों की अवहेलना के विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया ही सबसे ठोस विकल्प है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने 2 अगस्त को अपने राज्य में सर्वदलीय बैठक बुलाकर राजनीतिक एकजुटता का परिचय दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ऐसी बैठक कब बुलाएंगे।
किसानों की विकट स्थिति पर चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री ने कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों की विकट स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि मानसून की कमी और अपर्याप्त पानी की उपलब्धता के कारण किसान भीषण संकट से जूझ रहे हैं। स्टालिन ने चेतावनी दी कि यदि तत्काल सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो कुरुवई और संबा फसलों की खेती पर गंभीर संकट मंडराएगा, जिससे क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
