करुणाधाम में 23 से 25 जुलाई तक ईशावस्याम महोत्सव
भोपाल के करुणाधाम आश्रम में 23 से 25 जुलाई तक ईशावस्याम महोत्सव-2026 के तहत 11वां श्री महालक्ष्मी देवालय स्थापना महोत्सव और त्रिदिवसीय सर्वभौम दिग्विजय महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 21 जुलाई 2026
भोपाल के नेहरू नगर स्थित करुणाधाम आश्रम में ईशावस्याम महोत्सव-2026 का आयोजन 23 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है। इस अवसर पर श्री महालक्ष्मी देवालय के 11वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय सर्वभौम दिग्विजय महायज्ञ का अनुष्ठान किया जाएगा। यह धार्मिक आयोजन 25 जुलाई तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन 1500 आहुतियाँ अर्पित की जाएंगी।
आश्रम के श्री शाश्वत शाण्डिल्य द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पीठाधीश्वर गुरुदेव श्री सुदेश जी शाण्डिल्य महाराज के पावन सानिध्य में यह महायज्ञ संपन्न होगा। प्रथम दिन 23 जुलाई को पंचांग प्रयोग, जल यात्रा, अथर्व पूजन, मंडल स्थापना, अरणी मंथन द्वारा अग्नि स्थापना और आचार्य पूजन का विधान है। यह दिन यज्ञ की नींव रखने और उसकी प्रक्रिया को आरंभ करने के लिए समर्पित रहेगा।
प्रथम दिवस का अनुष्ठान विशेष रूप से वैदिक परंपराओं के पालन पर केंद्रित होगा, जहाँ अग्नि की स्थापना को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। अरणी मंथन से अग्नि प्रज्वलित करने की प्राचीन विधि का प्रयोग किया जाएगा, जो यज्ञाग्नि के शुद्ध और दैवीय स्वरूप का प्रतीक है। आचार्य पूजन से यज्ञ की शुद्धि और निर्विघ्न संपन्नता सुनिश्चित की जाएगी।
धार्मिक अनुष्ठान का विस्तृत कार्यक्रम
महायज्ञ के दूसरे दिन, 24 जुलाई को नित्य पूजन के साथ ब्राह्मण वरण, दक्षिण अग्नि स्थापना, वाजपेय, राजसूय, सौत्रामणि, चन्द्रष्टून और शुक्ल यजुर्वेद के मंत्रों द्वारा घृत आहुतियाँ प्रदान की जाएंगी। इस दिन का अनुष्ठान तुरीय संगीत के साथ संपन्न होगा, जो इसे एक आध्यात्मिक और संगीतमय अनुभव बनाएगा। वाजपेय, राजसूय और सौत्रामणि जैसे यज्ञ भारतीय वैदिक परंपरा के प्रमुख यज्ञों में से हैं, जो समृद्धि, विजय और आध्यात्मिक उन्नति की कामना से किए जाते हैं।
शुक्ल यजुर्वेद के मंत्रों का पाठ आहुतियों के साथ किया जाएगा, जो यज्ञ की पवित्रता और प्रभाव को बढ़ाएगा। तुरीय संगीत, जो एक विशेष आध्यात्मिक ध्वनि का पर्याय है, दूसरे दिन के अनुष्ठान को पूर्णता प्रदान करेगा। यह संगीतमय प्रस्तुति प्रतिभागियों को एक गहन ध्यान और भक्ति की अवस्था में ले जाने में सहायक होगी।
तीसरे और अंतिम दिन 25 जुलाई को भी नित्य पूजन और वेद मंत्रों से आहूतियाँ दी जाएंगी। इसी दिन अथर्व की शोभा यात्रा निकलेगी, जिसका नेतृत्व वैदिक अखाड़े के यजमान करेंगे। यह शोभा यात्रा वैदिक परंपरा की गरिमा और उत्साह को प्रदर्शित करेगी। कन्याओं द्वारा नृत्य प्रस्तुति और भंडारे के साथ त्रिदिवसीय अनुष्ठान पूर्ण होगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और भंडारे का आयोजन
धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ, महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया है। 23 और 24 जुलाई को रात्रि 8 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति होगी। ये कार्यक्रम महोत्सव के आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक उल्लासपूर्ण बनाने का कार्य करेंगे, जिसमें स्थानीय कलाकारों द्वारा विभिन्न प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी।
25 जुलाई को अनुष्ठान पूर्ण होने के उपरांत, दोपहर 12:30 बजे पूर्णाहुति का कार्यक्रम होगा। यह यज्ञ के समापन का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है, जहाँ सभी आहुतियों का अंतिम चरण पूरा किया जाता है। इसके पश्चात शाम 7:30 बजे माता महालक्ष्मी की दिव्य आरती का आयोजन किया जाएगा। यह आरती सभी श्रद्धालुओं के लिए सुख, समृद्धि और सौभाग्य की कामना के साथ की जाएगी। कार्यक्रम के अनुसार, प्रतिदिन सुबह 8:30 बजे से पूजन-हवन का सत्र प्रारंभ होगा। महोत्सव के समापन पर श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी भक्तों को प्रसाद ग्रहण करने का अवसर मिलेगा। यह आयोजन समुदाय को एक साथ लाने और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।
