कांवड़ियों पर मौलाना के बयान से भड़का संत समाज, जताई कड़ी नाराजगी
मौलाना साजिद रशीदी के कांवड़ियों पर कथित विवादास्पद बयान से संत समाज, हिंदू संगठनों और भाजपा में आक्रोश है। उन्होंने इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर हमला बताया है।

द क्लिफ न्यूज़ | 7 अगस्त 2026
देशभर में श्रावण मास की पवित्र कांवड़ यात्रा के दौरान, ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी के एक कथित बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। मौलाना रशीदी ने यात्रा के दौरान हुई कुछ छिटपुट घटनाओं का हवाला देते हुए कुछ कांवड़ियों की तुलना 'आतंकवादियों' और 'नशेड़ियों' से की है, जिसके बाद धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
मौलाना साजिद रशीदी के अनुसार, कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ लोग नशे की हालत में उत्पात मचाते हैं, पुलिसकर्मियों से भिड़ते हैं और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को शिवभक्त कहना अनुचित है। हालांकि, उनके इस बयान को कई संगठनों ने पूरे कांवड़ समुदाय और करोड़ों शिव भक्तों की आस्था पर सीधा हमला करार दिया है।
संत समाज में तीव्र आक्रोश
मौलाना के इस बयान के पश्चात् संत समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। हरिद्वार सहित देश के विभिन्न हिस्सों से साधु-संतों ने इसे सनातन आस्था और भगवान शिव के भक्तों का घोर अपमान बताया है। संतों का कहना है कि कांवड़ यात्रा करोड़ों श्रद्धालुओं की गहरी धार्मिक आस्था से जुड़ी एक अत्यंत महत्वपूर्ण परंपरा है। अधिकांश श्रद्धालु अत्यंत नियम, संयम और भक्ति भाव के साथ इस यात्रा को पूर्ण करते हैं।
संत समाज ने इस प्रकार के बयानों को लेकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले वक्तव्य देने वालों को सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना करनी चाहिए। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसमें भाग लेने वाले अधिकांश भक्त पूर्ण श्रद्धा व अनुशासन के साथ अपनी यात्रा संपन्न करते हैं, ऐसे में कुछ असामाजिक तत्वों के कारण पूरे समुदाय को कटघरे में खड़ा करना न्यायसंगत नहीं है।
राजनीतिक दलों और हिंदू संगठनों ने साधा निशाना
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विभिन्न हिंदू संगठनों ने भी मौलाना के बयान को समाज में अनावश्यक तनाव उत्पन्न करने वाला बताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि किसी भी धार्मिक यात्रा में यदि कोई व्यक्ति कानून का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। परंतु, कुछ व्यक्तियों की कदाचार के आधार पर पूरी धार्मिक यात्रा या समुदाय पर सामूहिक टिप्पणी करना अत्यंत अनुचित और निंदनीय है।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और समर्थक संगठनों ने इस बात पर जोर दिया कि कांवड़ यात्रा भारत की प्राचीन और गौरवशाली धार्मिक परंपराओं में से एक है, जिसमें लाखों लोग अत्यंत श्रद्धा और अनुशासन का पालन करते हुए भाग लेते हैं। इस तरह के बयान समाज के विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य फैलाने का काम करते हैं और राष्ट्र की एकता के लिए हानिकारक हैं।
कांवड़ यात्रा: परंपरा और अनुशासन का संगम
हर साल श्रावण मास में लाखों की संख्या में शिवभक्त अपनी कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। वे हरिद्वार, गंगोत्री, गोमुख और अन्य पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्रों के शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। यह परंपरा अत्यंत प्राचीन है और आस्था का प्रतीक मानी जाती है। इस दौरान, प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए जाते हैं।
हालांकि, यह भी सत्य है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ एकत्र होने वाली यात्राओं में कभी-कभी कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा नियमों का उल्लंघन किए जाने या अव्यवस्था फैलाने की घटनाएं प्रकाश में आती हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन द्वारा त्वरित और प्रभावी कार्रवाई भी की जाती है। परंतु, कुछ घटनाओं को आधार बनाकर पूरी यात्रा और उसमें शामिल करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाना कहीं से भी उचित नहीं ठहराया जा सकता।
सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस
मौलाना साजिद रशीदी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और राजनीतिक मंचों पर बहस अत्यंत तेज हो गई है। एक वर्ग इस बयान को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत सामाजिक मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करने का एक प्रयास बता रहा है। वहीं, दूसरा वर्ग इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाने वाला और उनका अपमान मानने के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला कदम करार दे रहा है।
वर्तमान विवाद के बीच, यह मांग पुरजोर तरीके से उठाई जा रही है कि धार्मिक आयोजनों और समुदायों के संबंध में बयान देते समय सभी को अत्यधिक संयम और विवेक से काम लेना चाहिए, ताकि सामाजिक समरसता और सौहार्द बना रहे। इस प्रकार के विवादास्पद बयान न केवल धार्मिक भावनाएं आहत करते हैं, बल्कि देश की सामाजिक एकता के लिए भी एक गंभीर चुनौती पेश करते हैं।
