करेली में 51 फीट रावण का दहन, कैबिनेट मंत्री ने दिया अहंकार त्यागने का संदेश
करेली में 51 फीट रावण का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया। कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने अहंकार त्यागने...

Kareli | संवाददाता: आशीष नेमा
द क्लिफ न्यूज़ | करेली | 21 अक्टूबर 2026
मध्य प्रदेश के करेली में विजयादशमी के पावन अवसर पर असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक एक भव्य दशहरा उत्सव मनाया गया। पुरानी गल्ला मंडी परिसर में सियाराम सेना समिति, ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन, गल्ला व्यापारी एवं जय बजरंग वानर सेना समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 51 फीट ऊंचे विशालकाय रावण के पुतले का दहन किया गया। इस अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन को देखने के लिए न केवल नगर के निवासी, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में उत्साही नागरिक उपस्थित हुए।
यह परंपरा, जो सदियों से चली आ रही है, बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश को जीवंत रखती है। रावण का पुतला, जो बुराई और अहंकार का प्रतीक है, के दहन से समाज में सकारात्मकता और धर्म की स्थापना का संदेश दिया जाता है। इस वर्ष के दशहरा उत्सव में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उनके साथ पूर्व राज्यमंत्री जालम सिंह पटेल, पूर्व राज्यसभा सांसद कैलाश सोनी, जिला भाजपा अध्यक्ष रामस्नेही पाठक, समाजसेवी महंत प्रीतमपुरी गोस्वामी, सुनील कोठारी, सुरेंद्र मोहन नेमा और नगर पालिका अध्यक्ष सुशीला ममार सहित कई गणमान्य अतिथि भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का आरंभ भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान की भव्य महाआरती तथा विधिवत पूजन-अर्चन के साथ हुआ। इसके उपरांत, परंपरागत रूप से रावण के पुतले को अग्नि समर्पित कर उसका दहन किया गया, जो एक प्रतीकात्मक जीत का क्षण था।
अहंकार त्याग और नारी सम्मान का संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने उपस्थित जनसमूह को रावण के चरित्र और उसके विनाशकारी अंत से सीख लेने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि रावण अत्यंत विद्वान और पराक्रमी होने के बावजूद अपने घोर अहंकार के कारण सर्वनाश को प्राप्त हुआ। मंत्री पटेल ने इस बात पर विशेष बल दिया कि रावण का जीवन और उसका अंत स्पष्ट रूप से यह प्रमाणित करता है कि व्यक्ति को सदैव अहंकार से दूर रहना चाहिए तथा नारी शक्ति का पूर्ण सम्मान करना चाहिए। उन्होंने रावण के चरित्र में व्याप्त अहंकार को उसकी हार का मुख्य कारण बताते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का पतन नहीं था, बल्कि एक ऐसे सिद्धांत की हार थी जो समाज के लिए हानिकारक है। उन्होंने विजयादशमी पर्व को सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर दृढ़ता से चलने के लिए एक प्रेरणादायक अवसर बताया, जो हमें निरंतर अपने कर्मों के प्रति सजग रहने की याद दिलाता है। मंत्री पटेल ने कहा कि यह पर्व हमें सिखाता है कि भले ही बुराई क्षणिक रूप से कितनी भी शक्तिशाली क्यों न लगे, अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है।
वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन
करेली की पुरानी गल्ला मंडी में रावण दहन की परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसे सियाराम सेना समिति द्वारा निरंतर सजीव बनाए रखा गया है। यह समिति, स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों के सहयोग से, हर वर्ष इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस वर्ष के आयोजन ने न केवल नगर की धार्मिक आस्थाओं को बल प्रदान किया, बल्कि इसकी सांस्कृतिक समृद्धता को भी नई ऊर्जा और जीवंतता प्रदान की है। विभिन्न समितियों जैसे ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन और जय बजरंग वानर सेना समिति का सहयोग इस परंपरा को बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इन संयुक्त प्रयासों से ही यह सदियों पुरानी परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक और जीवंत बनी हुई है, जितनी पहले थी। इस भव्य कार्यक्रम के सफल संचालन का श्रेय संयुक्त रूप से विभिन्न समितियों के अथक प्रयासों को जाता है, जिन्होंने मिलकर इस उत्सव को यादगार बनाया। यह सामूहिक प्रयास करेली के नागरिकों की एकता और अपने सांस्कृतिक धरोहर के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है।
कार्यक्रम का कुशल संचालन पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव और वैभव नेमा ने किया, जिन्होंने अपने संवाद कौशल से दर्शकों को बांधे रखा। अंत में, अभिषेक अग्रवाल ने सभी उपस्थित अतिथियों, सहयोगी संस्थाओं और जनसमूह के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी के सहयोग के बिना इस आयोजन की सफलता की कल्पना करना भी मुश्किल बताया। इस आयोजन की सफलता ने एक बार पुनः करेली की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया है। रावण दहन के साथ ही समूचे परिसर में विजयादशमी का उल्लास व्याप्त हो गया, और उपस्थित नागरिक सत्य के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हुए नजर आए। यह आयोजन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान था, बल्कि यह सामाजिक मेलजोल, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामूहिक चेतना का एक महत्वपूर्ण मंच भी बना। इस प्रकार, यह आयोजन धार्मिक आस्था और समृद्ध परंपरा के संगम का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
