कस्तूरबा विद्यालय में अनियमितताओं के आरोप: डीएम से निष्पक्ष जांच की मांग
फर्रुखाबाद के राजेपुर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में वार्डन और एक शिक्षिका पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। डीएम से गोपनीय और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 6 अगस्त 2026
फर्रुखाबाद जिले के राजेपुर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में तैनात वार्डन और एक शिक्षिका के विरुद्ध गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों को लेकर एक शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी (डीएम) को एक शिकायती पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष और गोपनीय जांच कराए जाने की मांग की है।
शिकायत पत्र में विद्यालय में अव्यवस्था, सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और छात्राओं के साथ कथित अनुचित व्यवहार जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, छात्राओं को मिलने वाली खाद्य सामग्री एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं के वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती जा रही हैं, जिससे शासन द्वारा निर्धारित सुविधाएं छात्राओं तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रही हैं।
छात्राओं के कथित उत्पीड़न का आरोप
आरोपों के मुताबिक, छात्राओं पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है और यदि वे इसका विरोध करती हैं तो उन्हें कथित तौर पर प्रताड़ित किया जाता है। यह भी कहा गया है कि विद्यालय की कुछ सामग्री को परिसर के बाहर एक पंचायत भवन में रखा जाता है, जिसके उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इस प्रकार की भंडारण व्यवस्था के कारण सामग्री की बर्बादी और पारदर्शिता की कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। छात्राओं की सुरक्षा और उनके कल्याण को सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण पहलू है, और इन आरोपों के मद्देनजर, इस बात पर चिंता जताई गई है कि उनकी उचित देखभाल नहीं की जा रही है।
सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की आशंका
शिकायत में इस बात का भी उल्लेख है कि विद्यालय में उपलब्ध सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया जा रहा है। यह आरोप विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि इससे उन संसाधनों की उपलब्धता प्रभावित होती है जो छात्राओं की शिक्षा और विकास के लिए आवश्यक हैं। अनुपलब्ध या कम मात्रा में भोजन, शैक्षिक सामग्री, और अन्य सुविधाओं का सीधा असर छात्राओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। यह भी संभावना है कि संसाधनों का व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा हो, जो कि सरकारी नियमों का उल्लंघन है। इस प्रकार की अनियमितताएं संस्था के प्रति विश्वास को कम करती हैं और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को बल देती हैं।
पूर्व में भी हुई शिकायतों का उल्लेख
शिकायतकर्ता ने इस बात पर भी जोर दिया है कि इससे पूर्व भी संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कई शिकायतें की जा चुकी हैं, परंतु उन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। यह बार-बार की शिकायतें और उन पर कार्रवाई का अभाव, मामले की गंभीरता को और बढ़ाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि या तो शिकायतें पर्याप्त रूप से गंभीर नहीं मानी गईं या फिर जांच प्रक्रिया में कहीं न कहीं कमी रही। इसी पृष्ठभूमि में, जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की गहराई से और निष्पक्ष जांच की अपेक्षा की गई है, ताकि दोषियों को दंडित किया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
प्रशासन की ओर से जांच का आश्वासन
शिकायतकर्ता का मानना है कि मामले की निष्पक्ष जांच से न केवल छात्राओं के अधिकारों की रक्षा हो सकेगी, बल्कि विद्यालय की व्यवस्था में भी सुधार आएगा। यह एक महत्वपूर्ण मांग है, क्योंकि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय जैसी संस्थाएं वंचित वर्ग की बालिकाओं को शिक्षा और आश्रय प्रदान करती हैं, और उनकी व्यवस्था का सुचारू होना अत्यंत आवश्यक है। इस संबंध में, प्रशासन की ओर से फिलहाल मामले की जांच कराए जाने का आश्वासन दिया गया है। यह आश्वासन शिकायतों पर ध्यान दिए जाने और कार्रवाई के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, हालांकि अंतिम परिणाम जांच की निष्पक्षता और गंभीरता पर निर्भर करेगा।
