कटनी CSP निलंबित: हत्या आरोपी को फायदा पहुंचाने और जमीन सौदे के गंभीर आरोप
मध्य प्रदेश के कटनी में नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया को हत्या मामले की जांच में लापरवाही, जमीन सौदे में पद के दुरुपयोग और अवैध वसूली के आरोपों में निलंबित कर दिया गया है।

द क्लिफ न्यूज़ | कटनी | 22 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश के कटनी जिले में नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया को हत्या के एक मामले की जांच में घोर लापरवाही, पद के दुरुपयोग और अवैध वसूली जैसे गंभीर आरोपों के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में उनके कार्यालय से जुड़े कर्मचारियों और अन्य पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई को पुलिस विभाग में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला कुठला थाने में दर्ज हत्या के एक प्रकरण की जांच से जुड़ा है। आरोप है कि जांच के दौरान मुख्य आरोपी रमेश लोधी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए पुलिस स्तर पर दबाव बनाया गया। इस कथित लाभ के बदले रकम की मांग की गई, और जब परिवार नकदी देने में असमर्थ रहा, तो आरोपी के पिता की एक करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को बेहद कम कीमत पर रजिस्ट्री कराने का प्रयास किया गया।
जमीन सौदे में बड़ी अनियमितता का आरोप
जांच में यह बात सामने आई है कि हत्या के आरोपी रमेश लोधी को मामले में राहत दिलाने के लिएCSP नेहा पच्चीसिया द्वारा 15 लाख रुपये की मांग की गई थी। आरोप है कि जब आरोपी का परिवार यह राशि देने में सक्षम नहीं था, तब आरोपी के पिता की ग्राम कंहवारा स्थित करीब 2.15 हेक्टेयर जमीन, जिसकी बाजार और सरकारी मूल्यांकन के अनुसार कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक थी, को महज 18.20 लाख रुपये में रजिस्ट्री कराने का प्रयास किया गया। इस रजिस्ट्री में भुगतान का कुछ हिस्सा चेक और कुछ नकद दर्शाया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जमीन सीधे CSP के नाम न होकर उनके किसी करीबी व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर कराई गई। जांच अधिकारी इस पूरे मामले को सांठगांठ और पद के दुरुपयोग से जोड़कर देख रहे हैं।
जांच में देरी और डिफॉल्ट जमानत का मामला
मामले में पुलिस जांच की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि हत्या के मामले में निर्धारित समय सीमा के भीतर अदालत में चालान (आरोप पत्र) पेश नहीं किया गया। इस देरी के कारण मुख्य आरोपी को डिफॉल्ट जमानत का लाभ मिल गया। डिफॉल्ट जमानत कानून के तहत, यदि पुलिस निर्धारित अवधि में जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल नहीं करती है, तो आरोपी को यह वैधानिक अधिकार प्राप्त हो जाता है। यह जांच का विषय है कि जांच में यह देरी सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा थी या जानबूझकर की गई लापरवाही। यदि जानबूझकर देरी सिद्ध होती है, तो यह संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका को और भी गंभीर बना सकती है।
92 लाख रुपये की रकम का क्या हुआ?
शिकायत में एक और गंभीर आरोप यह भी सामने आया है कि जमीन के सौदे से जुड़ी तय रकम में से लगभग 92 लाख रुपये का भुगतान वापस नहीं किया गया। इसके बाद आरोपी के बेटे द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से शिकायत की गई। इस शिकायत के आधार पर जबलपुर आईजी के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा गहन जांच कराई गई, जिसमें पुलिसकर्मियों की भूमिका की पड़ताल की गई।
FIR दर्ज और CSP कार्यालय सील
जांच रिपोर्ट के आधार पर कुठला थाने में CSP नेहा पच्चीसिया और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जबरन वसूली और आपराधिक साजिश सहित गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। वर्तमान में एफआईआर में लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं और न्यायालय में इनकी सत्यता सिद्ध होनी बाकी है। कार्रवाई के दौरान, मामले से जुड़े दस्तावेजों, केस रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से CSP कार्यालय को भी सील कर दिया गया है। जांच एजेंसियां हत्या मामले की केस डायरी, आरोप पत्र की तैयारी, जमीन के सौदे और कथित रकम के लेनदेन के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास कर रही हैं।
छह पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
इस मामले में CSP के साथ-साथ उनके कार्यालय से जुड़े कर्मचारियों और जांच में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, CSP के रीडर, गनमैन, ड्राइवर और दो सब-इंस्पेक्टरों सहित कुल छह पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। इन सभी पर जांच में लापरवाही बरतने और कथित सांठगांठ में भूमिका निभाने का आरोप है। विभागीय स्तर पर यह भी जांच की जा रही है कि किस अधिकारी या कर्मचारी ने किस स्तर पर क्या भूमिका निभाई।
पूर्व में भी लगे थे वसूली के आरोप
यह पहला मौका नहीं है जब CSP नेहा पच्चीसिया के खिलाफ इस तरह के आरोप लगे हों। इससे पहले भी कथित अवैध वसूली से जुड़ी एक शिकायत सामने आई थी, जिसके बाद मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई थी। उस प्रकरण के बाद उनके कार्यक्षेत्र में भी बदलाव किया गया था। अब हत्या के मामले से जुड़े जमीन सौदे के आरोप सामने आने के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर निलंबन
पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तत्काल प्रभाव से CSP नेहा पच्चीसिया को निलंबित करने के निर्देश दिए। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें जबलपुर DIG कार्यालय से अटैच किया गया है। सरकार की इस कार्रवाई को पुलिस विभाग में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि और दोषियों का निर्धारण जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
जांच में अनुत्तरित कई सवाल
कटनी का यह मामला अब केवल एक पुलिस अधिकारी के निलंबन तक सीमित नहीं है। इस पूरी घटनाक्रम में कई अहम सवाल अनुत्तरित हैं, जिनके जवाब जांच और आगामी कानूनी प्रक्रिया से ही सामने आएंगे। इन सवालों में शामिल हैं: हत्या के आरोपी से कथित 15 लाख रुपये की मांग किसने और किस आधार पर की? एक करोड़ रुपये मूल्य की जमीन मात्र 18.20 लाख रुपये में क्यों रजिस्टर्ड हुई? जमीन किसके नाम ट्रांसफर की गई और उसका पुलिस अधिकारियों से क्या संबंध था? आरोप पत्र दाखिल करने में देरी किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या मंशा थी? आरोपी को मिली डिफॉल्ट जमानत के लिए पुलिस जांच की क्या भूमिका रही? कथित 92 लाख रुपये की रकम कहां गई? और CSP कार्यालय के कर्मचारियों व अन्य पुलिसकर्मियों की वास्तविक भूमिका क्या थी?
फिलहाल, पुलिस विभाग ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। मामले में लगाए गए सभी आरोपों को जांच के अंतिम निष्कर्ष और न्यायालय के निर्णय तक केवल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
