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कार में दुष्कर्म मामले में आरोपी की जमानत खारिज, सुरपुरा थाना क्षेत्र का मामला

भिंड में कार में युवती से दुष्कर्म के मामले में आरोपी विवेक यादव की जमानत याचिका न्यायालय ने खारिज कर दी है। उस पर मुख्य आरोपी को सहयोग करने का आरोप है।

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कार में दुष्कर्म मामले में आरोपी की जमानत खारिज, सुरपुरा थाना क्षेत्र का मामला

द क्लिफ न्यूज़ | 10 अगस्त 2026

भिंड जिले के सुरपुरा थाना क्षेत्र में कार में एक युवती के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपी विवेक यादव को न्यायालय से राहत नहीं मिली है। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश अजित कुमार तिर्की ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। मामले में आरोपी विवेक यादव पर दुष्कर्म के मुख्य आरोपी सुमित यादव का सहयोग करने का आरोप है।

यह घटना 15 जुलाई को तब हुई जब पीड़िता सुरपुरा में हनुमान मंदिर के पास ऑटो का इंतजार कर रही थी। अभियोजन के अनुसार, मुख्य आरोपी सुमित यादव और विवेक यादव एक सफेद रंग की कार से वहां पहुंचे। सुमित ने पीड़िता से पूछा कि वह कहां जा रही है, और युवती के नावली में अपनी बुआ के घर जाने की बात कहने पर उसे कार में बैठा लिया।

मुख्य आरोपी द्वारा किया गया दुष्कर्म और धमकी

पीड़िता के बयान के अनुसार, कार में सुमित पीछे की सीट पर उसके साथ बैठा था, जबकि विवेक यादव कार चला रहा था। दोनों उसे अटेर के किले तक ले गए। आरोप है कि किले पर पहुंचने के बाद सुमित ने कार में ही युवती के साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद, सुमित ने पीड़िता को किसी को भी यह बात बताने पर जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद, दोनों आरोपी उसे परा तिराहे के पास ले जाकर कार से उतारकर फरार हो गए।

पुलिस कार्रवाई और न्यायालय का निर्णय

पीड़िता ने घटना के बाद अपने चाचा को फोन कर बुलाया और उन्हें पूरी आपबीती सुनाई। इसके बाद सुरपुरा पुलिस में मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई। पुलिस ने 18 जुलाई को आरोपी विवेक यादव को गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

आरोपी विवेक यादव की ओर से अधिवक्ता रामकरण शर्मा ने न्यायालय में जमानत के लिए याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान, पीड़िता की ओर से अधिवक्ता हिमांशु शर्मा ने जमानत का जोरदार विरोध किया और अपनी दलीलें पेश कीं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश अजित कुमार तिर्की ने आरोपी की जमानत याचिका को निरस्त करने का आदेश दिया।