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कंगना के 'जेनरेशन गटर' बयान से सियासी घमासान, विपक्ष ने जताई आपत्ति

अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने युवा प्रदर्शनकारियों की भाषा पर आपत्ति जताते हुए उन्हें 'जेनरेशन गटर' कहा, जिसके बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

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कंगना के 'जेनरेशन गटर' बयान से सियासी घमासान, विपक्ष ने जताई आपत्ति

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 28 जुलाई 2026

नई दिल्ली: जानी-मानी अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत ने हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए कुछ युवा आंदोलनों और सोशल मीडिया पर वायरल हुई प्रदर्शनों की सामग्री को लेकर एक विवादास्पद टिप्पणी की है। प्रदर्शनकारियों द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा और अभिव्यक्ति की शैली पर आपत्ति जताते हुए, कंगना ने युवा पीढ़ी के एक वर्ग को 'जेनरेशन गटर' (Generation Gutter) करार दिया है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है और विपक्षी दलों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे युवा विरोधी करार दिया है।

कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट के माध्यम से जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों और उनसे जुड़ी वायरल हो रही वीडियो क्लिप्स की आलोचना की। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसके साथ ही सार्वजनिक मंचों पर भाषा और मर्यादा का ध्यान रखना भी अत्यंत आवश्यक है। कंगना के अनुसार, जिस प्रकार की अभद्र भाषा और अपमानजनक टिप्पणियों का प्रयोग कुछ प्रदर्शनों में किया जा रहा है, वह समाज के लिए एक गलत संदेश प्रेषित करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता बटोरने के लिए सामाजिक मूल्यों और गरिमा के अनुरूप न होने वाली सामग्री प्रस्तुत करना गलत है।

युवाओं के संस्कारों पर उठाए सवाल

अभिनेत्री-सांसद ने युवा पीढ़ी के एक हिस्से के व्यवहार और संस्कारों पर भी प्रश्नचिह्न लगाए। उन्होंने प्रदर्शनों में शामिल कुछ युवाओं की गतिविधियों को लेकर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की और उन्हें 'जेनरेशन गटर' जैसे कठोर शब्दों से संबोधित किया। कंगना ने इस बात पर जोर दिया कि कुछ युवा बिना किसी जिम्मेदारी को समझे केवल विरोध करने या सोशल मीडिया पर वायरल होने के उद्देश्य से ऐसे आयोजनों में भाग ले रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों की भूमिका का भी उल्लेख किया और कहा कि युवाओं को न केवल स्वतंत्रता, बल्कि अनुशासन और जिम्मेदारी की शिक्षा देना भी आवश्यक है।

विपक्ष का तीखा पलटवार, माफी की मांग

कंगना रनौत के इस बयान के सामने आते ही विपक्षी नेताओं ने उन पर तीखा पलटवार किया है। कई विपक्षी नेताओं ने उनके शब्दों की निंदा करते हुए कहा है कि लोकतांत्रिक आंदोलनों में हिस्सा लेने वाले युवाओं के लिए इस तरह की अपमानजनक भाषा का प्रयोग किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता। विपक्ष का यह भी तर्क है कि किसी भी आंदोलन में शामिल सभी युवाओं को एक ही नजर से देखना गलत है और इससे युवा वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है। कुछ प्रमुख विपक्षी नेताओं ने कंगना रनौत से अपने बयान पर तुरंत स्पष्टीकरण देने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। उनका आरोप है कि भाजपा सांसद ने देश के युवाओं और विशेष रूप से महिलाओं के एक वर्ग के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी की है। विपक्ष के अनुसार, असहमति और आलोचना लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन इस दौरान भाषा में संयम बनाए रखना सभी के लिए अनिवार्य है।

समर्थकों का बचाव, अनुशासन पर जोर

वहीं, कंगना रनौत के बयान के समर्थन में खड़े लोगों का कहना है कि उनकी टिप्पणी केवल उन लोगों के खिलाफ थी, जो प्रदर्शन के नाम पर अश्लील सामग्री और अभद्र भाषा को बढ़ावा दे रहे थे। समर्थकों का तर्क है कि किसी भी आंदोलन की प्रभावशीलता उसके मूल मुद्दों और उसे प्रस्तुत करने के अनुशासित तरीके पर निर्भर करती है, न कि आपत्तिजनक नारों या सोशल मीडिया पर साझा की जा रही विवादास्पद सामग्री पर। उनके अनुसार, कंगना का उद्देश्य सार्वजनिक मंचों पर व्यवस्था और मर्यादा बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित करना था।

डिजिटल युग में आंदोलनों की प्रासंगिकता

यह विवाद ऐसे महत्वपूर्ण समय में सामने आया है, जब देश में युवा आंदोलनों की प्रकृति और सोशल मीडिया की भूमिका को लेकर लगातार बहस जारी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सामग्री का तेजी से वायरल होना कई बार आंदोलनों की मूल मंशा और छवि को प्रभावित करता है। जहां एक ओर युवा अपनी आवाज उठाने और जन-जागरूकता फैलाने के लिए सोशल मीडिया का प्रभावी ढंग से उपयोग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रस्तुति की भाषा और उसकी मर्यादा को लेकर सवाल भी लगातार उठते रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कंगना रनौत का यह बयान किसी एक व्यक्ति की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया से कहीं अधिक है। यह बयान वर्तमान राजनीतिक संवाद के बदलते स्वरूप और डिजिटल युग की सोशल मीडिया संस्कृति को लेकर चल रही व्यापक बहस का ही एक हिस्सा बन गया है। यह संभव है कि यह मुद्दा आने वाले समय में संसद के सत्रों और विभिन्न राजनीतिक मंचों पर भी चर्चा का एक प्रमुख विषय बने।

फिलहाल, कंगना रनौत के बयान को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी तकरार देखने को मिल रही है। जहाँ भाजपा समर्थक इस बयान को सार्वजनिक मर्यादा बनाए रखने और अनुशासन की मांग के रूप में देख रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे युवा विरोधी और अपमानजनक टिप्पणी करार दे रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विवाद आगे किस दिशा में विकसित होता है और क्या कंगना रनौत अपने इस बयान पर कोई औपचारिक स्पष्टीकरण जारी करती हैं।