कर्नाटक मंत्रिमंडल विस्तार: 10 नए चेहरे शामिल, नागेंद्र की वापसी पर विवाद
कर्नाटक में कांग्रेस ने 13 मंत्रियों के साथ मंत्रिमंडल का विस्तार किया है। 10 नए चेहरों को शामिल किया गया है, वहीं पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र की वापसी से विवाद खड़ा हो गया है।

द क्लिफ न्यूज़ | बेंगलुरु | 3 अगस्त 2026
कर्नाटक में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने लंबे इंतजार के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार किया है। इस विस्तार के तहत 20 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई, जिसमें 10 नए चेहरे शामिल हैं। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया खेमे के सात नेताओं को फिर से मंत्रिमंडल में जगह मिली है। यह विस्तार राज्य की राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा गया है, खासकर पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र की वापसी को लेकर।
मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे अधिक चर्चा पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र की वापसी को लेकर हो रही है। नागेंद्र को कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले के मामले में मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। कांग्रेस पार्टी ने उन्हें फिर से मंत्रिमंडल में शामिल कर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है। यह कदम जहां पार्टी के समर्थकों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है, वहीं विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक बड़ा अवसर भी प्रदान कर सकता है।
विवादित चेहरों की वापसी और राजनीतिक संदेश
बी. नागेंद्र के अलावा, कांग्रेस ने पंचमशाली लिंगायत समुदाय के प्रमुख नेता विजयानंद कशप्पनवर को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया है। कशप्पनवर इससे पहले मुफ्त आईपीएल टिकट मांगने से जुड़े एक आरोप के कारण विवादों में रहे थे। इन नियुक्तियों से स्पष्ट है कि पार्टी ने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने के साथ-साथ कुछ संवेदनशील राजनीतिक संदेश भी दिए हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अंतिम सूची जारी होने से पहले कई नामों पर फेरबदल किया गया, और एआईसीसी द्वारा सुबह जारी सूची में दोपहर तक संशोधन किया गया। मनकल वैद्य का नाम हटाकर एसएस मल्लिकार्जुन को शामिल किया गया। नए मंत्रियों को बेंगलुरु स्थित लोक भवन में शाम 4:05 बजे शपथ दिलाई गई।
विविध सामाजिक प्रतिनिधित्व का समावेश
कांग्रेस ने इस मंत्रिमंडल विस्तार में समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का प्रयास किया है। पहली बार मंत्री बनने वाले नेताओं में दलित, मुस्लिम, ओबीसी, एसटी और लिंगायत समुदायों के नेताओं को प्राथमिकता दी गई है। नए चेहरों में पीएम नरेंद्रस्वामी (दलित दाएं वर्ग), रिजवान अरशद (मुस्लिम समुदाय), डॉ. अजय सिंह (ओबीसी, पूर्व मुख्यमंत्री एन. धरम सिंह के पुत्र), टी. रघुमूर्ति (एसटी), एचसी बालकृष्ण (वोक्कालिगा), केएस बसवंतप्पा (दलित बाएं वर्ग), केएम शिवालिंगे गौड़ा (वोक्कालिगा), विजयानंद कशप्पनवर (पंचमशाली लिंगायत), रुद्रप्पा लमानी (बंजारा, एससी), और एवी गायत्री शांतेगौड़ा (कुरुबा समुदाय) प्रमुख हैं। यह समावेशी दृष्टिकोण राज्य में कांग्रेस की पकड़ को मजबूत करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
एवी गायत्री शांतेगौड़ा की राजनीतिक जीत
एवी गायत्री शांतेगौड़ा का मंत्रिमंडल में शामिल होना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है। उन्होंने 2022 में चिक्कमगलुरु स्थानीय प्राधिकरण निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद चुनाव लड़ा था। उनकी एक याचिका के बाद, मनोनीत सदस्यों के मतों को अलग किया गया और उन्हें चुनाव विजेता घोषित किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने भी यह माना कि मनोनीत सदस्यों को मतदान का अधिकार नहीं होता है। इस फैसले ने गायत्री शांतेगौड़ा को जीत दिलाई और अब उन्हें मंत्री पद से नवाजा गया है, जो उनकी राजनीतिक क्षमता और न्यायिक जीत का प्रमाण है।
कांग्रेस की सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति
कर्नाटक में यह मंत्रिमंडल विस्तार कांग्रेस की एक सोची-समझी सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी ने न केवल नए चेहरों को अवसर दिया है, बल्कि पुराने और अनुभवी नेताओं को वापस लाकर संगठन और सरकार के बीच एक मजबूत संतुलन बनाने का प्रयास किया है। हालांकि, बी. नागेंद्र जैसे विवादित चेहरों की वापसी विपक्ष, विशेषकर भाजपा, को सरकार पर भ्रष्टाचार और जवाबदेही को लेकर हमला करने का मौका दे सकती है। कांग्रेस का तर्क है कि नागेंद्र की राजनीतिक और कानूनी स्थिति की समीक्षा के बाद ही उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह राजनीतिक चाल राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाती है।
