कलेक्टर ने मृतक के प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे परिवार को तत्काल राहत दिलाई
दमोह के जिला अस्पताल में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने ग्राम अगारा के मृतक सत्यम गौतम के माता-पिता की गुहार सुनी और मृत्यु प्रमाण पत्र...

दमोह | संवाददाता: अनिल राठौर
द क्लिफ न्यूज़ | दमोह | 10 अक्टूबर 2026
दमोह जिले में प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिला, जहाँ जिला कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने ग्राम अगारा बटियागढ़ के एक पीड़ित परिवार की व्यथा सुनी और उनके दिवंगत पुत्र के मृत्यु प्रमाण पत्र को तत्काल जारी करवाने के निर्देश दिए। यह घटना जिला अस्पताल परिसर में उस समय हुई जब मृतक सत्यम गौतम के माता-पिता, गिरीश गौतम और मीना गौतम, प्रमाण पत्र के लिए कई दिनों से भटक रहे थे।
10 अक्टूबर 2026 को, जब गिरीश और मीना गौतम ने जिला अस्पताल परिसर में कलेक्टर से मुलाकात की, तो उन्होंने अपनी पीड़ा बताई कि उनके बेटे सत्यम गौतम का निधन 22 सितंबर 2026 को हो चुका था, लेकिन मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने में उन्हें अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। परिजनों की मार्मिक व्यथा को सुनकर कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने तत्काल संज्ञान लिया और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि प्रमाण पत्र की प्रक्रिया प्राथमिकता के आधार पर पूरी की जाएगी।
अस्पताल परिसर में त्वरित संज्ञान और निर्देश
कलेक्टर यादव ने इस मामले में फौरन कार्रवाई करते हुए मोबाइल पर ही सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटैल और तहसीलदार रघुनंदन चतुर्वेदी को निर्देश दिए कि मृतक सत्यम गौतम का मृत्यु प्रमाण पत्र प्राथमिकता के आधार पर अतिशीघ्र जारी किया जाए। इन स्पष्ट और त्वरित निर्देशों के परिणामस्वरूप, जिला चिकित्सालय प्रशासन ने बिना किसी देरी के कार्यवाही की और मृतक सत्यम गौतम का मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कर परिजनों को सौंप दिया। इस तत्परता ने परिवार को बड़ी राहत प्रदान की, जिसने जिला प्रशासन की सक्रियता और संवेदनशीलता की स्थानीय स्तर पर सराहना की है।
अधिकारियों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाने के निर्देश
इस घटना के उपरांत, कलेक्टर ने जिले के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यालयों में आने वाले नागरिकों की समस्याओं का समाधान पूर्णतः मानवीय आधार पर किया जाना चाहिए। कलेक्टर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रशासनिक कार्यों में मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता देना हम सभी का परम कर्तव्य है, क्योंकि अंततः हम सभी इंसान हैं और एक-दूसरे की पीड़ा को समझना आवश्यक है।
