कलाई के फ्रैक्चर: बुजुर्ग महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस से बढ़ता है खतरा
कोलेस फ्रैक्चर, जो कलाई की रेडियस हड्डी में होता है, बुजुर्ग महिलाओं में आम है। रजोनिवृत्ति के बाद हड्डियों के घनत्व में कमी और ऑस्टियोपोरोसिस इसे और बढ़ा देते हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | 13 अक्टूबर 2026
कलाई के पास रेडियस हड्डी के निचले सिरे में होने वाला कोलेस फ्रैक्चर, विशेष रूप से 50 से 70 वर्ष की आयु की महिलाओं के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में गिरावट के कारण हड्डियों के घनत्व में कमी और ऑस्टियोपोरोसिस का बढ़ा हुआ जोखिम इस फ्रैक्चर के प्रति उनकी संवेदनशीलता को कई गुना बढ़ा देता है। हालांकि, यह फ्रैक्चर केवल बुजुर्ग महिलाओं तक सीमित नहीं है; युवाओं में भी यह गंभीर दुर्घटनाओं का परिणाम हो सकता है।
कोलेस फ्रैक्चर की विशेषता रेडियस हड्डी के निचले सिरे का टूटना है, जिसमें टूटा हुआ हिस्सा सामान्यतः हाथ के पिछले हिस्से की ओर खिसक जाता है। इसके परिणामस्वरूप, कलाई का आकार विकृत हो जाता है, जो अक्सर 'उल्टे चम्मच' या 'डिनर-फोर्क' जैसी विकृति का रूप ले लेता है। कुछ मामलों में, रेडियस हड्डी की लंबाई में कमी आ सकती है और कलाई के पास स्थित अल्ना हड्डी का छोटा उभरा हुआ भाग, जिसे अल्नर स्टाइलॉइड कहते हैं, भी प्रभावित हो सकता है।
फ्रैक्चर के कारण और सामान्य परिदृश्य
इस प्रकार के फ्रैक्चर का सबसे आम कारण 'फैले हुए हाथ पर गिरना' है। जब किसी व्यक्ति का संतुलन अचानक बिगड़ता है, तो वह अनजाने में खुद को बचाने के लिए हाथ आगे कर लेता है। शरीर का सारा भार कलाई पर पड़ते ही रेडियस हड्डी टूट जाती है। बच्चों में डिस्टल रेडियस फ्रैक्चर के अन्य प्रकार, जैसे बकल और ग्रीनस्टिक फ्रैक्चर, अधिक प्रचलित होते हैं। इसके विपरीत, किशोरों और युवा वयस्कों में इस प्रकार की चोटें प्रायः उच्च ऊर्जा वाली दुर्घटनाओं, जैसे तेज गति से वाहन चलाना, खेलकूद में गंभीर चोट लगना या ऊंचाई से गिरना, का परिणाम होती हैं। वहीं, अधिक उम्र के व्यक्तियों में, एक साधारण सी गिरावट भी हड्डी टूटने के लिए पर्याप्त हो सकती है, जो उनकी हड्डियों की कमज़ोरी को दर्शाता है।
लक्षण और तत्काल बचाव
कोलेस फ्रैक्चर के प्रमुख लक्षणों में कलाई में अचानक तेज दर्द, स्पष्ट सूजन, प्रभावित क्षेत्र का नीला पड़ना, हाथ को हिलाने-डुलाने में अत्यधिक कठिनाई और छूने पर अत्यधिक संवेदनशीलता शामिल हैं। गंभीर मामलों में, कलाई का विकृत आकार स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता है। कुछ व्यक्तियों को उंगलियों में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी का अनुभव भी हो सकता है, जो नसों पर दबाव पड़ने का संकेत हो सकता है। यदि हाथ ठंडा पड़ जाए, पीला दिखने लगे, उंगलियों में संवेदना कम हो जाए या दर्द और सूजन में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हो, तो यह तत्काल चिकित्सीय सहायता की मांग करने वाला संकेत है।
निदान और उपचार की प्रक्रिया
डॉक्टर फ्रैक्चर का निदान करने के लिए रोगी के चोट के इतिहास, दर्द की तीव्रता और शारीरिक जांच पर भरोसा करते हैं। एक्स-रे फ्रैक्चर की स्थिति, हड्डी के विस्थापन की दिशा और फ्रैक्चर की गंभीरता को सटीक रूप से निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उपचार का तरीका फ्रैक्चर की प्रकृति और हड्डी के खिसकने की मात्रा पर निर्भर करता है। यदि हड्डी अपनी सामान्य स्थिति में हो, तो उसे प्लास्टर या स्प्लिंट की सहायता से स्थिर किया जा सकता है। हालांकि, यदि हड्डी अधिक खिसकी हुई हो, तो डॉक्टर 'क्लोज्ड रिडक्शन' नामक प्रक्रिया से उसे उसकी सही स्थिति में लाने का प्रयास करते हैं। अत्यंत अस्थिर, जटिल या गंभीर फ्रैक्चर के मामलों में, सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है, जिसमें हड्डी को प्लेटों और स्क्रू की मदद से स्थिर किया जाता है।
पुनर्वास और दीर्घकालिक देखभाल
उपचार के दौरान, उंगलियों को धीरे-धीरे हिलाना, डॉक्टर के निर्देशानुसार हाथ को हृदय से ऊपर उठाकर रखना और नियमित जांच करवाना महत्वपूर्ण है। प्लास्टर हटने के बाद, कलाई की जकड़न, मांसपेशियों की कमजोरी और गतिशीलता में आई कमी को दूर करने के लिए फिजियोथेरेपी एक अनिवार्य हिस्सा बन जाती है। इस दौरान, बिना डॉक्टरी सलाह के वजन उठाने या कलाई पर किसी भी प्रकार का अत्यधिक दबाव डालने से पूरी तरह बचना चाहिए।
ऑस्टियोपोरोसिस और निवारक उपाय
बुजुर्ग महिलाओं के लिए, कोलेस फ्रैक्चर केवल एक स्थानीय चोट नहीं है, बल्कि यह हड्डियों की समग्र कमजोरी, विशेष रूप से ऑस्टियोपोरोसिस का एक महत्वपूर्ण संकेतक भी हो सकता है। इसलिए, ऐसे रोगियों में ऑस्टियोपोरोसिस की जांच और भविष्य में फ्रैक्चर के जोखिम का आकलन अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। चिकित्सकों की सलाह पर बोन मिनरल डेंसिटी (बीएमडी) की जांच करवाना, अपने आहार में पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी शामिल करना, एक संतुलित पोषण योजना का पालन करना और नियमित रूप से सुरक्षित व्यायाम करना हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होता है। इसके अतिरिक्त, घर में फिसलन पैदा करने वाली सतहों को ठीक करना, पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था करना और संतुलन सुधारने वाले व्यायामों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना गिरने के जोखिम को कम कर सकता है।
समय पर निदान, उचित उपचार और हड्डियों के स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने से कोलेस फ्रैक्चर से उबरने के बाद हाथ की पूर्ण कार्यक्षमता बनाए रखने और भविष्य में होने वाली ऐसी चोटों के जोखिम को प्रभावी ढंग से कम करने में मदद मिल सकती है।
